
अभिषेक नामा के निर्देशन में बनी 'नागबंधम: द सीक्रेट ट्रेज़र' एक भव्य माइथोलॉजिकल एडवेंचर फिल्म है, जिसमें इतिहास, रहस्य, नाग परंपरा और सनातन संस्कृति को बड़े सिनेमाई कैनवास पर पेश किया गया है। फिल्म प्राचीन विष्णु मंदिरों, रहस्यमयी अनुष्ठानों और छिपे खजाने की खोज को दो अलग-अलग कालखंडों से जोड़ती है। विराट कर्णा, नभा नतेश, जगपति बाबू और ऋषभ साहनी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म एक्शन, इमोशन और रहस्य का संतुलित मिश्रण पेश करती है। हालांकि इसकी लंबाई कुछ जगह महसूस होती है, लेकिन इसकी कहानी और विजुअल स्केल दर्शकों को अंत तक बांधे रखने की कोशिश करते हैं।
फिल्म की शुरुआत साल 1953 में होती है, जब भारतीय पुरातत्व विभाग की एक रिसर्च टीम एक रहस्यमयी गुफा में छिपे रहस्य की तलाश करती है। इसी दौरान एक रहस्यमयी वृक्ष टीम के सदस्य को गिरफ्त में ले लेता है, जबकि दूसरा सदस्य नागबंधम से जुड़ी एक प्राचीन पुस्तक लेकर बच निकलता है। धीरे-धीरे खुलासा होता है कि यह वृक्ष दरअसल एक शक्तिशाली बैरागी साधु का कारावास है, जो ब्रह्मकमल हासिल कर अपनी मुक्ति चाहता है। दूसरी तरफ शहर में रहने वाले रुद्र नाम के शख्स की जिंदगी तब बदल जाती है जब उसकी बहन की शादी के दौरान खूनी हमला होता है और उसका परिवार उजड़ जाता है। इसके बाद कहानी साल 1747 से जुड़ती है, जहां ब्रह्मकमल और नागबंधम को लेकर शुरू हुआ संघर्ष वर्तमान तक पहुंचता है। रहस्य, मंदिर और खजाने की यह यात्रा कई बड़े ट्विस्ट लेकर आगे बढ़ती है।
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विराट कर्णा रुद्र के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। इमोशनल और एक्शन दोनों तरह के दृश्यों में उन्होंने संतुलित एक्टिंग की है। नभा नतेश पार्वती के रोल में सहज और प्रभावशाली लगती हैं। उनका स्क्रीन प्रेजेंस कहानी को मजबूती देता है। जगपति बाबू गंभीर और रहस्यमयी किरदार में दमदार नजर आते हैं। महेश मांजरेकर सीमित स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ते हैं। मुरली शर्मा हमेशा की तरह भरोसेमंद दिखे हैं, जबकि रामचंद्र राजू बैरागी के रूप में प्रभावी खलनायक साबित हुए हैं। फिल्म का बड़ा सरप्राइज ऋषभ साहनी हैं। अब्दाली के किरदार में उनकी आक्रामक बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस कहानी को और ज्यादा प्रभावशाली बनाती है।
डायरेक्टर अभिषेक नामा ने इतिहास, पौराणिक रहस्य और एडवेंचर को जोड़ने की महत्वाकांक्षी कोशिश की है। दो अलग-अलग समय-कालों को जोड़ने का उनका तरीका दिलचस्प है। दक्षिण भारत के प्राचीन विष्णु मंदिरों, नागा परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को बड़े पैमाने पर दिखाना फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। हालांकि 185 मिनट की लंबाई कुछ जगह कहानी की गति को धीमा करती है, लेकिन रहस्य लगातार दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर रहस्य और रोमांच को मजबूत बनाता है। मंदिरों, युद्ध और रहस्यमयी दृश्यों में संगीत प्रभावी साबित होता है। हालांकि ऐसा कोई गाना नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए, लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के माहौल को बेहतर बनाता है। तकनीकी रूप से 'नागबंधम' काफी मजबूत फिल्म है। शानदार सिनेमैटोग्राफी, भव्य मंदिर सेट, प्रभावशाली वीएफएक्स, बड़े पैमाने के एक्शन सीक्वेंस, शानदार प्रोडक्शन डिजाइन और मजबूत कॉस्ट्यूम और आर्ट डायरेक्शन इसके मजबूत टेक्निकल फ्रंट की गवाह हैं। खासतौर से मंदिरों और ऐतिहासिक लोकेशनों को जिस भव्यता से फिल्माया गया है, वह बड़े पर्दे पर शानदार अनुभव देता है।
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'नागबंधम: द सीक्रेट ट्रेज़र' सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं, बल्कि इतिहास, पौराणिक रहस्य, मंदिरों की परंपरा और रोमांच का भव्य सिनेमाई अनुभव है। फिल्म की कहानी, विजुअल्स और एक्शन इसे अलग पहचान देते हैं। यदि आपको 'कांतारा', 'कार्तिकेय 2' या पौराणिक रहस्य वाली एडवेंचर फिल्में पसंद हैं, तो 'नागबंधम' आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।
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