फिल्म में दलितों के लिए इस्तेमाल होने वाले अपमानजनक शब्दों को डायलॉग्स में रखा गया था ताकि जमीनी हकीकत दिखाई जा सके। कुछ संगठनों ने कहा कि ऐसे शब्दों को दोहराने से अपमान दोबारा जीवित होता है, भले ही फिल्म का इरादा आलोचनात्मक हो।
एक सीन में कथित रूप से एक जातिसूचक संदर्भ और प्रतीकात्मक इशारा दिखाया गया।एक विशेष समुदाय ने आरोप लगाया कि फिल्म ने उन्हें अपराधी छवि से जोड़ा। बाद में मेकर्स को कुछ बदलाव करने पड़े।
फिल्म में आरक्षण पर बहस के दौरान कुछ संवादों में जातिगत रूढ़ियों का जिक्र था। कुछ समूहों ने कहा कि ये संवाद सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं।
फिल्म में इंटरकास्ट रिलेशन के दौरान जातिगत गालियां दिखाई गईं। कुछ दर्शकों ने कहा कि ये शब्द बहुत कठोर हैं, जबकि समर्थकों ने कहा कि यही असली सामाजिक सच्चाई है।
फिल्म में जातिगत हिंसा के संदर्भ में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग दिखाया गया।कुछ समुदायों ने कहा कि ऐसे शब्दों को सेंसर किया जाना चाहिए था, भले ही फिल्म का संदेश दलित विरोधी हिंसा के खिलाफ था।