
Raylan Anil: भारत की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं NEET और JEE Advanced की सुरक्षा व्यवस्था पर एक 16 साल के छात्र ने ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है। दुबई में रहने वाले भारतीय छात्र रायलन अनिल ने महज पांच दिनों के भीतर दोंनों परीक्षा पोर्टलों में गंभीर खामियां खोजीं और इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को दी। खास बात यह रही कि उनकी सूचना के बाद अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए। जानिए निसर्गा और सार्थक के बाद अब कौन हैं रायलन अनिल, जिन्होंने देश के शिक्षा ढांचे में खामियों को उजागर किया है।
रायलन अनिल दुबई में रहते हैं और CBSE कक्षा 12वीं के छात्र हैं। रायलन के अनुसार NEET पोर्टल में कमजोरी खोजने में उन्हें करीब तीन घंटे लगे, जबकि JEE Advanced से जुड़ी समस्या को समझने और रिपोर्ट करने में तीन से चार घंटे का समय लगा। उन्होंने सबसे पहले इसकी जानकारी भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और संबंधित अधिकारियों को दी, उसके बाद ही सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर की।
रायलन के मुताबिक, NEET पोर्टल की जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने तेजी से कार्रवाई की। उन्होंने दावा किया कि NTA के महानिदेशक ने खुद उनसे संपर्क किया, पूरी प्रक्रिया समझी और इसके बाद जरूरी कदम उठाए गए। JEE Advanced मामले में भी संबंधित संस्थानों ने कुछ ही घंटों में समस्या का समाधान कर दिया।
रायलन का कहना है कि उनकी साइबर सुरक्षा में रुचि आठवीं कक्षा से शुरू हुई थी। लिनक्स सिस्टम (Linux System), बग बाउंटी प्रोग्राम (Bug Bounty Programs) और Capture The Flag (CTF) जैसी साइबर चुनौतियों के जरिए उन्होंने अपनी तकनीकी समझ विकसित की। भविष्य में वह चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) या साइबर सुरक्षा इंजीनियर बनना चाहते हैं।
नीट और जेईई एडवांस्ड जैसे बड़े नेशनल पोर्टल की कमियों की जानकारी ढूंढने के बारे में जब रायलन के माता-पिता को पता चला तब उनका पहला सवाल था कि "क्या तुम्हें जेल तो नहीं होगी?" तब रायलन ने समझाया कि उन्होंने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया है, बल्कि एथिकल हैकिंग की है। बाद में उनके माता-पिता ने एक वकील से भी सलाह ली ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके बेटे को किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े। जब उन्हें पूरी बात समझ आई तो वे गर्व महसूस करने लगे।
हालांकि रायलन ने यह भी माना कि शुरुआत में उन्हें डर था कि लोग उनकी मंशा को गलत समझ सकते हैं। जब उनकी पोस्ट वायरल हुई तो वे घबरा गए थे कि आगे क्या होगा। लेकिन NTA द्वारा संपर्क किए जाने के बाद उनकी चिंता काफी कम हो गई। अधिकारियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा। रायलन का मानना है कि सिस्टम की कमजोरियों को जिम्मेदारी से उजागर करना देश के खिलाफ नहीं, बल्कि देश को सुरक्षित बनाने की दिशा में योगदान है।
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