कब और कहां होगा क्लासिकल सिंगर पंडित छन्नूलाल मिश्र का अंतिम संस्कार?

Published : Oct 02, 2025, 12:22 PM IST
pandit chhannulal mishra

सार

पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन 2 अक्टूबर की सुबह 4:15 बजे मिर्जापुर में हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे पंडित जी का आज अंतिम संस्कार होगा। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 

पॉपुलर क्लासिकल सिंगर और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित उनके घर पर निधन हो गया। पंडित मिश्रा 89 साल के थे। उन्हें लगभग एक हफ्ते पहले हार्ट अटैक आया था। ऐसे में उनके परिवार के लोगों ने उन्हें मिर्जापुर के ओझला स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल में भर्ती कराया था।

कब होगा पंडित मिश्रा का अंतिम संस्कार?

पंडित मिश्रा की बेटी नम्रता मिश्रा ने बताया कि हार्ट अटैक पड़ने के बाद डॉक्टर्स ने उनकी जांच की और दो यूनिट ब्लड भी चढ़ाया। हालांकि, इसके बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। नम्रता ने आगे बताया, 'आज सुबह 4:15 बजे उन्होंने मिर्जापुर के गंगा दर्शन कॉलोनी स्थित हमारे घर पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार आज शाम मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।'

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पीएम मोदी ने पंडित मिश्रा को कैसे दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित मिश्रा के निधन के बाद शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘पॉपुलर क्लासिकल सिंगर पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय कला और संस्कृति को समृद्ध बनाने में समर्पित कर दिया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने और भारतीय परंपराओं को विश्व मंच पर स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद सदैव प्राप्त होता रहा। 2014 में, वे वाराणसी संसदीय सीट के लिए मेरे प्रस्तावक थे। इस दुःख की घड़ी में, मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।’

 

कौन थे पंडित छन्नूलाल

आपको बता दें पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त, 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिरपुर गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक संगीत शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की और बाद में वाराणसी में संगीत की पूरी पढ़ाई की। वहां उन्होंने किराना घराने के पॉपुलर उस्ताद अब्दुल गनी खान से संगीत की पूरी शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2010 में पद्म भूषण और 2020 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप भी मिली थी।

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