Published : Jun 24, 2020, 04:29 PM ISTUpdated : Jun 24, 2020, 04:38 PM IST
मुजफ्फरपुर (Bihar) । बाबा रामदेव के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर कराया गया है। आरोप है कि बाबा रामदेव ने एक दिन पहले कोरोना वायरस के इलाज की दवा बनाने का दावा किया था। साथ ही कोरोनिल दवा लॉच भी किया था, हालांकि अगले दो घंटे बाद ही आयुष मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि इस दवा का तब तक प्रचार न करें, जब तक हमें इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल जाती। ऐसे में शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने कोरोनिल दवा को बनाकर आयुष मंत्रालय के साथ-साथ देश को ठगने का काम किया है। आरोपित ने घातक और नुकसानदेह कदम उठाया है। इससे देश के लाखों लोगों की जान का भविष्य में खतरा हो सकता है। वहीं, सीजेएम कोर्ट ने मामले के ग्रहण के बिंदु पर सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि निर्धारित की है।
अहियापुर थाना क्षेत्र के भीखनपुर निवासी तमन्ना हाशमी ने ठगी-धोखाधड़ी को लेकर सीजेएम कोर्ट मे परिवाद दायर कराया है। इसमें उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव, पतंजलि संस्था के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण को आरोपित बनाया है।
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तमन्ना हाशमी ने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि आरोपित ने कोरोना वायरस बीमारी से बचाव के लिए एक दवा 'क्रोनील' टेबलेट बनाने का दावा किया है। इसमें भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इनकी दवा के प्रचार पर रोक लगाते हुए 'क्रोनील' दवा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोपितों ने आयुष मंत्रालय को बिना जानकारी दिए इस दवा को बनाया है।
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शिकायत पत्र में कहा है कि आरोपितों ने 'क्रोनील' दवा को बनाकर आयुष मंत्रालय के साथ-साथ देश को ठगने का काम किया है। आरोपित ने घातक और नुकसानदेह कदम उठाया है। इससे देश के लाखों लोगों की जान का भविष्य में खतरा हो सकता है।
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बता दें कि आयुष मंत्रालय ने भी पतंजलि से पूछा कि कोरोनिल दवा को बनाने में किन तत्वों का इस्तेमाल किया गया। मंत्रालय ने पूछा, जहां दवा पर रिसर्च किया गया, उस जगह का नाम, हॉस्पिटल का नाम, प्रोटोकॉल, सैंपल साइज क्या था, पूरी जानकारी दें। मंत्रालय ने संस्थागत आचार समिति की मंजूरी, सीटीआरआई रजिस्ट्रेशन और अध्ययन के नतीजों का डेटा भी मांगा है।
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मंत्रालय के सवाल पर पंतजलि के योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, हमने मंजूरी लेकर ही क्लीनिकल ट्रायल किया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया, यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन और गौरव देने वाली है। जो कम्युनिकेशन गैप था वह दूर हो गया है। Randomised Placebo Controlled Clinical Trials के जितने भी स्टैंडर्ड पैरामीटर्स हैं उन सबको 100% पूरा किया गया है। इसकी सारी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है।
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