बिजनेस डेस्क। कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) से सुरक्षा के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन का काम शुरू हो गया है। वहीं, हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों (Health Insurance Companies) ने वैक्सीनेशन में आने वाले खर्च को उठाने से साफ मना कर दिया है। जनरल इन्श्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) ने कहा है कि इन्श्योरेंस पॉलिसी के तहत सिर्फ हॉस्पिटलाइजेशन के खर्च को ही कवर किया जाएगा। वहीं, इन्श्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेलवपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) का कहना है कि हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों को इम्युनाइजेशन यानी वैक्सीनेशन के खर्च को भी कवर करना होगा। लेकिन हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों ने रेग्युलेटर के इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। (फाइल फोटो)
इन्श्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने कोविड-19 के वैक्सीनेशन को हेल्थ इन्श्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर करने का आदेश बीमा कंपनियों को जारी किया है। इस पर जनरल इन्श्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) ने विरोध जताया है। उसने IRDAI के फैसले पर कहा है कि इन्श्योरेंस पॉलिसी के तहत सिर्फ हॉस्पिटलाइजेश के खर्च को ही कवर किया जा सकता है और यह कोविड-19 से संबंधित होना चाहिए। (फाइल फोटो)
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जीआईसी ने कहा है कि कोविड-19 वैक्सीनेशन का खर्च हेल्थ इन्श्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर नहीं किया जा सकता है। इन्श्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 13 जनवरी को जनरल और दूसरी हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों को कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिए खर्च वहन करने को कहा था। रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने कहा था कि जीआईसी काउंसिल राज्य सरकारों के साथ एग्रीमेंट करके एक रेट तय कर सकती है। (फाइल फोटो)
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जानकारी के मुताबिक, कई राज्यों ने कोविड-19 के इलाज और वैक्सीनेशन के लिए एक दर को तय किया है। हालांकि, जब यह महामारी काफी बढ़ी हुई थी, तब अस्पतालों ने इस दर को नहीं माना। अस्पतालों ने कोरोना के इलाज के लिए मनमाना खर्च वसूला और एक दिन के लिए 25-25 हजार रुपए तक के बिल बनाए। (फाइल फोटो)
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कई अस्पतालों ने कोरोना के ऐसे मरीजों को भर्ती करने से साफ इनकार कर दिया, जिनके पास पूरे पैसे नहीं थे। वहीं, जिन मरीजों के पास हेल्थ इन्श्योरेंस पॉलिसी थी, उन्हें बाद में भर्ती किया गया। अस्पतालों का कहना था कि बीमा कंपनियां उनके बिल में 25 फीसदी की कटौती करके पेमेंट कर रही हैं। (फाइल फोटो)
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हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों का कहना है कि अस्पताल बिल में हॉस्पिटल की साफ-सफाई का खर्च, पीपीई किट, मास्क और दस्ताने के खर्च को अलग से जोड़ते हैं। वे ऐसे खर्च को बिल में जोड़ते हैं, जो हेल्थ इन्श्योरेंस के दायरे में नहीं आते हैं। यही वजह है कि अस्पताल ऐसे कोरोना मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी करने लगे। (फाइल फोटो)
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अब कोरोना वैक्सीनेशन के खर्च को कवर करने को लेकर रेग्युलेटर अथॉरिटी और हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों के बीच विवाद शुरू हो गया है। रेग्युलेटर अथॉरिटी का कहना है कि हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियों को इस खर्च को हर हाल में कवर करना होगा। वहीं, कंपनियां इससे इनकार कर रही हैं। (फाइल फोटो)
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