एशियानेट न्यूज सर्वे: गुजरात में एक बार फिर BJP सरकार, जानें कैसे कांग्रेस का वोट खा रही आप

Published : Oct 30, 2022, 03:56 PM ISTUpdated : Oct 31, 2022, 12:01 PM IST
एशियानेट न्यूज सर्वे: गुजरात में एक बार फिर BJP सरकार, जानें कैसे कांग्रेस का वोट खा रही आप

सार

 Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात में एशियानेट न्यूज-सीफोर ने 23 सितंबर 2022 से 10 अक्टूबर 2022 के बीच प्री-पोल सर्वे यानी चुनाव पूर्व सर्वेक्षण किया। इसकी फाइनल रिपोर्ट में भाजपा एक बार फिर राज्य की सत्ता पर काबिज होती दिख रही है। वहीं, दिल्ली और पंजाब के बाद अब गुजरात विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के लिए आप मुसीबत बनती दिख रही है। 

गांधीनगर।  Gujarat Assembly Election 2022गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि यह अगले हफ्ते में किसी भी दिन हो सकता है और इसके बाद राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी। भाजपा चाहती है कि सत्ता की चाभी सातवीं बार भी उसके पास ही रहे। वहीं, कांग्रेस लंबे समय से राज्य की सत्ता से दूर रहने के बाद चाहती है कि इस बार तो वापसी हो ही जाए, जबकि दिल्ली और पंजाब के नतीजों से उत्साहित आम आदमी पार्टी यहां भी खाता खोलने को उत्सुक दिख रही है। 

बहरहाल, गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर एशियानेट न्यूज और सीफोर (Asianet News and CFore) ने प्री-पोल सर्वे आयोजित किया। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार भी भाजपा ही सत्ता में वापसी करती दिख रही है। वहीं, कांग्रेस की उम्मीदों पर आम आदमी पार्टी पानी फेरती दिखाई दे रही है। सर्वे में भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बना रही है। पार्टी 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 133 से 143 सीटों पर जीत हासिल करती दिख रही है, जो किए रिकॉर्ड है, क्योंकि अब तक सिर्फ 2002 के चुनाव में भाजपा ने सबसे अधिक 127 हासिल की थी। हालांकि, इस बार पार्टी को 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले एक प्रतिशत वोट शेयर का नुकसान होता दिख रहा है। वहीं, कांग्रेस 31 प्रतिशत वोट शेयर के साथ महज 28 से 37 सीट पर सिमटती दिख रही है। उसे 10 प्रतिशत वोट शेयर का नुकसान झेलना पड़ रहा है। 

आप को उम्मीद के मुताबिक सीट नहीं मिल रही 
सर्वे में जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वो ये कि अब तक मुफ्त के वादों की झड़ी लगाकर उत्साह में दिख रही आम आदमी पार्टी को नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रहे। पार्टी को 16 प्रतिशत वोट के साथ केवल 5 से 14 सीट मिलती नजर आ रही है। हालांकि, उसे 16 प्रतिशत वोट शेयर का फायदा मिल रहा है। वहीं, अन्य के खाते में 5 प्रतिशत वोट के साथ केवल 1 से 3 सीट आ रही है। इन्हें 5 प्रतिशत वोट शेयर का नुकसान हो रहा है। 

केजरीवाल के दावे और वादे पूरा करने पर लोगों को शक 
माना जा रहा है कि कांग्रेस के वोट शेयर में गिरावट मजबूत नेतृत्व की कमी की वजह से है। हालांकि, आप का प्रदर्शन भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा और इसकी वजह है कि 37  प्रतिशत लोग अरविंद केजरीवाल के मुफ्त के वादों से प्रभावित नहीं हैं। इसके अलावा, 64 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि केजरीवाल भारी-भरकम वादा तो कर रहे, मगर उसे पूरा नहीं कर पाएंगे। 

भूपेंद्र पटेल सीएम पद की पहली पसंद 
इस चुनाव में 34 प्रतिशत लोग भूपेंद्र पटेल को एक बार फिर सीएम पद पर देखना चाहते हैं। वहीं, दूसरे नंबर पर नरेश पटेल हैं, जिन्हें 8 प्रतिशत लोग मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए हार्दिक पटेल को 4 प्रतिशत लोग सीएम पद पर देखना चाहते हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी पर विवादित टिप्पणी करके चर्चा में आए आप नेता गोपाल इटालिया को 5 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि वे मुख्यमंत्री बनें। 

