Prem Keetanu Movie Review:प्यार, कन्फ्यूजन, फिर दोस्त ने बिगाड़ा गेम! कैसी है ‘प्रेम कीटाणु’?

Published : Oct 02, 2026, 10:49 AM IST
Prem Keetanu Movie Review

सार

Prem Keetanu Film Review: ‘प्रेम कीटाणु’ प्यार, दोस्ती, कॉमेडी और परिवार की उलझनों को हल्के अंदाज में पेश करती है। वीर पहाड़िया, आफिया सईद और अपारशक्ति की परफॉर्मेंस फिल्म को मजेदार बनाती है।

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जब काम और रिश्तों की उलझनें लगातार सिर पर सवार रहती हैं, ‘प्रेम कीटाणु’ एक हल्के ब्रेक की तरह सामने आती है। अपूर्व सिंह कार्की की यह फिल्म प्यार की शुरुआत से पैदा होने वाली उलझनों को कॉमेडी, दोस्ती और फैमिली ड्रामा के साथ आगे बढ़ाती है। कहानी में रोमांस है, लेकिन पूरा फोकस सिर्फ लव स्टोरी पर नहीं रखा गया। किरदारों के निजी फैसले, परिवार के साथ उनके रिश्ते और भविष्य को लेकर उनकी कशमकश भी साथ चलती है। यही वजह है कि फिल्म बहुत भारी होने के बजाय रिलेटेबल और एंटरटेनिंग बनी रहती है।

क्या है ‘प्रेम कीटाणु’ की कहानी?

विशाल की जिंदगी में सुहानी की एंट्री होती है और धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं। विशाल इस रिश्ते को लेकर गंभीर होता है, लेकिन सुहानी की अपनी उम्मीदें हैं। कहानी में रंजीत की एंट्री आते ही समीकरण बदल जाता है। इसके बाद फिल्म सिर्फ प्रेम त्रिकोण नहीं रहती, बल्कि परिवार, दोस्ती और जिंदगी में सही फैसले लेने की उलझन को भी छूती है।

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‘प्रेम कीटाणु’ की स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस कैसी है?

वीर पहाड़िया ने विशाल के किरदार की मासूमियत और कन्फ्यूजन को सहज अंदाज में निभाया है। सुहानी बनीं आफिया सैयद अपनी पहली फिल्म में कॉन्फिडेंट दिखती हैं और वीर के साथ उनकी केमिस्ट्री भी अच्छी लगती है। अपारशक्ति खुराना रंजीत बनकर कॉमेडी का मूड संभालते हैं। राकेश बेदी और बाकी कलाकार खासकर पारिवारिक दृश्यों में कहानी को सपोर्ट देते हैं।

अपूर्व सिंह कार्की का डायरेक्शन कैसा है?

अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म को जरूरत से ज्यादा गंभीर बनाने के बजाय उसके हल्के मिजाज को बनाए रखा है। रोमांस, कॉमेडी और इमोशन के बीच संतुलन इसकी बड़ी खासियत है। कहानी धीरे-धीरे सिर्फ प्यार से आगे बढ़कर रिश्तों और व्यक्तिगत फैसलों की तरफ जाती है। यही बदलाव फिल्म को सामान्य लव स्टोरी से थोड़ा अलग करता है।

कैसा है ‘प्रेम कीटाणु’ का म्यूजिक?

‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ फिल्म के रोमांटिक और यंग मूड को मजबूत करते हैं। अच्छी बात यह है कि गाने कहानी से अलग-थलग नहीं लगते। इनके विजुअल्स और कोरियोग्राफी भी फिल्म की फ्रेश और मस्ती भरी टोन के साथ फिट बैठते हैं।

टेक्निकल फ्रंट पर कैसी है फिल्म?

फिल्म का टेक्निकल पक्ष कहानी के मूड के मुताबिक रखा गया है। विजुअल ट्रीटमेंट, बैकग्राउंड माहौल और एडिटिंग कहानी को अनावश्यक रूप से भारी नहीं होने देते। 2 घंटे 18 मिनट की अवधि के बावजूद फिल्म का नैरेटिव लगातार रिश्तों और किरदारों के साथ आगे बढ़ता रहता है। इसकी सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि इसकी सहज प्रस्तुति है।

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क्यों देखें और क्यों न देखें ‘प्रेम कीटाणु’?

अगर आपको रोमांस के साथ कॉमेडी, दोस्ती और परिवार वाला कंटेंट पसंद है, तो ‘प्रेम कीटाणु’ एक आसान और हल्की-फुल्की वॉच हो सकती है। वीर-आफिया की केमिस्ट्री और अपारशक्ति की कॉमिक टाइमिंग फिल्म को सहारा देती है। लेकिन जो दर्शक बहुत तेज रफ्तार कहानी या लगातार बड़े ट्विस्ट की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें यह फिल्म थोड़ी सिंपल लग सकती है। कुल मिलाकर ‘प्रेम कीटाणु’ कोई भारी-भरकम प्रेम कहानी नहीं, बल्कि प्यार और रिश्तों के बीच हल्की मुस्कान वाली फिल्म है। हमारी ओर से फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।

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