Published : Sep 09, 2020, 12:11 PM ISTUpdated : Sep 09, 2020, 12:25 PM IST
पटना (Bihar)। लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान अब अपने पिता राम राम विलास पासवान के 15 साल पहले वाले फॉर्मूले को आजमाने की कवायद में हैं। वह जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार को लेकर हमलावर हैं। लेकिन, बीजेपी को लेकर नरम रुख अख्तियार किए हुए हैं। जिसका संकेत एलजेपी के संसदीय दल की बैठक में भी मिल चुका है, क्योंकि इस बात को लेकर चर्चा हुई है कि जेडीयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारना चाहिए। ऐसे में माना जा रहा है कि एक तरह से एलजेपी बिहार में जेडीयू के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतरने का दांव खेल सकती है तो दूसरी ओर बीजेपी की सीटों पर प्रत्याशी उतारने के बजाय उनके समर्थन करने की रणनीति को अपना सकती है। इस तरह से एलजेपी केंद्र में एनडीए का हिस्सा बने रहते हुए केंद्रीय मंत्री की सीट भी बचा लेगी और जेडीयू से अपना हिसाब किताब भी बराबर कर लेगी।
एलजेपी के सदस्यों की राय है कि पार्टी को नीतीश के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। सदस्यों का कहना है कि जेडीयू कह रही है कि उनका गठबंधन बीजेपी से है ना कि एलजेपी से। ऐसे में पार्टी को जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखानी चाहिए।
(फाइल फोटो)
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2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए में आरजेडी और एलजीपी दोनों शामिल थे। फरवरी, 2005 में राम विलास पासवान ने कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए का हिस्सा होते हुए भी बिहार चुनाव में आरजेडी के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन, कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ ऐसा नहीं किया। राम विलास पासवान ने कांग्रेस प्रत्याशियों को समर्थन किया था। आरजेडी के राजनीतिक समीकरण को एलजेपी ने बिगाड़ दिया था, जिसके चलते सत्ता में नहीं आ सकी।
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बताते चले कि फरवरी 2005 के चुनाव में आरजेडी ने 210 सीटों पर चुनाव लड़कर 75 सीटें हासिल की थी और एलजेपी 178 सीटों पर लड़कर 29 सीटें जीती थी। वहीं, जेडीयू को 55 और बीजेपी को 37 सीटें मिली थी। बिहार में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिल सका था और राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ गया था। इसके कुछ महीने बाद दोबारा चुनाव हुए तो नीतीश कुमार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रहे थे। हालांकि, अब देखना होगा कि चिराग क्या सियासी फैसला लेते हैं।
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मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और बिहार के प्रभारी रह चुके कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने रामविलास पासवान और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान को पुराने घर में वापसी का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि रामविलास और चिराग पासवान देख चुके हैं कि पीएम ने देश के विकास के लिए कुछ नहीं किया। ईश्वर से प्रार्थना है कि प्रभु रामविलास और चिराग को सद्बुद्धि दें ताकि वे बिहार की अवसरवादी और देश की साम्प्रदायिक ताकतों को हराने में कांग्रेस और महागठबंधन का साथ दें।
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कांग्रेस द्वारा लोजपा को महागठबंधन में शामिल होने के ऑफर पर भाजपा ने चुटकी ली है ।भाजपा नेता और विधायक संजीव चौरसिया ने कहा है कि कांग्रेस का ऑफर का यह बयान तक ही सीमित रह जाएगा।
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लोजपा के प्रदेश प्रधान महासचिव शाहनवाज अहमद कैफी ने कहा है कि कांग्रेस का यह ऑफर लोजपा की मजबूती का सबूत है। इसपर अंतिम फैसला लेने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को है।
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