कानूनी नोटिस में फिल्म का मौजूदा टाइटल तुरंत वापस लेने की मांग की गई है। इसे असंवैधानिक, मानहानिकारक और सामाजिक रूप से भड़काऊ बताया गया है। नोटिस का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय को अपमानित या बदनाम नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब संभावित सामाजिक नुकसान पहले से स्पष्ट हो।
विवाद यहीं नहीं रुका। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खुद को ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा बताने वाले लोगों ने फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर उतरे और फिल्म पर समुदाय को नकारात्मक रूप में दिखाने का आरोप लगाया।
इसी बीच, दिल्ली हाईकोर्ट में भी फिल्म की रिलीज को लेकर एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता महेंद्र चतुर्वेदी, जो खुद को आचार्य बताते हैं, का दावा है कि फिल्म का टाइटल और प्रमोशनल कंटेंट सामुदायिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। याचिका में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है।
अब तक न तो Netflix और न ही फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि फिल्म का टाइटल बदला जाएगा या प्रोजेक्ट तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा।
फिलहाल, ‘Ghooskhor Pandat’ कंटेंट से ज्यादा अपने नाम को लेकर चर्चा में है। आने वाले दिनों में अदालत और मेकर्स का रुख यह तय करेगा कि यह थ्रिलर पर्दे तक उसी नाम से पहुंचेगी या किसी नए रूप में।