Ghooskhor Pandit से पहले जाति को लेकर इन 10 फिल्मों पर ख़ूब मचा बवाल, एक ने 1350 CR+ कमाए

Published : Feb 06, 2026, 04:11 PM IST

Ghooskhor Pandit Controversy Row: मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडित' विवादों में है। पंडितों ने फिल्म के टाइटल को अपमानजनक बताया है। पहले भी कई फ़िल्में जाति या जातिसूचक शब्दों की वजह से विवादों में घिर चुकी हैं। ऐसी ही 10 फिल्मों पर डालिए एक नज़र.…

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1. बिल्लू

2009 में रिलीज हुई इस फिल्म का टाइटल पहले 'बिल्लू बार्बर' था। लेकिन बार्बर कम्युनिटी ने इसे अपमानजनक बताया। विरोध के बाद इरफ़ान खान और शाहरुख खान स्टारर इस फिल्म के टाइटल से 'बार्बर' शब्द हटा दिया गया था।

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2. कमीने

2009 में शाहिद कपूर स्टारर फिल्म 'कमीने' रिलीज हुई थी। इस फिल्म के गाने 'धन ते नान' के लीरिक्स में एक जगह 'तेली का तेल' का इस्तेमाल हुआ था। तेली समाज ने इस पर आपत्ति जताई तो मेकर्स ने इन शब्दों को गाने से हटा दिया था।

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3. आजा नच ले

2007 में फिल्म 'आजा नच ले' से माधुरी दीक्षित ने तकरीबन 5 साल बाद बॉलीवुड में वापसी की थी। लेकिन फिल्म का टाइटल सॉन्ग मोची शब्द की वजह से विवादों में घिर गया था। गाने में 'मोहल्ले में कैसी मारा मार है, बोले मोची भी खुद को सुनार है' लाइन थी। लेकिन जब मोची समुदाय ने विरोध जताया तो 'बोले मोची भी खुद को सुनार है' को 'मेरे दर पर दीवानों की बहार है' से बदल दिया गया था।

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4. मैडम चीफ मिनिस्टर

ऋचा चड्ढा स्टारर यह फिल्म 2021 में रिलीज हुई थी। फिल्म के पहले पोस्टर में ऋचा को हाथ में झाड़ू लिए दिखाया गया था और इसके साथ 'अनटचेबल, अनस्टॉपेबल' टैगलाइन लिखी थी। लोगों ने इस पोस्टर पर आरोप लगाया था कि यह दलित समुदाय की रूढ़िवादी धारणा को दिखाता है। उन्होंने टैगलाइन में इस्तेमाल हुए अनटचेबल (अछूत) शब्द पर आपत्ति भी जताई थी। बाद में ऋचा और मेकर्स ने पोस्टर के लिए माफ़ी मांगी और इसे डिलीट कर नया पोस्टर शेयर किया था।

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5. धुरंधर

रणवीर सिंह स्टारर 'धुरंधर' 2025 में रिलीज हुई और दुनियाभर में इसने 1350 करोड़ रुपए की कमाई की। फिल्म में संजय दत्त के एक डायलॉग में बलोच शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति आई थी। गुजरात हाई कोर्ट में बलोच समुदाय के दो लोगों ने फिल्म के डायलॉग 'मगरमच्छ पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन बलोच पर नहीं' पर आपत्ति जताई थी। बाद में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म के डायलॉग में बलोच शब्द म्यूट करने के निर्देश दिए थे। रिलीज के 6 दिन बाद मेकर्स ने इस एक शब्द को म्यूट कर अपडेटेड वर्जन थिएटर्स को उपलब्ध कराया था।

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इन 5 फिल्मों में जातिवाद को लेकर मचा घमासान
  • आर्टिकल 15 (2019)

फिल्म में दलितों के लिए इस्तेमाल होने वाले अपमानजनक शब्दों को डायलॉग्स में रखा गया था ताकि जमीनी हकीकत दिखाई जा सके। कुछ संगठनों ने कहा कि ऐसे शब्दों को दोहराने से अपमान दोबारा जीवित होता है, भले ही फिल्म का इरादा आलोचनात्मक हो।

  • जय भीम (2021)

एक सीन में कथित रूप से एक जातिसूचक संदर्भ और प्रतीकात्मक इशारा दिखाया गया।एक विशेष समुदाय ने आरोप लगाया कि फिल्म ने उन्हें अपराधी छवि से जोड़ा। बाद में मेकर्स को कुछ बदलाव करने पड़े।

  • आरक्षण (2011)

फिल्म में आरक्षण पर बहस के दौरान कुछ संवादों में जातिगत रूढ़ियों का जिक्र था। कुछ समूहों ने कहा कि ये संवाद सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं।

  • सैराट (2016, मराठी)

फिल्म में इंटरकास्ट रिलेशन के दौरान जातिगत गालियां दिखाई गईं। कुछ दर्शकों ने कहा कि ये शब्द बहुत कठोर हैं, जबकि समर्थकों ने कहा कि यही असली सामाजिक सच्चाई है।

  • असुरन (2019, तमिल)

फिल्म में जातिगत हिंसा के संदर्भ में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग दिखाया गया।कुछ समुदायों ने कहा कि ऐसे शब्दों को सेंसर किया जाना चाहिए था, भले ही फिल्म का संदेश दलित विरोधी हिंसा के खिलाफ था।

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