
Manoj Kumar Last Rites: भारत कुमार के नाम से मशहूर मनोज कुमार का अंतिम संस्कार शनिवार को सुबह तकरीबन 11 30 बजे जुहू स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। पद्मश्री से सम्मानित दिग्गज एक्टर को राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई दी जाएगी। मुंबई में उनके घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 'उपकार' जैसी देशभक्ति फिल्मों से दर्शकों के दिलों में अहम् छाप बनाने वाले मनोज कुमार की अंतिम यात्रा के लिए एक एम्बुलेंस को तीन रंग के फूलों से सजाया गया है। इस एम्बुलेंस में मनोज कुमार की पार्थिव देह रखकर श्मशान घाट तक ले जाई जाएगी।
मनोज कुमार का निधन 4 अप्रैल को तड़के तकरीबन 3:30 बजे मुंबई के कोकिलाबेन अंबानी हॉस्पिटल में हुआ। कुमार के बेटे कुणाल गोस्वामी ने आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की थी। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि मनोज कुमार लंबे समय से बीमार चल रहे थे। कुणाल ने यह भी कहा था कि दो महीने बाद ही मनोज कुमार 88 साल के होने वाले थे। लेकिन उसके पहले ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
मनोज कुमार ने बॉलीवुड में लगभग 5 दशक तक काम किया। वे सिनेमा के दीवाने फिल्मों में एंट्री से पहले से थे। मनोज कुमार दिलीप कुमार के बहुत बड़े फैन थे। 1949 में दिलीप कुमार और कामिनी कौशल की फिल्म 'शबनम' देखने के बाद ही वे मनोज कुमार बने थे। क्योंकि इस फिल्म में दिलीप कुमार के किरदार का नाम मनोज था। इससे पहले तक मनोज को हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी नाम से जाना जाता था, जो नाम उन्हें उनके पैरेंट्स ने जन्म के समय दिया था। मनोज कुमार ने 'हरियाली और रास्ता', 'शहीद', 'पूरब और पश्चिम', 'उपकार' और 'क्रांति' जैसी फिल्मों से पहचान बनाई और लगातार देशभक्ति वाली फ़िल्में बनाने के चलते इस फिल्ममेकर को भारत कुमार के नाम से जाना जाने लगा था।
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