Published : Mar 24, 2020, 04:29 PM ISTUpdated : Mar 25, 2020, 01:20 PM IST
नई दिल्ली। बताने की जरूरत नहीं कि दुनियाभर के साथ ही घातक कोरोना वायरस (कोविड 19) भारत में भी लोगों एक स्वास्थ्य और संपत्ति को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। भारत के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी भी कोरोना की महामारी की वजह से अस्त व्यस्त हुए स्टॉक मार्केट के बुरे प्रभावों से बच नहीं पाए हैं। कोरोना की महामारी के बाद मुकेश अंबानी की संपत्ति लगभग आधे के करीब कम हुई है है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक साल 2020 की शुरुआत के वक्त मुकेश अंबानी की वेल्थ 58.6 बिलियन डॉलर थी। जो कोरोना महामारी के डर से सहमे बाजार की वजह से 19 मार्च के बाद 41% घटकर 34.4 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया के स्टॉक मार्केट को तबाह कर दिया है। इसका नतीजा यह रहा कि पिछले साल यानी 2019 में मुकेश अंबानी ने जितना कमाया था उससे कहीं ज्यादा वो इस साल गंवा चुके हैं।
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हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज में अंबानी परिवार से मुकेश, नीता और उनके तीन बच्चों की हिस्सेदारी बढ़ने के बाद मामूली वृद्धि भी देखी गई। इसका नतीजा यह रहा कि 22 मार्च तक अंबानी की वेल्थ 37.7 बिलियन डॉलर पर थी। अंबानी दुनिया के उन टॉप 5 अरबपतियों में शामिल हैं, जिन्होंने पिछले तीन महीनों में सबसे ज्यादा संपत्ति गंवाई है।
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स्टॉक मार्केट को देखें तो ये साफ पता चलता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयर की कीमत 1 जनवरी 2020 से 23 मार्च 2020 के बीच करीब 39% तक नीचे गिरी। और इसकी साफ वजह कोरोना वायरस के बाद बड़े पैमाने पर हुई बिकवाली है।
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साल 2018 के मध्य से ही स्टॉक मार्केट में RIL का स्टॉक 1000 रुपये से ऊपर ही कारोबार करता रहा। अकेले साल 2019 में RIL ने 2.49 ट्रिलियन रुपये जोड़े जो उच्चतम मूल्य है। लेकिन ये RIL की ये सक्सेस 2020 तक नहीं जा पाई।
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19 मार्च को RIL का एक शेयर 917 रुपये पर कारोबार कर रहा था। जो 24 मार्च को 61.95 पैसे की बढ़त के साथ 946 रुपये कारोबार किया। मुकेश अंबानी के RIL के शेयर की कीमतों में ज़्यादातर गिरावट पिछले एक साल के दौरान ही हुई।
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ये गिरावट उस दौरान हुई जब कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त कमी के बीच ग्लोबल मंदी की आशंका थी। अंबानी का रिफाइनिंग कारोबार सीधे तेल की कीमतों से जुड़ा है। इस बीच अच्छी बात ये रही कि अंबानी के टेलिकॉम और रिटेल कारोबार मजबूत होते रहे।
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सऊदी अरब और रूस के बीच तेल युद्ध अंबानी के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है। अंबानी को इस साल 31 मार्च तक 15 अरब डॉलर के सऊदी अरामको डील को भी खत्म करना था। मगर कोरोना की वजह से ग्लोबल लॉकडाउन के बाद इन्वेस्टर डरे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सौदा बंद हो सकता है।
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