
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव नतीजों में आम आदमी पार्टी की जीत तय हो चुकी है। दिल्ली में फिर से अरविंद केजरीवाल की सरकार बनना तय है। इस पुरे चुनाव को आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल के चेहरे के दम पर लड़ा था। लेकिन इस चुनाव में पर्दे के पीछे से कई नेता शामिल हैं, उनके अलावा कई चेहरे ऐसे हैं जो पर्दे के पीछे रहकर जीत में बड़ी भूमिका निभाई है।
आइए जानते है ऐसे कुछ चेहरों के बारे में जिन्होंने आप को इस चुनाव में जीत दिलाने में एक अहम भूमिका निभाई है।
पंकज गुप्ता: ये आप के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के राजनीतिक मामलों के सदस्य हैं। वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भी सदस्य हैं। गुप्ता ने केजरीवाल के साथ जन लोकपाल आंदोलन के दौरान पर्दे के पीछे काम किया है. आप के लिए काम करने के लिए मल्टीनेशनल कंपनी की 40 लाख पैकेज वाली 25 साल पुरानी नौकरी छोड़ दी थी. आप के लिए फंड जेनरेट करने के लिए पंकज गुप्ता काम करते रहे हैं। पंकज गुप्ता ने व्यापारी समुदाय को आप से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। केजरीवाल से उनका दो दशक पुराना संबंध रहा है.
अमानतुल्ला खान: आम आदमी पार्टी के फायरब्रांड मुस्लिम चेहरा हैं अमानतुल्ला खान। खान मुस्लिम बहुल ओखला से विधायक हैं और वहीं से चुनाव लड़ रहे हैं वह दिल्ली के वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं। अमानतुल्ला खान ने शहानीबाग ने दिल्ली चुनाव में वोटरों को लामबंद करने में बड़ी भूमिका निभाई है। पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा समेत बीजेपी के सभी नेता अपनी सभाओं में शाहीनबाग का जिक्र करते रहे हैं।
संजय सिंह: आप के प्रवक्ता, राज्यसभा सांसद और पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य हैं। दिल्ली चुनावों में पार्टी ने इन्हें प्रचार अभियान का प्रमुख बनाया था। टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार करने और मीडिया में विपक्ष का काउंटर करने की जिम्मेदारी संजय सिंह के कंधों पर थी। इसके अलावा पूर्वांचली वोटरों को आप के लिए लामबंद करने का जिन्ना भी संजय सिंह के कंधों पर था।
भगवंत मान: पंजाब से सांसद और पंजाब की आप इकाई के अध्यक्ष हैं। दिल्ली में पंजाबी और सिख वोटरों को लुभाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर ही थी। उन्होंने पूरी दिल्ली में कई रैलियां और रोड शो किए। उन्होंने सिख बहुल इलाकों में दर्जन भर से ज्यादा रोड शो और करीब 200 चुनावी जनसभाएं कीं। मान ने दावा किया है कि उनके नेतृत्व में पंजाब से 5000 से ज्यादा पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में करीब एक महीने रहकर चुनाव प्रचार किया है।
दुर्गेश पाठक: गोरखपुर के रहने वाले दुर्गेश पाठक आप की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य हैं और अरविंद केजरीवाल के बेहद भरोसेमंद साथी भी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में और पंजाब विधानसभा चुनाव में दुर्गेश पाठक केजरीवाल के साथ थे। दिल्ली चुनावों में भी उन्होंने टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी जीत की रणनीति बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। पाठक गांव से दिल्ली IAS बनने का ख्वाब लेकर आए थे लेकिन 2011 के अन्ना आंदोलन से जुड़कर केजरीवाल के करीब हो गए। दुर्गेश पाठक बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने और युवाओं में जोश भरने के उस्ताद माने जाते हैं।
प्रशांत किशोर: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी केजरीवाल की वापसी कराने में बड़ी भूमिका निभाई है। आप के चुनाव प्रचार की कमान संभालते ही पीके ने आप के चुनावी नारे को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके अलावा चुनावी जीत की रणनीति बनाने, लक्षित समूह पर ध्यान देने, बीच चुनाव में ‘लगे रहो केजरीवाल’ से ‘दिल्ली में तो केजरीवाल’ का नारा देने में बड़ी भूमिका निभाई।
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