
सिर्फ चार करोड़ रुपये में बनी बॉलीवुड फिल्म 'लापाता लेडीज' ने कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। सैकड़ों करोड़ के बजट में बनी, एक्शन और रोमांच से भरपूर 'एनिमल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का रिकॉर्ड भी 'लापाता लेडीज' ने तोड़ दिया था। अब यह फिल्म ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो गई है। इस फिल्म को आधिकारिक तौर पर ऑस्कर पुरस्कार के लिए भेजा गया है। फिल्म की कहानी दो लापता दुल्हनों के इर्द-गिर्द घूमती है। दुल्हनों के लापता होने की कहानी में महिला स्वतंत्रता समेत कई संवेदनशील मुद्दों को दिखाया गया है। आमिर खान द्वारा निर्मित इस फिल्म का निर्देशन उनकी पूर्व पत्नी और निर्देशक किरण राव ने किया है। फिल्म में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा, स्पर्श श्रीवास्तव, छाया कदम जैसे नए कलाकारों ने अभिनय किया है। फिल्म में मुख्य भूमिका रवि किशन ने निभाई है। यह फिल्म अब 'एनिमल' फिल्म के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुकी है। नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म ने यह रिकॉर्ड तोड़ा है। चार करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 21 करोड़ रुपये कमाए थे। अंततः नेटफ्लिक्स पर भी इसने रिकॉर्ड बनाया और अब ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो गई है।
ऑस्कर की दौड़ में इस फिल्म समेत 29 फिल्में शामिल थीं। इनमें से माना जा रहा था कि आखिरी समय तक विक्रम स्टारर 'महाराजा' का चयन होगा। इसके अलावा तमिल फिल्म 'महाराजा', तेलुगु फिल्म 'कलकी 2898 AD' और 'हनुमान', बॉलीवुड की 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' और 'आर्टिकल 370' भी रेस में शामिल थीं। लेकिन उम्मीदों के विपरीत 'लापाता लेडीज' का चयन हुआ है। इस तरह नए कलाकार स्पर्श श्रीवास्तव, प्रतिभा रांटा, नितांशी गोयल के लिए यह किसी लॉटरी से कम नहीं है। अपनी पहली ही फिल्म से उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली है। बिना किसी स्टार के, साधारण कहानी वाली इस फिल्म को सुप्रीम कोर्ट के 75वें वर्षगांठ के मौके पर मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के निर्देश पर प्रदर्शित किया गया था। इस तरह यह फिल्म एक और ऐतिहासिक घटना का हिस्सा बनी। बताया जाता है कि CJI की पत्नी कल्पना दास ने इस फिल्म को प्रदर्शित करने का अनुरोध किया था। जिसके बाद 9 अगस्त को फिल्म का प्रदर्शन किया गया था।
इसमें शामिल होने के लिए किरण राव और आमिर खान को आमंत्रित किया गया था। दरअसल, इस फिल्म को प्रदर्शित करने के पीछे मकसद था कि 'लापाता लेडीज' एक सामाजिक संदेश देने वाली फिल्म है। इसमें निर्देशक किरण राव ने लैंगिक समानता का संदेश व्यंग्यात्मक तरीके से दिया है। भारत के कई हिस्सों में आज भी लैंगिक असमानता व्याप्त है। दर्शकों को इससे अवगत कराने के लिए इस फिल्म का निर्माण किया गया था। यही वजह है कि देशभर में इस फिल्म को लेकर चर्चा हुई थी। कई गणमान्य लोगों ने इसकी सराहना की थी।
बता दें कि फिल्म की कहानी इस प्रकार है: दीपक और फूल कुमारी नवविवाहित हैं। शादी के बाद दूल्हे वाले अपने घर लौट जाते हैं। नवविवाहित जोड़ा कुछ रस्मों के लिए दुल्हन के घर रुकता है। बाद में दोनों दूल्हे के घर के लिए रवाना होते हैं। फूल कुमारी एक मासूम और खूबसूरत युवती है। दीपक भी उतना ही सरल और भावुक युवक है। जाते समय बिदाई की रस्म के बाद दुल्हन को किसी भी कीमत पर अपना घूंघट नहीं हटाना चाहिए और न ही अपने पति का नाम लेना चाहिए, ऐसा बुजुर्गों द्वारा कहा जाता है। यह परंपरा किस तरह के खतरे को जन्म देती है, यह फिल्म देखने के बाद ही दर्शक को पता चलता है।
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