
नई दिल्ली. प बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल गुरुवार को जारी किए गए। बंगाल में इस बार कांटे की टक्कर नजर आ रही है। चार पोल में से 2 में भाजपा को बहुमत, जबकि दो में ममता बनर्जी की वापसी होती दिख रही है। बंगाल में 8 चरणों में मतदान हुआ था। आखिरी चरण के लिए गुरुवार को वोटिंग हुई। 2 मई को नतीजे आएंगे।
बंगाल: कुल सीटें 294, बहुमत- 148
एबीपी-सी वोटर के मुताबिक, ममता की पार्टी टीएमसी को 152 से 164 सीटें मिलने के आसार हैं। वहीं, भाजपा को 109-121 और कांग्रेस-लेफ्ट को 14-25 सीटें मिलती दिख रही हैं। इस एग्जिट पोल के मुताबिक, टीएमसी को 42.1 प्रतिशत वोट मिल रहा है। वहीं बीजेपी के खाते में 39.1 प्रतिशत वोट मिलता दिख रहा है। इसके अलावा कांग्रेस को 15.4 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं।
- टाइम्स नाऊ-सी वोटर के मुताबिक, भाजपा को 115, लेफ्ट को 19 और टीएमसी को 158 सीटें मिलने का अनुमान है।
- रिपब्लिक-CNX ने टीएमसी को 133 जबकि भाजपा को 143 सीटें मिलने का अनुमान जताया है।
- जन की बात एग्जिट पोल में भाजपा को 162-185 सीटें, टीएमसी को 104-121 तो वहीं, लेफ्ट को 3-9 सीटें मिलती दिख रही हैं।
2016 की तुलना में भाजपा को बड़ी बढ़त
लगभग सभी एग्जिट पोल में भाजपा को 100 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। ऐसे में इसे बड़ी बढ़त माना जा रहा है। भाजपा को 2016 के चुनाव में सिर्फ 3 सीटें मिली थीं।
क्या हैं अन्य राज्यों को हाल
असम : Exit Polls 2021: असम में सभी पोल में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा, सीटें पिछली बार से भी ज्यादा
तमिलनाडु : कुल सीटें- 234, बहुमत- 118
इंडिया टुडे -एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक, एनडीए को 74 से 84 सीटे मिलने का अनुमान है। वहीं, यूपीए को 40-50 सीटें मिल सकती हैं।
एबीपी-सी वोटर के मुताबिक, एआईएडीएमके+ को 58-70 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, डीएमके+ को 160-172 सीटें मिलती दिख रही हैं।
चाणक्य-न्यूज 24 के मुताबिक, AIADMK+ को 57 ± 11 , DMK+ को 175 ± 11 सीटें मिलने का अनुमान है।
रिपब्लिक-CNX एग्जिट पोल के मुताबिक, तमिलनाडु में डीएमके को 160-170, एआईएडीएमके को 58-68 सीटें मिलने का अनुमान है।
केरल: कुल सीटें- 140, बहुमत- 71
इंडिया टुडे एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक, इस बार भी लेफ्ट सत्ता में बरकरार रहेगी। एलडीएफ को 104-120 सीटें, यूडीएफ को 20-36, और भाजपा को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है।
एबीपी-सी वोटर के सर्वे के मुताबिक, एलडीएफ को 71-77 सीटें, यूडीएफ को 62-68 सीटें, भाजपा को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है।
चाणक्य के मुताबिक, केरल में एलडीएफ को 102 ± 9 , यूडीएफ को 35 ± 9 और भाजपा को 3 ± 3 मिलती दिख रही हैं।
रिपब्लिक-CNX एग्जिट पोल के मुताबिक, LDF को 72 से 80 सीटें मिल सकती है। जबकि UDF को 58-64 सीटें मिलने की संभावना है। वही, NDA को सिर्फ 1-5 सीटें जाती हुई दिख रही है।
पुडुचेरी: कुल सीटें- 30 बहुमत के लिए- 16
- रिपब्लिक-CNX एग्जिट पोल के मुताबिक, भाजपा को 16-20 और कांग्रेस को 11-13 सीटें मिलने का अनुमान जताया है।
- एबीपी-सी वोटर के मुताबिक, भाजपा को 19-23, कांग्रेस को 6-10 सीटें मिलने का अनुमान है।
बंगाल: 294 विधानसभा सीटों वाले प बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है। वहीं, यहां भाजपा टीएमसी की सत्ता में दखल करने की कोशिश में जुटी है। तो टीएमसी सत्ता में बरकरार रहने के लिए हर कोशिश में जुटी है।
प बंगाल : 2016 के नतीजे
प बंगाल में 294 सीटें हैं। यहां 2016 में 6 चरणों में चुनाव हुए थे। ममता की पार्टी ने 293 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से 211 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। जबकि भाजपा 291 सीटों पर चुनाव मैदान में थी लेकिन उसे सिर्फ 3 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था और तीनों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने लेफ्ट पार्टियों के साथ चुनाव लड़ा था। उसने 92 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और 44 सीटें जीतने में सफल रही थी। वहीं, सीपीएम 148 सीटों में से 26 पर जीत हासिल कर पाई थी। वहीं, सीपीआई को 11 सीटों में से एक पर जीत मिली थी।
असम : विधानसभा चुनाव 2016 के नतीजे विधानसभा चुनाव में भाजपा को अकेले 60 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, एनडीए की बात करें तो एजीपी को 14 और बीओपीएफ को 12 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर चुनाव में एनडीए के खाते में 86 सीटें गई थीं।
केरल : कितनी विधानसभा और लोकसभा सीटें हैं?
