बिजनेस डेस्क। अब खरीददारी से लेकर दूसरे तरह के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन्स में पेमेंट ऐप्स (Payments Apps) का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। ज्यादातर लोग अब यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) बेस्ड पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। आजकल यूपीआई बेस्ड पेमेंट्स ऐप की कोई कमी नहीं है, लेकिन इनमें गूगलपे (Googlepay) और फोनपे (Phonpe) सबसे ज्यादा पॉपुलर है। इसकी वजह यह है कि इनका इस्तेमाल करना बेहद आसान है। इनके जरिए ट्रांजैक्शन में काफी सुविधा होती है। अभी हाल में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक आंकड़ा जारी किया है, जिससे पता चलता है कि फोनपे ने गूगलपे को पीछे छोड़ दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2020 में फोनपे के जरिए 90.20 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और 1 लाख 82 हजार रुपए का लेन-देन किया गया। (फाइल फोटो)
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, दिसंबर 2020 में यूपीआई बेस्ड पेमेंट ऐप्स के जरिए 223 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजैक्शन हुए। इनमें करीब 4 लाख 16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हुआ। (फाइल फोटो)
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दिसंबर 2020 में गूगलपे के जरिए 85.44 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए और कुल 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। वहीं, नवंबर 2020 में गूगलपे के जरिए 96 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए थे, जो दिसंबर के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा था। नवंबर महीने में फोनपे के जरिए 86.84 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए थे। (फाइल फोटो)
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नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2020 में यूपीआई बेस्ड पेमेंट ऐप्स के जरिए 221 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए थे। इसके जरिए 3 लाख 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हुआ। (फाइल फोटो)
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आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई बेस्ड पेमेंट्स ऐप के जरिए अक्टूबर 2020 में 210 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। इनके जरिए करीब 3 लाख 86 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हुआ था। सबसे ज्यादा लेन-देन फोनपे और गूगलपे के जरिए हुआ। (फाइल फोटो)
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नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों से जाहिर है कि गूगलपे और फोनपे ऐप ने यूपीआई मार्केट पर कब्जा जमा रखा है। दिसंबर 2020 में हुए कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन्स मे इन दोनों की हिस्सेदारी 78 फीसदी थी, वहीं पेमेंट की कुल राशि में इनकी हिस्सेदारी 86 फीसदी रही। (फाइल फोटो)
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यूपीआई बेस्ड पेमेंट ऐप्स यंगस्टर्स के बीच काफी पॉपुलर हैं। ये छोटी रकम के लेन-देन के लिए तो ठीक है, लेकिन बड़ी रकम का लेन-देन नेट बैंकिंग के जरिए करना ही ठीक होता है। नेट बैंकिग में बेनिफिशियरी का नाम एड करना होता है। इसके अलावा, इसमें सिक्युरिटी ज्यादा होती है। (फाइल फोटो)
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