
करियर डेस्क : ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्राओं को अब प्रेग्नेंसी या मां बनने के कारण बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ना पड़ेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को भी मैटरनिटी लीव देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इतना ही नहीं ऐसी छात्राओं को उपस्थिति, परीक्षा आवेदन पत्र भरने आदि की समय सीमा में भी छूट मिलेगी। बता दें कि अभी तक MPhil और PHD की छात्राओं को मैटरनिटी लीव दी जाती थी, लेकिन अब सभी वर्ग की छात्राओं के लिए ये नियम जारी कर दिया गया है।
UGC के सचिव रजनीश जैन ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि एमफिल और पीएचडी जैसे स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं को मैटरनिटी लीव दिया जाए। अगर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में कोई छात्रा अगर प्रेग्नेंट है तो उसे मैटरनिटी लीव के साथ ही अटेंडेंस, एग्जाम एप्लिकेशन फॉर्म और बाकी सभी चीजों छूट दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए संस्थान अपने स्तर पर नियम लागू कर सकते हैं। विश्वविद्यालयों की ओर से कितने दिन की छुट्टी दी जाएगी, यह उनका खुद का फैसला होगा। पहले मैटरनिटी लीव नहीं मिलने के कारण एमफिल व रिसर्च में लड़कियां आगे नहीं आती थीं। लेकिन अब वह मैरिड लाइफ के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी कर सकती हैं।
बता दें कि भारत में शादी की उम्र पुरुषों के लिए 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल है। अभी तक यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन रेगुलेशन 2016 के मुताबिक एमफिल और पीएचडी की छात्राओं को 240 दिनों का मैटरनिटी लीव मिलती है। यूजीसी सचिव प्रो. रजनीश जैन ने मंगलवार को सभी विश्वविद्यालयों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अब सभी छात्राओं को भी मातृत्व अवकाश दिया जाए।
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