
गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में अब दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को है। इसके लिए प्रचार अभियान कल यानी शनिवार, 3 दिसंबर को शाम पांच बजे थम जाएगा। इस बार उत्तर और मध्य गुजरात के 14 जिलों की 93 सीटों पर वोटिंग होनी है। हालांकि, दो बार से कांग्रेस उत्तर गुजरात वाले जिलों में भाजपा से बेहतर प्रदर्शन करती रही है। कांग्रेस को यहां से पिछले विधानसभा चुनाव में 32 सीटें मिली थीं।
दरअसल, इस क्षेत्र में डेयरी सहकारी नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री विपुल चौधरी की गिरफ्तारी के कारण भाजपा को कुछ-कुछ इलाके में और थोड़ा पार्टी में भी विरोध-विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। विपुल चौधरी अन्य पिछड़ वर्ग यानी ओबीसी समुदाय से आते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ओबीसी की आबादी इस क्षेत्र में अधिक है और ये कई जगह निर्णायक भूमिका में साबित होते हैं। बता दें कि विपुल चौधरी पर 800 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप है। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी भी हुई है। उनकी गिरफ्तारी से उनके समुदाय के लोग नाराज हैं और बनासकांठा तथा मेहसाणा में इस समुदाय का प्रभुत्व अधिक है।
6 जिलों की कुल 32 सीटें अहम
उत्तर गुजरात के 6 प्रमुख जिले, जिनमें बनासकांठा, पाटन, मेहसाणा, साबरकांठा, अरावली और गांधीनगर शामिल हैं। इनमें कुल 32 विधानसभा सीट हैं। कांग्रेस ने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की 32 में से दोनों बार 17-17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, भाजपा ने 2012 में 15 और 2017 के विधानसभा चुनाव में 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पिछले चुनाव में एससी आरक्षित सीट वडगाम निर्दलीय उम्मीदवार जिग्नेश मेवानी के खाते में गई थी। हालांकि, तब मेवानी को कांग्रेस से समर्थनन हासिल था और इस बार मेवानी कांग्रेस के टिकट पर ही इस सीट से उम्मीदवार हैं।
भाजपा ने नए को मौका दिया, कांग्रेस ने ज्यादातर विधायकों को रिपीट किया
कांग्रेस ने इस इलाके में ज्यादातर अपने मौजूदा विधायकों को ही टिकट दिया है। पार्टी ने 11 विधायकों को उन्हीं की पुरानी सीट से रिपीट किया है। वहीं, भाजपा ने यहां से अपने मौजूदा 14 विधायकों में से केवल 6 को रिपीट किया है बाकी सीट पर नए उम्मीदवारों को मौका दिया गया है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों में एक चीज जो समान दिखती है, वो ये कि दोनों ने ही ज्यादातर पाटीदार और कोली समुदाय के नेताओं को ज्यादा टिकट दिया है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आम आदमी पार्टी के उत्तर गुजरात क्षेत्र में बहुत ज्यादा प्रभावी होने की गुंजाइश कम है। हालांकि, आप ने सूरत और दक्षिण गुजरात तथा सौराष्ट-कच्छ के कुछ इलाकों में टक्कर देने का दावा किया है।
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