गया(Bihar). बिहार के बोधगया में दो अनोखे पेड़ आकर्षण का केंद्र बन गये हैं। लोग इसे देखने के लिए आ रहे हैं। जिले के एक होटल की नर्सरी में लगे दो पेड़ों में कद्दू फल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इन पेड़ों की लम्बाई भी काफी ज्यादा है। लोग इन्हें विदेशी कद्दू भी कह रहे हैं। वह इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि यह विदेशी कद्दू पेड़ में फल रहा है। इस पेड़ पर साल भर कद्दू फलता है और लोग इसे देखने पहुंचते हैं। थाईलैंड, वियतनाम और दूसरे देशों से आने वाले विदेशी इसका स्वाद चखना नहीं भूलते। पसंद आने पर इसका पौधा खरीद कर विदेशी यहां से ले जाते हैं।
बोधगया के डेल्टा होटल की नर्सरी में दो गोल लौकी के पेड़ हैं। इस पेड़ की ऊंचाई 15 से 30 फीट होती है। लोग इन्हें विदेशी कद्दू भी कह रहे हैं। इस पर फलने वाला कद्दू या गोलाकार लौकी 20 इंच की गोलाई में है।
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होटल कर्मियों के मुताबिक यह पेड़ 10 साल पहले लगाया गया था। उनके मुताबिक होटल की नर्सरी में कई पौधे और भी हैं, जिन्हें देशी विदेशी लोग खरीदते हैं। लेकिन यह गोल लौकी का पेड़ बेहद खास है। विदेशियों को यह फल भा चुका है और वे बड़े चाव से इसे खाते और खरीदते हैं।
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इस कद्दू को कलाबस कहा जाता है। मूल रूप से यह अमेरिका तथा उसके आसपास के देशों में पाया जाता है। इसे सेंट लूसिया का राष्ट्रीय पौधा भी कहा जाता है। विदेशी लोग बड़े चाव से इस फल को खाते हैं। अधिक मात्रा में आयरन होने की वजह से महिलाओं के लिए यह फल काफी लाभदायक है।
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दूर से देखने पर यह लगता है कि शायद किसी फल या आम का पेड़ होगा। इसके तनों की मोटाई भी आम के पेड़ों की तरह है। यह डालियों व घनी पत्तियों से भरा रहता है। इसकी पत्तियां अमरूद की पत्तियों जैसी दिखती हैं। यह कोई आम कद्दू नहीं है, यह औषधीय महत्व वाला कद्दू है। इसका इस्तमाल पारंपरिक दवाई ओर मधुमेह के नियंत्रण में होता है।
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