Basant Panchami 2026: सरस्वती वंदना समेत इन 6 गानों में दिखी प्रकृति की सुंदरता, जरुर सुनें

Published : Jan 23, 2026, 07:00 AM IST
Basant Panchami 2026

सार

Basant Panchami 2026: बसंत ऋतु को शास्त्रीय, लोक और फिल्मी संगीत में अलग-अलग भावों के साथ पेश किया गया है। कहीं ज्ञान की वंदना के रूप में तो कहीं प्रेम और प्रकृति का उत्सव के रूप में, तो कहीं युवा चेतना और बदलाव का रंग देखने को मिलता है।  

Basant Panchami 2026: बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। यहां से सर्दी गुलाबी ठंड में बदल जाती है। गेहूं की फसल अब खेतों में लहलहाती है। चना-सरसों के फूल अपनी जवानी पर होते हैं। इस सुरम्य वातावरण के बीच ही अवतरित होतीं है मां सरस्वती, जो विद्यादायिनी हैं, जो संगीत साधिका हैं। ऐसे में प्रकृति को निहारते गीत बड़े ही मनमोहक लगता है।

1. माता सरस्वती शारदेय (आलाप) – पारंपरिक शास्त्रीय वंदना

आलाप मूवी का गाना मां सरस्वती को समर्पित शास्त्रीय स्तुति है, जो बसंत ऋतु और विद्यादायिनी की देवी का आराधना करता है। दरअसल भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपरा में बसंत को ऋतुओं का स्वर्णकाल माना गया है। इस समय इसका गायन ज्ञान, कला और सृजन के आरंभ का प्रतीक है।

 

2. आई झूम के बसंत – उपकार (1967)

मनोज कुमार की सबसे चर्चित फिल्म में प्रकृति, धर्म और देशप्रेम को खूबसूरती से पिरोया गया है। आई झूम के बसंत गीत की रचना गुलशन बावरा की, वहीं इसका संगीत कल्याणजी–आनंदजी ने तैयार किया। यह गीत बसंत के आगमन की खुशी और सामूहिक उल्लास को प्रदर्शित करता है। वहीं प्रकृति, मौसम और सामाजिक उत्सव को भी सरल और सहज लोकधर्मी अंदाज़ में प्रस्तुत करता है।
 


3. संग बसंत अंग बसंती – राजा और रंक (1968)

यह गीत बसंत को प्रेम, श्रृंगार और रसों में डुबाता हुए दिखाता है। यह रचना ऋतु में बदलाव के साथ मानवीय भावनाओं का रूपक बनाती है। आनंद बख्शी का लिखा गीत की तर्ज लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने बनाई थी।
 

4. पतझड़ सावन बसंत बहार – सिंदूर (1947)

संगीत: खेमचंद प्रकाश | गायिका: शमशाद बेगम

यह गाना जीवन के साथ ऋतुओं के चक्र को दर्शाता है। पतझड़, सावन और बसंत के जरिए से यह रचना उतार-चढ़ाव, उम्मीद और फिर कार्य में तल्लीन होने की भावना को खूबसूरती से व्यक्त करती है।
 


5. रुत आ गई रे, रुत छा गई रे – 1947: Earth

गीतकार: जावेद अख्तर | संगीत: आर.डी. बर्मन

यह गीत बसंत में प्रेम, ताज़गी और आज़ादी के प्रतीक रूप में दिखाता है। हरियाली और बदलती रुत के साथ भावनाओं का खिलना इसकी पहचान है।



6. रंग दे बसंती – रंग दे बसंती (2006)

गीतकार: प्रसून जोशी | संगीत: ए.आर. रहमान

यह गाना मॉडर्न और क्लासिक अंदाज में बसंत को क्रांति, युवा चेतना और बदलाव के रंग में रंगता है। यहां बसंत सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि लोगों के जागरण और ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है।

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