
नई दिल्ली. 4 महीने पहले केंद्र सरकार ने कोरोना की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को आर्थिक मदद का ऐलान किया था। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोरोना से मौत पर परिवार को 50 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा। इसके लिए कोरोना से मौत का सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। यह राशि जिला आपदा प्रबंधन अथॉरिटी(DDMA) से जारी की जाएगी। लेकिन इसके आंकड़ों में एक बड़ी विसंगति सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आंकड़ों से पता चला है कि मृतकों की संख्या से अधिक मुआवजा दावे पेश किए गए हैं। तेलंगाना औऱ गुजरात में यह अंतर 9 और 7 गुना ज्यादा है। जबकि महाराष्ट्र में यह अंतर काफी अधिक है।
महाराष्ट्र में मौतें 1.41 लाख, जबकि मुआवजा 2.13 लाख का मांगा गया
मुआवजा राशि के सही वितरण और व्यवस्था के लिए एक गाइडलाइन जारी की गई थी। अगर कोविड पॉजिटिव होने के 30 दिनों के भीतर किसी व्यक्ति ने आत्महत्या भी कर ली है, तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में दांवों का आंकड़ा 2.13 लाख पर पहुंच गया, जबकि मौतें 1.41 लाख हुई हैं। गुजरात में 89 हजार 633 दावे हुए हैं, जबकि मौतें 10 हजार 94 हैं। गुजरात ने अब तक 68 हजार 370 दावों को स्वीकार किया है, 58 हजार 840 परिवारों को मुआवजा राशि भेज दी है। तेलंगाना में मौत का आंकड़ा 3 हजार 993 था, जिसके मुकाबले 29 हजार दावे प्राप्त हुए। तेलंगाना ने 15 हजार 270 दावों को मंजूरी दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा
सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कह चुकी है कि उसका पूरा ध्यान इस बात पर है कि लोगों को राहत मिले। सरकारों को दिशा में काम करना चाहिए। कई राज्यों जैसे-असम, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब और राजस्थान में मौतें से कम मुआवजा दावे पेश किए गए हैं। पंजाब में 8 हजार 786 मुआवजा दावे आए हैं, जबकि मौतें 16 हजार 557 हैं। कर्नाटक में 27 हजार 325 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि मौतें 4 हजार 483 हुईं। जम्मू और कश्मीर में 4 हजार 483 मौतें हुई, लेकिन आवेदन 3 हजार 115 ही प्राप्त हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन बनाने को कहा था
सुप्रीम कोर्ट ने ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को कोरोना से मौत होने पर मुआवजे के भुगतान के लिए एक गाइडलाइन बनाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने NDMA को जून में आदेश दिया था कि मुआवजे की रकम वही तय करे। इसके बार तय किया गया कि मुआवजा राशि 50 हजार रुपए होगी।
ऐसे मिलेगा मुआवजा
मरीज RT-PCR टेस्ट, मॉलिकुलर टेस्ट, रैपिड एंटीजन टेस्ट या क्लिनिकल जांच के जरिए कोरोना पॉजिटिव निकला हो, बाद में जिसकी मौत हो गई हो। नगर निगम आदि की तरफ से जन्म-मृत्यु पंजीकरण (RBD) एक्ट, 1969 के तहत मेडिकल सर्टिफिकेट ऑफ कॉज ऑफ डेथ (MCCD) जारी किया गया हो।
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