पुणे, महाराष्ट्र. जिंदगी में टर्निंग पॉइंट हमेशा किसी बड़ी मुसीबत के बाद ही आता है। अब 28 साल के इस युवक रेवन शिंदे को ही देख लीजिए! ये कभी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। गार्ड को बमुश्किल 8-10000 रुपए मंथली सैलरी मिलती है। ये जैसे-तैसे अपना जीवन यापन कर रहे थे। अचानक दिसंबर, 2019 में इन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उस वक्त इन्हें ऐसा लगा, जैसे दुनिया की उजड़ गई हो। कई महीने तक तमाम जगहों पर नई नौकरी के लिए हाथ-पैर मारे, लेकिन असफल रहे। थक-हारकर इन्होंने खुद का कुछ करने का सोचा। पुणे के पिंपरी-चिंचवाड इलाके में रहने वाले रेवन ने हिम्मत करके अपनी सारी जमापूंजी लगाकर एक कैफे खोला। नाम 'कैफे 18' रखा। आज ये रोज 600-700 कप चाय बेचते हैं। यानी हर महीने ये 50- 60,000 रुपये कमा रहे हैं।
रेवन का कैफे 18 आज आसपास के कार्पोरेट आफिस और फैक्ट्रियों के मजदूरों और अन्य कर्मचारियों तक चाय पहुंचाता है। होम डिलीवरी की सुविधा देने के कारण इनका काम-धंधा लगातार तरक्की कर रहा है।
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रेवन मानते हैं कि दफ्तरों और फैक्ट्रियों में आमतौर पर समय की बड़ी पाबंदी होती है। कर्मचारी बाहर नहीं निकल पाते। ऐसे में जब उन्होंने चाय कार्यस्थल पर पहुंचाना शुरू की, तो अच्छा परिणाम निकला।
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चाय की क्वालिटी मेंटने रखने के कारण लोगों को इनकी चाय पसंद आई और ग्राहक बढ़ते चले गए। शुरुआत में इन्होंने कुछ लोगों को मुफ्त में चाय पिलाई, ताकि उनकी प्रतिक्रिया ली जा सके।
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रेवन के कैफे 18 की लोकप्रियता आसपास काफी हो गई है। अब दूर-दूर से लोग इनके यहां चाय पीने आते हैं। रेवन कहते हैं कि अगर आप चीजों की क्वालिटी मेंटेन रखेंगे, तो ग्राहक अपने आप बढ़ते जाएंगे। आज रेवन के कैफे में कई कर्मचारी काम कर रहे हैं।
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रेवन बताते हैं जब सिक्योरिटी गार्ड की उनकी नौकरी छूटी, तब कुछ समझ नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि बस कहीं भी छोटी-सी नौकरी मिल जाए। लेकिन आज लगता है कि जो होता है अच्छा होता है।
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