लोगों के सवाल पर बौखला गए अमिताभ बच्चन, कहां किसको दी मदद-कहां क्या किया डोनेट...शेयर कर दी पूरी लिस्ट

Published : May 11, 2021, 10:48 AM ISTUpdated : May 11, 2021, 10:54 AM IST

मुंबई. अमूमन महामारी के दौरा में या फिर जहां भी आर्थिक मदद की बात आती है तो सबसे पहले अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और उनकी फैमिली पर उंगली उठाई जाती है। बार-बार आलोचना का शिकार होने और तानों से परेशान अमितााभ ने दुखी मन से अपने उन डोनेशन की लिस्ट शेयर की है, जो उन्होंने कई संस्थाओं और अस्पतालों को दिए हैं। हालांकि, ऐसा करने से वे दुखी भी है, लेकिन उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें रोज मिलने वाली गालियों और अपमानजनक टिप्पणियों की गंदगी का सामना करने के लिए ऐसा पहले ही कर देना चाहिए था। इतना ही नहीं उन्होंने अपने ब्लॉग में दिल्ली में एक कोविड केयर फेसिलिटी को दिए दो करोड़ रुपए के डोनेशन का जिक्र भी किया है।

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लोगों के सवाल पर बौखला गए अमिताभ बच्चन, कहां किसको दी मदद-कहां क्या किया डोनेट...शेयर कर दी पूरी लिस्ट

अमिताभ ने कहा कि कोरोना के प्रकोप से लड़ने और देश सेवा में किए गए योगदान के बारे में मुझे बताने में शर्मिंदगी महसूस होती है क्योंकि मैं अपना बखान नहीं करना चाहता। लेकिन इसकी जरूरत इसलिए है क्योंकि कई दिनों से यूजर्स के भद्दे कमेंट्स का सामना करना पड़ रहा है। 

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अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा- हां, मैं चैरिटी करता हूं, लेकिन कभी इस बारे में बात करना सही नहीं समझा। ये बहुत शर्मनाक लगता है, लेकिन मेरे लिए आज यह बताना जरूरी हो गया है। वैसे तो हर दिन गाली-गलौज और भद्दे कमेंट की गंदगी पर मेरा या परिवार का कभी ध्यान नहीं गया है। क्योंकि समझदारी इसी में है कि जो हो रहा है होने दो और अपना काम करते रहे। किसी को कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस बारे में केवल वही व्यक्ति जानता है जिसे मदद मिली।

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अब लोगों के तानों से नाराज अमिताभ ने अपनी चैरिटी की लिस्ट शेयर कर सभी की बोलती बंद कर दी। उन्होंने लंबी-चौड़ी लिस्ट के जरिए बताया कि वे कहां-कहां चैरिटी करते हैं। उन्होंने बताया- आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और यूपी के 1500 से ज्यादा किसानों के बैंक लोन मैंने चुकाए और उन्हें आत्महत्या से बचाया। 300 से ज्यादा लोग आ नहीं सके, 50 लोगों के लिए ट्रेन की बोगी बुक करवाई। उन्हें मुंबई बुलाया, बसें भेजीं, मुंबई दर्शन करवाया, घर बुलाया, भोजन करवाया और लोन कैंसिलेशन सर्टिफिकेट दिए और उन्हें वापस भेजा सब अपने खर्चे पर।

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उन्होंने बताया- कोरोना के शुरुआती दौर में मैंने 4 लाख से अधिक दैनिक मजदूरों को करीब 1 महीने राशन दिया। शहर में करीब 5 हजार लोगों को हर दिन दो वक्त का खाना खिलाया। हजारों मास्क, पीपीई किट फ्रंट लाइन वॉरियर्स, अस्पतालों को दिए। अपने निजी फंड से सिख समुदाय को डोनेशन दिया, जिससे प्रवासियों को उनके घर वापस जाने में मदद दी गई। 

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उन्होंने बताया- प्रवासी जब घर लौट रहे थे तब उनमें कई लोगों के पास पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। सैकड़ों लोगों को जूते-चप्पल दिए। आने-जाने में परेशानी न हो इसके लिए 30 बसों को यूपी-बिहार के कई जिलों के लिए बुक किया। उनकी पूरी यात्रा के लिए खाना-पानी दिया।

 

- मुंबई से यूपी तक एक पूरी ट्रेन बुक की, जिसमें 2800 प्रवासी बिना कोई पैसा लिए भेजे गए। मेरे अपने खर्चे पर। जब राज्य ने ट्रेन का आना कैंसिल कर दिया तो तुरंत 3 चार्टर इंडिगो हवाई जहाज के जरिए 180 प्रवासियों को हर फ्लाइट से यूपी, बिहार, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर भेजा।

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उन्होंने बताया- जैसे वायरस का प्रकोप बढ़ा, एक पूरा डायग्नोस्टिक सेंटर बंगला साहिब गुरुद्वारे को दिया ताकि गरीब-जरूरतमंदों की मदद हो सके। मेरे नाना-नानी और मां की याद में एक एमआरआई मशीन, सोनोग्राफिक स्कैन उपकरण दिए।

 

- 450 बेड के एक केयर सेंटर सेटअप के लिए रकाबगंज गुरुद्वारा में डोनेशन दिया। जल्द ही ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स भेजे जाएंगे। कुछ दिल्ली में जहां जरूरत ज्यादा है और कुछ मुंबई में। जो इसी हफ्ते होगा। उनमें से करीब 50 पौलेंड से 15 मई तक आ जाएंगे। बाकी 150 यूएस से। ऑर्डर भेजा जा चुका है। कुछ अस्पताल में भेज दिए गए हैं।

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अमिताभ ने बताया कि बीएमसी को वेंटिलेटर्स की जरूरत थी तो मैंने 20 मंगवाए, 10 आ गए हैं, जो आज कस्टम से निकलकर पहुंच जाएंगे। जुहू ऑर्मी लोकेशन में 50 बेड का अस्पताल बना है, इस सेटअप के लिए डोनेशन दिया। नानावटी अस्पताल को पिछले हफ्ते 3 कोविड डिटेक्शन मशीन डोनेट कीं।


- शहर की झुग्गी और गरीब बस्तियों में हजार लोगों को खाना भेजा जा रहा है। छोटे बच्चे जिनके पेरेंट्स कोरोना में नहीं रहे, उनमें से 2 को गोद लिया और हैदराबाद के अनाथालय में भेजा है। उनकी शिक्षा का खर्च उठा रहा हूं। 10वीं के बाद वे अगर प्रतिभाशाली निकलते हैं तो आगे की एजुकेशन का खर्च भी उठाउंगा।

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उन्होंने बताया- वीर शहीद जवानों की सूची मांगी और उनके परिवार, पत्नियों और उनके बच्चों, कुछ गर्भवती शहीद विधवाओं को जरूरत के मुताबिक मदद की। पुलवामा आतंकवादी हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों को जनक बुलाया और अभिषेक-श्वेता के हाथों मदद दिलवाई।

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आखिर में अमिताभ ने लिखा- मैं इसका बखान नहीं करना चाहता था लेकिन उन्हें मजबूरन यह सब बताना पड़ा। उन्होंने कहा- तारीफ नहीं इन सब चीजों का अनुसरण करें। क्योंकि अगर कोई छोटी सी भी मदद करता है तो मुश्किल हालात थोड़े बहुत सुधरने लगते हैं।

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