
Sidharth Babu Xi Jinping Interpreter: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इस तस्वीर को खुद पीएम मोदी के X अकाउंट से पोस्ट किया गया है। तस्वीर में तीनों बड़े नेता साथ नजर आ रहे हैं, लेकिन लोगों की नजर उनके पीछे खड़े एक युवा भारतीय अधिकारी पर भी टिक गई। आखिर यह शख्स कौन है, जो इतने अहम डिप्लोमैटिक मोमेंट में नेताओं के इतने करीब नजर आया? दरअसल इनका नाम सिद्धार्थ बाबू है और ये 36 साल के इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) ऑफिसर हैं। जानिए IFS ऑफिसर सिद्धार्थ बाबू कौन हैं, उनका एजुकेशन, करियर और लाइफ की रोचक बातें।
सिद्धार्थ बाबू मूल रूप से केरल के कोच्चि के रहने वाले हैं। उन्होंने मार अथानासियस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कोठामंगलम से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया और 2012 में पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने करीब दो साल ई-कॉमर्स सेक्टर में नौकरी की। हालांकि, उनका मन विदेश नीति और इंटरनेशनल अफेयर्स में ज्यादा था। इसी रुचि ने उन्हें सिविल सर्विस की तैयारी के लिए प्रेरित किया। पहले प्रयास में उन्हें कामयाबी नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगले प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सर्विस एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल की। इतनी शानदार रैंक के बाद भी उन्होंने IAS के बजाय IFS चुना।
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IFS में आने के बाद सिद्धार्थ की पहली बड़ी विदेशी पोस्टिंग चीन में हुई। 2018 से 2022 तक उन्होंने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी और बाद में सेकेंड सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। यहीं उन्होंने मंदारिन भाषा पर मजबूत पकड़ बनाई और चीन की राजनीति, अर्थव्यवस्था और भारत-चीन रिश्तों को करीब से समझा। चीन में बिताए चार साल उनके डिप्लोमैटिक करियर के लिए बेहद अहम साबित हुए। बाद में अमेरिका में रहते हुए उन्होंने मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन और ट्रांसलेशन में मास्टर डिग्री की।
2024 में दिल्ली लौटने के बाद सिद्धार्थ ने विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। जनवरी 2025 से वह ईस्ट एशिया डिविजन में डिप्टी सेक्रेटरी हैं। यह डिविजन चीन, जापान और कोरियाई प्रायद्वीप से जुड़े मामलों को देखता है। मंदारिन पर उनकी पकड़ की वजह से जरूरत पड़ने पर वह प्रधानमंत्री और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत में इंटरप्रेटर की भूमिका भी निभाते हैं।
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BRICS समिट की तस्वीर ने उन्हें सोशल मीडिया पर पहचान जरूर दिलाई, लेकिन यह पहला मौका नहीं था जब वह प्रधानमंत्री के साथ किसी बड़े कार्यक्रम में नजर आए। जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में भी वह पीएम मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच बातचीत में इंटरप्रेटर की भूमिका निभाते दिखाई दिए थे। सिद्धार्थ बाबू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसमें एक इंजीनियर से डिप्लोमैट बनने और फिर चीन की भाषा व मामलों के एक्सपर्ट के तौर पर प्रधानमंत्री के अहम संवादों का हिस्सा बनने तक का शानदार सफर साफ दिखाई देता है।
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