कौन थे के. भाग्यराज जिनके निधन से शोक में डूबी इंडस्ट्री, अमिताभ बच्चन संग दी थी सुपरहिट फिल्म

Published : Jun 27, 2026, 05:20 PM IST
K Bhagyaraj Death Reason

सार

तमिल सिनेमा के दिग्गज एक्टर-डायरेक्टर के. भाग्यराज का 73 साल की उम्र में निधन हो गया। जानिए कैसे उन्होंने तमिल से लेकर बॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बनाई।

तमिल सिनेमा के दिग्गज एक्टर, डायरेक्टर, लेखक और स्क्रीनप्ले मास्टर के. भाग्यराज का 73 साल की उम्र में निधन हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद चेन्नई के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। भाग्यराज सिर्फ एक एक्टर नहीं थे, बल्कि 1980 और 90 के दशक में पारिवारिक फिल्मों की नई परिभाषा गढ़ने वाले फिल्मकार भी थे। उन्होंने 25 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया और 75 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे बॉलीवुड सितारों के साथ भी काम किया। उनके निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

दिल का दौरा पड़ने से हुआ के. भाग्यराज का निधन

एक्टर और डायरेक्टर के. भाग्यराज का शनिवार (27 जून) को चेन्नई में निधन हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें हार्ट अटैक आया था। उनके निधन की पुष्टि अपोलो अस्पताल ने की है। अंतिम संस्कार से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। भाग्यराज अपने पीछे पत्नी अभिनेत्री पूर्णिमा भाग्यराज, बेटे एक्टर शांतनु भाग्यराज और बेटी सारण्या भाग्यराज को छोड़ गए हैं।

के. भाग्यराज असिस्टेंट डायरेक्टर से बने सुपरहिट फिल्ममेकर

के. भाग्यराज का जन्म तमिलनाडु के इरोड जिले में हुआ था। फिल्मी सफर की शुरुआत उन्होंने मशहूर डायरेक्टर भारतीराजा के सहायक के रूप में की। उन्होंने '16 वयाथिनिले' और 'किझक्के पोगुम रेल' जैसी फिल्मों में सहायक डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने 'किझक्के पोगुम रेल' (1978) और 'टिक टिक टिक' (1981) जैसी फिल्मों की कहानी और पटकथा भी लिखी। साल 1979 में 'सुवारिल्लाधा चित्रंगल' से उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा, जबकि बतौर हीरो उनकी शुरुआत 'पुथिया वारपुगल' से हुई।

मिडिल क्लास फैमिली फिल्मों के बादशाह थे के. भाग्यराज

के. भाग्यराज को आम लोगों की जिंदगी पर आधारित पारिवारिक फिल्मों के लिए जाना जाता था। उनकी फिल्मों के किरदार, संवाद और कहानियां सीधे मध्यमवर्गीय परिवारों से जुड़ती थीं। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक रिश्तों को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली अंदाज में पर्दे पर पेश किया। उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में 'अंधा 7 नाटकल' (1981), 'मुंधानई मुडिचू' (1983), 'थूरल निन्नु पोचु' (1982) और 'इंद्रु पोई नालाई वा' (1981) शामिल हैं।

अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म का किया निर्देशन

के. भाग्यराज ने सिर्फ तमिल सिनेमा तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी खास पहचान बनाई। साल 1986 में उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म 'आख़िरी रास्ता' का निर्देशन किया। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन डबल रोल में नजर आए थे, जबकि जया प्रदा, श्रीदेवी और अनुपम खेर भी अहम भूमिकाओं में थे। खास बात यह रही कि भाग्यराज ने इस फिल्म में खुद भी एक सहायक किरदार निभाया था।

अनिल कपूर और श्रीदेवी के साथ भी किया काम

निर्देशन के अलावा भाग्यराज ने हिंदी फिल्मों में अभिनय भी किया। वह 'मिस्टर बेचारा' (1996) में अनिल कपूर और श्रीदेवी के साथ नजर आए। इसके बाद 'पापा द ग्रेट' (2000) में कृष्ण कुमार, नगमा और सत्य प्रकाश के साथ भी अहम भूमिका निभाई।

निधन से कुछ दिन पहले तक थे एक्टिव

दिलचस्प बात यह है कि के. भाग्यराज अपने अंतिम दिनों तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय थे। कुछ ही दिन पहले वह अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर की बेटी की शादी में शामिल हुए थे। ऐसे में उनके अचानक निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री और फैंस दोनों को गहरा झटका दिया है।

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