भाजपा को पसंद करने की बड़ी वजहें 
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेदाग और ईमानदार छवि से प्रभावित हैं। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गुजरात में किए गए विकास कार्यों से भी वे संतुष्ट हैं। 34 प्रतिशत वोटर्स ने राज्य सरकार के प्रदर्शन को अच्छा बताया और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के काम की तारीफ की। वहीं, 9 प्रतिशत ने इसे एक्सीलेंट बताया। 

बेरोजगारी और महंगाई को लेकर नाराजगी 
हालांकि, सर्वें रिपोर्ट में समाज के कुछ वर्ग, खासकर निम्न आय वर्ग के लोगों ने कहा कि वे आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमत से परेशान और सरकार से असंतुष्ट हैं। इसके अलावा, बेरोजगारी भी नाराजगी की बड़ी वजह है। दलित, आदिवासी, ठाकोर और मुस्लिम वर्ग के ज्यादातर मतदाता भाजपा सरकार ने नाराज हैं। 

हर विधानसभा क्षेत्र में एक हजार वोटर्स से बात की गई 
एशियानेट-सीफोर की टीम ने चुनाव पूर्व इस सर्वे को 23 सितंबर 2022 से 10 अक्टूबर 2022 के बीच किया था। कुल 182 विधानसभा सीट पर 1 लाख 82 हजार 557 वोटर्स से विभिन्न मुद्दों पर बात की गई। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग एक हजार वोटर्स से बात की गई। बात करने के लिए लोगों को विभिन्न उम्र, शिक्षा और लिंग के आधार पर चयनित किया गया था। उनसे महंगाई, बेरोजगारी, सड़क, ड्रेनज-सीवेज, पीने के पानी, परिवहन व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कूड़े के निपटान, बाजार और खेती की संभावनाओं और परेशानियों, बिजली, भ्रष्टाचार, कानून और व्यवस्था और कर्ज सुविधा आदि मुद्दों पर भी सवाल किए गए। 

क्या हो सकते हैं कांग्रेस के वोट शेयर में गिरावट के बड़े कारण 
दरअसल, लोगों को मानना है कि सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में ठोस नेतृत्व की कमी है। इसके अलावा, पार्टी के कई बड़े और प्रभावशाली नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए, जिसमें हार्दिक पटेल भी मजबूत उदाहरण हैं। इसके अलावा, राज्य में कांग्रेस पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और संगठन लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा के तहत गुजरात में घूम रहे हैं, जबकि चुनावी राज्यों में उनकी उपस्थिति होनी चाहिए थी। यही नहीं, राज्य के लोगों पर कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का बहुत असर होता नहीं दिख रहा। 

पिछले चुनाव में भाजपा को 99 को कांग्रेस को 77 सीट मिली थी 
गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 99 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, कांग्रेस ने 77 सीट पर जीत दर्ज की थी। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को एक सीट और भारतीय ट्राइबल पार्टी को 2 सीट पर जीत मिली थी। 3 निर्दलीय उम्मीदवार भी उस चुनाव में जीते थे। पिछले साल गुजरात में दो चरणों में चुनाव हुए थे। पहले चरण के लिए 9 दिसंबर को और दूसरे चरण के लिए 14 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। पहले चरण में 89 सीट और दूसरे चरण में 93 सीट पर वोटिंग हुई थी। चुनाव में कुल 68.41 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इससे पहले, 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 115 सीट मिली थी, जबकि कांग्रेस को 61 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। भाजपा को उस चुनाव में 47.9 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 38.9 प्रतिशत वोट मिले थे। 

27 साल से अपराजेय किला, इस बार भी कांग्रेस की राहें कठिन 
गुजरात की सत्ता में भाजपा 1995 से अब तक लगातार है। हालांकि, इससे पहले 1990 में भाजपा भाजपा ने जनता दल के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, मगर 1992 में राम मंदिर आंदोलन के समय यह गठबंधन टूट गया। 2002 के चुनाव में भाजप ने 127 सीटें जीती थीं और यह उसका अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है। यह चुनाव गुजरात में दंगों के बाद हुआ था। दंगे फरवरी 2002 में हुए थे, जबकि चुनाव दिसंबर 2002 में हुए थे। 2007 के चुनाव में पार्टी ने 117 जबकि 2012 के चुनाव में उसे 115 सीट पर जीत हासिल हुई थी। 

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