Published : Sep 03, 2020, 02:48 PM ISTUpdated : Sep 03, 2020, 02:50 PM IST
बिजनेस डेस्क : कोरोना काल में फाइनेंशियल दिक्कतों के कारण कंपनियों को बहुत नुकसान हो रहा है। कई सारी कंपनियां डूब भी गई हैं। ऐसे में एक बार फिर सहारा कंपनी खतरे में नजर आ रही है। कंपनी पर बड़ी आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगा है। कहा जा रहा हैं कि जिस समय कंपनी के हैड सुब्रत रॉय तिहाड़ जेल में थे उस समय सहारा कंपनी ने लोगों के पैसे के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ किया। साल 2010 से 2014 के बीच सहारा ग्रुप ने तीन सहकारी समितियों को चालू किया और चार करोड़ जमाकर्ताओं से 86,673 करोड़ रुपए जमा किए गए। लेकिन अब सरकार ने नई जमाओं पर रोक लगा दी है और बहुत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताई है।
1978 में महज 2,000 रुपए से सुब्रत रॉय ने सहारा कंपनी की शुरुआत की थी। कुछ ही सालों में इसका टर्न ओवर हजारों करोड़ रुपए हो गया था।
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2012 में बड़े विवाद में फंसने से पहले सहारे कंपनी ने ज्यादा मुनाफे का लालच देकर लोगों के पैसे खा लिए थे।
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2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय और उनके दो साथियों को जेल भेज दिया था। इसी दौरान सहारा ने तीन सहकारी समितियों को चालू किया।
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सहारा की कुल 4 सहकारी समितियां हैं। सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (2010), हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारियन यूनिवर्सल मल्टीपरपस सोसाइटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपरपस कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड।
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इन सहकारी समितियों के जरिए कंपनी ने 4 करोड़ लोगों के कुल 86,673 करोड़ रुपये जमा किए। इसमें से कम से कम 62,643 करोड़ रुपये महाराष्ट्र के लोनावला स्थित एंबी वैली प्रोजेक्ट में निवेश किया।
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एंबी वैली प्रोजेक्ट वही चर्चित प्रोजेक्ट है जिसे 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अटैच कर लिया था। लेकिन जब जमाकर्ताओं के पैसे लौटाने के लिए इस प्रॉपर्टीको नीलाम किया गया तो ये नीलाम नही हो पाई, फिर 2019 में इस प्रॉपर्टी को रिलीज कर दिया गया।
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18 अगस्त को कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स को सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस की तरफ से सहारा समूह की जांच के लिए एक पत्र लिखा।
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इसके बाद अब सरकार इन समितियों में संदिग्ध अनियमितताओं की जांच करेगी जिससे जमाकर्ताओं की कड़ी मेहनत के पैसों पर एक बार खतरा मंडरा रहा है।
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