
बलैया और गॉड ऑफ़ मासेस जैसे नामों से फेमस नंदमुरी बालकृष्ण की फिल्म 'अखंड 2 : तांडवम' फाइनली रिलीज हो गई है। यह तेलुगु फिल्म पहले 5 दिसंबर को आने वाली थी, लेकिन एक फाइनेशियल विवाद में फंसने की वजह से उस वक्त इसे पोस्टपोन कर दिया गया था। मामला शॉर्टआउट होने के बाद अब यह थिएटर्स में आ गई है। यह फिल्म डायरेक्टर बोयापति श्रीनू की 2021 में आई फिल्म 'अखंड' की सीक्वल है। नंदमुरी बालकृष्ण के अलावा फिल्म में संयुक्ता मेनन, आदि पिनीसेट्टी, हर्षाली मल्होत्रा, सास्वत चटर्जी जैसे कलाकार भी दिखाई दे रहे हैं। पढ़ें फिल्म का रिव्यू.…
यह कहानी है अघोरा (नंदमुरी बालकृष्ण) की, जो दुनियादारी से दूर एकांत में जिंदगी में जी रहा है। लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए तत्पर रहता है। महाकुंभ मेले में एक जानलेवा वायरस जब लोगों को जान लेता है तो भारत सरकार हैरान हो जाती है। इससे भी बड़ा झटका तब लगता है, जब इस वायरस का एंटी-डोट बनाने वाले लैब पर हमला हो जाता है, जिसमें इसकी हेड अर्चना (संयुक्ता मेनन) मारी जाती है। लेकिन यंग साइंटिस्ट जननी (हर्षाली मल्होत्रा) वैक्सीन के साथ वहां से भागने में कामयाब होती है। लेकिन उसकी जान पर भी ख़तरा मंडरा रहा है। हमलों के बीच अघोरा अपनी बेटी जननी की जान बचाने आता है। क्योंकि उसने उससे वादा किया था कि जब भी उसे उसकी जरूरत होगी, वह आएगा। कहानी में आगे कई ट्विस्ट और टर्न आते हैं। कई नए किरदारों की एंट्री होती है, जिनमें नेत्रा (आदि पिनीसेट्टी), उसका बाप एमएलए बालमुरली कृष्ण (नंदमुरी बालकृष्ण) आदि शामिल हैं। कहानी पाकिस्तान और चीन से भी जुड़ती है। ये सभी ट्विस्ट और टर्न जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
'अखंड 2' की कहानी बोयापति श्रीनू ने लिखी है, जो घिसी-पिटी सी लगती है। इसे उन्होंने वहीं से शुरू किया है, जहां पहला पार्ट ख़त्म हुआ था।फिल्म की सधी हुई शुरुआत डायरेक्टर के तौर पर उनकी काबिलियत बताती है। अघोरा की एंट्री के साथ फिल्म में दर्शकों की दिलचस्पी बढती है। लेकिन जैसे ही नए-नए किरदारों की एंट्री होती है तो बार-बार वॉयलेंट सीन दिखाई देते हैं, जो कहानी की रफ़्तार को धीमा करते हैं। हालांकि, इंटरवल से यह फिल्म एक बार फिर रफ़्तार पकड़ती है और फिर पूरे टाइम दर्शकों को बांधे रखती है। कुल मिलाकर अघोरा की कहानी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने में श्रीनू काफी हद तक सफल हुए हैं।
नंदमुरी बालकृष्ण ने डबल रोल किया है और दोनों ही किरदारों में वे जबरदस्त दिखे हैं। फिर चाहे अघोरा हो या फिर एमएलए बालमुरली कृष्ण। हालांकि, एमएलए वाला पार्ट छोटा है। लेकिन असर छोड़ता है। एक्टिंग के साथ-साथ उनकी बुलंद आवाज़ वाली डायलॉग डिलीवरी आपको आकर्षित करती है। संयुक्ता मेनन ने शानदार काम किया है। छोटी भूमिका होने के बावजूद वे दर्शकों का ध्यान खींचती हैं। हर्षाली मल्होत्रा अघोरा की बेटी जननी के रोल में छा गई हैं। उनके इमोशनल सीन काफी हद तक प्रभावित करते हैं। आदि मिनीसेट्टी विलेन के रोल में खतरनाक लगे हैं। तरुण खन्ना ने भगवान शिव की भूमिका में जान डाली है। उनके अलावा सास्वत चटर्जी, कबीर दुहान सिंह, शरत लोहितास्व, अनीश कुरुविला समेत सभी एक्टर्स ने अपने-अपने हिस्से का काम बख़ूबी किया है।
अगर आप नंदमुरी बालकृष्ण के फैन हैं और मास एंटरटेनर फ़िल्में पसंद करते हैं तो आप यह फिल्म देख सकते हैं। कहानी में नयापन ना होना इसकी सबसे कमज़ोर कड़ी है। फिर भी इसका एक्शन, डायलॉग्स और सनातन धर्म से इसका कनेक्शन आपको पसंद आ सकता है। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार।
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