चीनी बैंकों से परेशान अनिल अंबानी के भाई को ड्रैगन पर कभी नहीं रहा भरोसा, डोनाल्ड ट्रंप से कही थी ये बात

Published : Jun 18, 2020, 03:40 PM ISTUpdated : Jun 18, 2020, 05:35 PM IST

बिजनेस डेस्क। भारत के जाने-माने कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी इस वक्त कर्ज के कई मामलों की वजह से कारोबारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कारोबारी डील के तहत चीन के बैंकों से भी भारी भरकम कर्ज ले रखा है। कर्ज की भरपाई के लिए चीनी बैंकों ने अनिल को लंदन की कोर्ट में भी घसीटा है। उधर, छोटे भाई चीन के साथ कारोबारी डील करते रहे, मगर मुकेश अंबानी को पहले से ही कभी उसपर भरोसा नहीं रहा है।   

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चीनी बैंकों से परेशान अनिल अंबानी के भाई को ड्रैगन पर कभी नहीं रहा भरोसा, डोनाल्ड ट्रंप से कही थी ये बात

एक बातचीत में उन्होंने कहा था कि रिलायंस जियो चीन से कुछ भी नहीं लेता है। ये हैरान करने वाली बात है। मोबाइल और स्मार्टफोन के बिजनेस में न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के तमाम बड़े देशों को चीन से सामान लेना पड़ता है। मगर मुकेश अंबानी ने जियो के किसी कम्पोनेंट के लिए चीन की ओर रुख नहीं किया। 

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दरअसल, मुकेश अंबानी काफी लंबे समय से चीन के प्रभाव से अलग कारोबार की स्ट्रेटजी पर चलते रहे हैं। जियो के लिए चीन से किसी तरह की डील न करने की बात उन्होंने इसी साल भारत में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात के दौरान भी कही थी। 

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ट्रंप ने जियो के 5 जी में जाने को लेकर अंबानी से सवाल किया था। मुकेश अंबानी ने अमेरिकी प्रेसिडेंट को बताया कि रिलायंस इस दिशा में काम कर रहा है। इसी दौरान उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस जियो दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जिसमें चीन का कोई कम्पोनेंट इस्तेमाल नहीं हुआ है। जियो भारत की सबसे बड़ी कंपनी है। 

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हाल ही में जियो में फेसबुक और अन्य कंपनियों के रूप में अमेरिका और मिडिल ईस्ट से कई बड़े निवेश मिले हैं। जियो भारत की कर्जमुक्त कंपनी बनने की राह पर है। माना जा रहा है कि जियो टेलिकॉम और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में बड़ी शुरुआत की कोशिश में है। 

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हुवेइ और ZTE टेलिकॉम कम्पोनेंट तैयार करने वाली दुनिया की बड़ी चीनी कंपनियां हैं। दुनिया के कई बड़े देशों में इनका कारोबार है। पिछले दिनों जासूसी का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने हुवेइ को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। अमेरिका ने भारत से भी इस कंपनी को 5 जी ट्रायल से दूर रखने की मांग कर चुका है।

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जापान, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी अपने 5 जी प्रोजेक्ट से चीनी कंपनियों को दूर रखा है। बताते चलें कि रिलायंस कॉम के लिए अनिल अंबानी चीन की टेलिकॉम कंपनियों के साथ कारोबार करते रहे हैं। 

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लद्दाख में जवानों की शहादत के बाद चीन के प्रोडक्ट के बहिष्कार की बात हो रही है। भारत में जियोमी, ओपो, विवो, वन प्लस, लेनेवो, टेकनो, जीफाइव, मेइजू और लीइको जैसी स्मार्टफोन कंपनियां चीन की हैं। 

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भारत में काम करने वाली चीनी सॉफ्टवेयर कंपनियों में आलीबाबा, टेनसेंट होल्डिंग, ZTE, बाइटडांस है। 

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अन्य सेक्टर की चीनी कंपनियों में चाइना डोंगफैंग इंटरनेशनल, बोशन आइरन एंड स्टील लिमिटेड, चोंगकिंग लिफन इंडस्ट्री और डोंगफैंग इलेक्ट्रिक हैं।

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अनिल अंबानी ने कारोबारी जरूरतों के लिए चीनी बैंकों से कर्ज भी ले रखा था। उनके ऊपर तीन चीनी बैंकों के करीब 680 मिलियन डॉलर यानी 47600 करोड़ रुपये का कर्ज है। 

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चीन के बैंकों ने 2012 अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशन को यह कर्ज जारी किया था। लेकिन 2017 में अनिल अंबानी की कंपनी डिफ़ाल्ट हो गई। कर्ज नहीं चुका पाने की स्थिति में चीनी बैंकों ने अनिल अंबानी को लंदन की कोर्ट में घसीटा। 

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पिछले दिनों इसे मामले की सुनवाई के दौरान लंदन की कोर्ट ने कर्ज चुकाने की समयसीमा दी है। 

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