केरल में 14 जिले हैं। यहां का सबसे बड़ा शहर केरल की राजनाधी तिरुवनन्तपुरम ही है। यहां की राजभाषा मलयालम है। केरल में 140 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र और 20 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।
140 सीटों वाले केरल में 2016 चुनाव में सीपीआई (एम) ने 58, कांग्रेस ने 22, सीपीआई ने 19, आईएमएल ने 18, निर्दलीय 06 और अन्य के खाते में 17 सीटें गई थीं।
तमिलनाडु-पुडुचेरी : तमिलनाडु में अभी भाजपा की सहयोगी AIADMK की सरकार है। वहीं, केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में गुरुवार को ही राष्ट्रपति शासन लगाया है। पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले अल्पमत में आ गई थी। यहां के मुख्यमंत्री नारायणसामी फ्लोर टेस्ट पास नहीं कर पाए थे, इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
क्या है एग्जिट पोल्स का इतिहास ?
भारत में पहली बार सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी द्वारा एग्जिट पोल का खाका 1960 में तैयार हुआ था। हालांकि मीडिया द्वारा पहली बार 1980 के दौर में पोल सर्वे हुआ। उस वक्त पत्रकार प्रणय रॉय ने मतदाताओं से उनके मन की बात जानने की कोशिश की थी। वहीं, 1996 में दूरदर्शन ने CSDS के साथ मिलकर पहली बार एग्जिट पोल दिया। 1998 के चुनाव में लगभग सभी चैनलों ने एग्जिट पोल किए थे।
वोटिंग के बाद ही दिखा सकते हैं एग्जिट पोल?
आरपी एक्ट, 1951 के सेक्शन 126 के मुताबिक, मतदान से पहले एग्जिट पोल सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। हालांकि, आखिरी दिन की वोटिंग के बाद एग्जिट पोल दिखाए जा सकते हैं।
जानिए कब सही हुए और कब गलत साबित हुए एग्जिट पोल
- 1999 से लेकर 2019 तक 37 बड़े एग्जिट पोल आए, लेकिन आंकड़ों को देखें तो 90% अनुमान गलत साबित हुए।
- 2004 में एग्जिट पोल ने एनडीए को बहुमत मिलता दिखाया था। लेकिन NDA को 200 सीट भी नहीं मिली थीं। इसके बाद कांग्रेस ने सपा और बसपा के साथ सरकार बनाई।
- 2009 में ज्यादातर पोल यूपीए को 199 और एनडीए को 197 मिलती दिखा रहे थे। लेकिन यूपीए ने 262 सीटों पर जीत हासिल की।
2014 और 2019 में सही साबित हुए आंकड़े :
2014 में एग्जिट पोल्स में एनडीए को बहुमत मिलता दिखाया गया था। नतीजे भी एग्जिट पोल के करीब रहे। भाजपा को 282 और एनडीए को 336 सीटें मिलीं।
2019 में पोल्स NDA को बहुमत मिलने के संकेत दे रहे थे। हालांकि, किसी ने अकेले भाजपा को बहुमत मिलने की आशंका भी नहीं जताई थी। लेकिन भाजपा ने अकेले 303 सीटें जीतीं। एनडीए को 351 सीटें मिलीं।
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