Published : Aug 27, 2020, 04:03 PM ISTUpdated : Sep 04, 2020, 08:42 PM IST
पटना (Bihar) । बिहार में राजनीतिक हलचल हो और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के सालों का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। साधु यादव बिहार की सियासी गलियारे के ऐसे पुराने खिलाड़ी हैं जिनकी वजह से लालू और राबाड़ी देवी की खूब आलोचना हो चुकी है। हालांकि समय के साथ उनके रिश्ते अपनी बहन और जीजा के साथ खराब हो गए लेकिन राजनीति में उनकी चर्चा बनी रही। दरअसल, लालू-राबड़ी के 15 साल के शासन के दौरान साधु यादव का खूब बोलबाला था। उनका कोई विरोध नहीं करता था। उनकी मनमानियों पर खूब विवाद हुए। प्रकाश झा ने एक फिल्म बनाई और उसमें मुख्य विलेन का नाम साधु यादव था। बिहार के जंगलराज को बयान करने वाली इस फिल्म पर भी खूब विवाद हुआ। साधु समर्थकों ने जमकर बवाल काटा। बहुत से किस्से हैं उनके। लेकिन जब तक आरजेडी की सत्ता रही कोई साधु यादव का कुछ न बिगाड़ सका। बाद में बहन और जीजा ने मनमाफिक टिकट नहीं दी तो नाराज साधु को निष्कासित कर दिया गया। तब से साधु बिहार में कई पार्टियां बदल चुके हैं। 2019 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा और हार गए। आइए जानते हैं वो आजकल कहां हैं और लालू परिवार से उनके रिश्ते कैसे हैं?
बिहार के गोपालगंज से लोकसभा सांसद रह चुके साधु यादव का असली नाम अनिरूद्ध प्रसाद है। वह लालू प्रसाद यादव के साले हैं। यानि पूर्व सीएम साधु यादव राबड़ी देवी के भाई हैं। उन्हें लालू यादव ने राजनीति में स्थापित किया था। लेकिन, वह पार्टी छोड़ने के बाद राबड़ी खिलाफ ही चुनाव लड़ चुके हैं।
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साधु यादव उस समय फिर से सुर्खियों में आए गए थे जब वह ऐश्वर्या राय के साथ तलाक के मुद्दे पर तेजप्रताप यादव के साथ हो गए थे। कहा तो यहां तक जाता है साधु यादव की तेजप्रताप यादव से रिश्ते आज भी ठीक है, क्योंकि कई बार वो तेजप्रताप यादव के साथ दिखे और उनका साथ भी दिया, जिससे लालू परिवार में विवाद बढ़ा था।
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फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में, साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव, जिन्हें राजद से टिकट नहीं मिला था तो गोपालगंज से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ीं थीं।
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लालू के दूसरे साले और राज्यसभा सांसद सुभाष यादव ने भी नवंबर 2005 के विधानसभा चुनावों में गोपालगंज जिले के मीरगंज विधानसभा क्षेत्र से अपनी पत्नी रेणु देवी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा था और वह भी चुनाव हार गईं थीं।
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साधु यादव की बात करें तो उन्होंने कई मौकों पर लालू प्रसाद यादव के लिए असहज करने वाली स्थिति पैदा कर दी थी। करोड़ों के बाढ़ राहत घोटाले में भी उनका नाम शामिल है और इस मामले में उन्हें आत्मसमर्पण करके जमानत लेनी पड़ी थी।
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शिल्पी जैन हत्या मामले में सीबीआई ने उनपर डीएनए टेस्ट का दबाव डाला था। हालांकि, उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। फिर उन्होंने बिहार भवन में जेएनयू के छात्रों पर हमले के लिए उकसाया और राजद नेतृत्व को परेशान करने के लिए जो कुछ हो सका किया था।
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हर चुनाव में सक्रिय रहने वाले साधु यादव आरजेडी छोड़ने के बाद निर्दलीय, कांग्रेस और बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं। आगामी विधानसभा में वो क्या करने वाले हैं अभी ये साफ नहीं हुआ है, मगर वो चुनाव लड़ने की कोशिश जरूर करेंगे। वो क्या कराते हैं यह देखना दिलचस्प होगा।
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