
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को उसी के हथियार से मात देने का प्लान बनाया है। बीजेपी ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के मजबूत नेताओं को तोड़कर अपने खेमे में मिला लिया है और उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का फैसला भी किया है। बीजेपी इस फॉर्मूले से कई राज्यों की सियासी जंग फतह करने में कामयाब रही है। अब बीजेपी इस सक्सेज फॉर्मूले को दिल्ली के रण में केजरीवाल के खिलाफ अपनाने जा रही है।
दिल्ली की करावल नगर सीट से आप के टिकट पर पिछले विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले कपिल मिश्रा और बवाना सीट से आप से विधायक रहे वेद प्रकाश इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। ये दोनों नेता अपनी-अपनी सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि वेद प्रकाश को 2018 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने बवाना से प्रत्याशी भी बनाया था, लेकिन वह आप उम्मीदवार के आगे जीत नहीं सके थे।
टिकट की जुगत में है दूसरी पार्टियों से आए नेता
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने वाले पूर्व विधायक अमरीश गौतम कोंडली सीट से टिकट मांग रहे हैं। वहीं, आरकेपुरम से पूर्व विधायक रही बरखा सिंह कांग्रेस से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुकी हैं और टिकट की जुगत में है। इसी सीट से आप के टिकट पर 2013 के चुनाव लड़ने वाली शाजिया इल्मी भी बीजेपी की सदस्यता ग्राहण कर चुकी हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान दिल्ली के गांधीनगर से आप के विधायक अनिल बाजपेयी ने पार्टी से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था, जिसके बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई थी। अनिल वाजपेयी ने गांधीनगर सीट से टिकट मांग रहे हैं। देवली विधानसभा सीट से अनिल कुमार भी बीजेपी से टिकट की दावेदारी कर रखी है।
आप से बगावत, बीजेपी से आस
लोकसभा चुनाव के दौरान ही बिजवासन से विधायक देवेंद्र सहरावत ने भी आप से बगावत कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। देवेंद्र सेहरावत अब बिजवासन से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की कवायद में है। बीजेपी में बाहर से आए कई नेता भी टिकट के लिए मनचाही सीटों से दावेदारी ठोंकने से, पार्टी के पुराने नेताओं की मुसीबत बढ़ गई है और वो नए सियासी ठिकाने की तलाश में है।
हरियाणा में भी दलबदलुओं को मिला था टिकट
बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने करीब एक दर्जन के करीब दलबदलू नेताओं को मैदान में उतारा था, इनमें से ज्यादातर नेता हार गए थे। ऐसे ही महाराष्ट्र में बीजेपी ने अपने नेताओं को दरकिनार कर कांग्रेस और एनसीपी से नेताओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा था, जिनमें से आधे से ज्यादा चुनाव हार गए थे। झारखंड में बीजेपी ने दलबदलुओं को अहमियत देते हुए चुनावी मैदान में उतारा था, इनमें ज्यादातर सीटिंग विधायक थे जो अपनी सीट नहीं बचा सके। बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले जयप्रकाश पटेल और भानुप्रताप शाही ही जीतने में कामयाब रहे हैं।
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