Published : Mar 17, 2020, 03:23 PM ISTUpdated : Mar 17, 2020, 03:26 PM IST
करियर डेस्क. किसी ने सच ही कहा है अगर जिंदगी में कुछ पाने के लिए पूरी ईमानदारी से कोशिश की जाए तो मंजिल मिल ही जाती है। सफलता के लिए सिर्फ जरूरी है जोश व लगन। व्यक्ति अपनी मेहनत और जोश के दम पर बड़ा से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। आज कल अक्सर देखा जा रहा है कि कॉम्पटेटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स अक्सर एक या दो बार असफल होने के बाद नर्वस हो जाते हैं। वह अपना संतुलन खो बैठते हैं उन्हें ये लगने लगता है कि अगर वह सफल न हुए तो जिंदगी में क्या कर सकेंगे। उन्हें आगे का रास्ता नहीं सूझता है। आज हम आपको 2017 बैच की IAS सौम्या शर्मा की कहानी बताने जा रहे हैं।
सौम्या शर्मा मूलतः दिल्ली की रहने वाली हैं। उनके माता पिता दोनों डॉक्टर हैं। 16 साल की उम्र में सौम्या ने सुनने की क्षमता खो दी थी। वे सुनने के लिए कान की मशीन पर निर्भर हैं। सौम्या शर्मा ने महज 23 साल की उम्र में UPSC का एग्जाम क्रैक किया।
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सौम्या ने 2017 में दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से एलएलबी पूरी की। 2017 में ही उन्होंने UPSC सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। उसी साल उन्होंने UPSC प्रीलिम्स और UPSC मेन्स परीक्षा दी।
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सुनने की क्षमता न होने के कारण सौम्या को विकलांग श्रेणी में शामिल किया गया। लेकिन उन्होंने इसे खारिज करते हुए सामान्य श्रेणी में एग्जाम देने के फैसला किया। उन्होंने UPSC की तैयारी के लिए किसी भी कोचिंग का सहारा नहीं लिया।
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सौम्या सब UPSC की परीक्षा दे रही थीं तो उस समय उनकी तबियत काफी खराब थी। उन्हें 102 डिग्री बुखार था। उनकी आखों के सामने अन्धेरा छा जा रहा था। लेकिन फिर भी सौम्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने इसी हालत में UPSC का एग्जाम दिया।
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सौम्या की तबियत उस समय इतने खराब थी कि उन्हें दिन में तीन बार स्लाइन ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। परीक्षा के दिन भी ब्रेक के दौरान सौम्या को ड्रिप चढ़ाई गई थी। लेकिन सौम्या का हौसला इतना बुलंद था कि उन्होंने अपने हौसलों से लाचारी को मात दे दी।
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सौम्या ने साल 2017 में दी गई UPSC की परीक्षा पहले ही प्रयास में क्लियर कर लिया। उन्हें देश भर में 9 वीं रैंक मिली।
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