
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी बदलते दौर को ध्यान में रखते हुए यश राज फिल्म्स (वाईआरएफ) और गूगल 4 अगस्त को वाईआरएफ स्टूडियो में एक विशेष एआई फिल्ममेकिंग वर्कशॉप आयोजित करने जा रहे हैं। यह कार्यक्रम फिल्म निर्माण और क्रिएटिव क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है।
वर्कशॉप के दौरान सिनेमा और स्टोरीटेलिंग में एआई की बदलती भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही प्रतिभागियों को गूगल के एआई क्रिएटिव स्टूडियो ‘फ्लो’ (Flow) का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस सत्र में फिल्मकारों और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स को यह समझाया जाएगा कि वे एआई टूल्स को अपनी मौजूदा प्रोडक्शन प्रक्रिया का हिस्सा कैसे बना सकते हैं। खास बात यह होगी कि एआई को एक सहयोगी टूल के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि कहानी, रचनात्मकता और निर्णय लेने का नियंत्रण पूरी तरह फिल्मकारों के पास ही बना रहे।
यह आयोजन उन शुरुआती मौकों में शामिल है, जब गूगल की फ्लो टीम किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय स्टूडियो के प्रोडक्शन और क्रिएटिव नेतृत्व के साथ सीधे जुड़ रही है। YRF में होने वाला यह सत्र फिल्म उद्योग के क्रिएटिव और प्रोडक्शन पेशेवरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य फोकस रचनात्मकता को मजबूत करना और क्रिएटिव कंट्रोल को बनाए रखना होगा।
यश राज फिल्म्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अक्षय विधानी ने कहा कि हर पीढ़ी को नए तकनीकी उपकरण मिलते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि तकनीक कहानी की मदद करेगी या कहानी पर हावी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वाईआरएफ ने इस चर्चा को शुरुआत में ही उन लोगों के साथ करने का फैसला किया है जो इस तकनीक का निर्माण कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह सत्र फिल्मकारों और क्रिएटिव टीमों को एआई का जिम्मेदारी और समझदारी के साथ उपयोग करने की दिशा देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि रचनात्मकता इंसानी हाथों में ही रहनी चाहिए और कैमरा, कलाकार तथा कहानी हमेशा प्रक्रिया के केंद्र में होने चाहिए।
गूगल में यूज़र एक्सपीरियंस रिसर्च, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी की डायरेक्टर डॉ. आरती सेतुमाधवन ने कहा कि भारत में गूगल फ्लो को लेकर पहले से ही काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्कशॉप के जरिए गूगल अपने एआई क्रिएटिव स्टूडियो को देश के अधिक से अधिक क्रिएटर्स तक पहुंचाना चाहता है। साथ ही कंपनी यह देखने को भी उत्सुक है कि भारत के प्रतिष्ठित कहानीकार इस तकनीक का उपयोग कर कलात्मक अभिव्यक्ति की नई संभावनाएं किस तरह तलाशते हैं।
सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर यह वर्कशॉप भविष्य में गूगल और भारत के प्रमुख कहानीकारों के बीच लगातार संवाद का आधार भी बन सकती है। कार्यक्रम में गूगल की एआई इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीमों के साथ विशेष नेटवर्किंग अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अलावा उन फिल्मकारों के लिए वैकल्पिक डीप-डाइव मॉड्यूल्स भी रखे जाएंगे, जो फ्लो को अपनी मौजूदा कार्यप्रणाली में शामिल करना चाहते हैं। इस पहल का व्यापक उद्देश्य यह समझना है कि विश्वस्तरीय रचनाकार एआई टूल्स का उपयोग करके कहानी कहने के नए आयाम कैसे विकसित कर सकते हैं और भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर नई पहचान और नई ऊंचाइयों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।
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