शिक्षा मंत्रालय में अचानक बड़ा बदलाव! कौन हैं IAS टीके अनिल कुमार जिन्हें मिली सबसे अहम जिम्मेदारी? उधर NTA के 47 अधिकारियों पर गिरी गाज, आखिर क्या बदलने वाला है?
नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है। पेपर लीक के चौतरफा विवादों और सियासी घमासान के बीच केंद्र सरकार ने एक ऐसा बड़ा प्रशासनिक ऑपरेशन शुरू किया है, जिसने सबको चौंका दिया है। एक तरफ जहां स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की कमान एक बेहद अनुभवी और कड़क आईएएस अधिकारी को सौंपी गई है, वहीं दूसरी तरफ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के भीतर एक खामोश लेकिन बेहद आक्रामक 'क्लीन-अप ड्राइव' चलाकर दर्जनों अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
कौन हैं IAS टी.के. अनिल कुमार? संकट के समय में मिली सबसे बड़ी जिम्मेदारी
जब देश की पूरी शिक्षा प्रणाली और परीक्षाओं की साख दांव पर लगी है, तब सरकार ने एक बेहद भरोसेमंद चेहरे पर दांव खेला है। कर्नाटक कैडर के 1995 बैच के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी टी.के. अनिल कुमार ने 24 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव का महत्वपूर्ण पद संभाल लिया है। शनिवार को शिक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की। नई जिम्मेदारी संभालने से पहले वे ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) के पद पर कार्यरत थे। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कुमार अपने साथ जमीनी स्तर का एक व्यापक और कड़क अनुभव लेकर आए हैं, जिसकी इस समय विभाग को सबसे ज्यादा जरूरत थी। लेकिन सस्पेंस इस बात को लेकर है कि क्या वह इस सिस्टम को पटरी पर ला पाएंगे?
शिक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
शिक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि टीके अनिल कुमार ने 24 जुलाई को आधिकारिक रूप से सचिव का पद संभाल लिया है। मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक कैडर के इस वरिष्ठ IAS अधिकारी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव विभाग को नई दिशा देने में मदद करेगा। ऐसे समय में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारों पर तेजी से काम चल रहा है।
NTA में 'ऑपरेशन क्लीन-अप': 47 अधिकारियों की बर्खास्तगी और कानूनी शिकंजा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) ने सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर दी। हालिया पेपर लीक विवादों से घिरी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में एक साथ 47 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। मामला सिर्फ नौकरी से निकालने तक ही सीमित नहीं है; सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई दागी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और आपराधिक (क्रिमिनल) कार्रवाई की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। इसे NTA के इतिहास का सबसे बड़ा अंदरूनी शुद्धिकरण माना जा रहा है, जिसका मकसद परीक्षा माफियाओं के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंकना है।
सिर्फ एक नियुक्ति नहीं... मंत्रालय में कई बड़े बदलाव
प्रशासनिक फेरबदल की यह पटकथा यहीं खत्म नहीं होती। इससे ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार को नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया था। गंगवार ने विनीत जोशी की जगह ली है, जिन्हें अब पंचायती राज विभाग के सचिव पद पर भेज दिया गया है। इस अचानक हुए ट्रांसफर और नई नियुक्तियों को सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पूरे शिक्षा तंत्र का चेहरा बदलने की कोशिश की जा रही है।
इस्तीफे का सस्पेंस: राष्ट्र-विरोधी ताकतों को रोकने के लिए दिया बलिदान?
इन सभी बड़े प्रशासनिक फैसलों के बीच शनिवार को एक राजनीतिक विस्फोट भी हुआ। केंद्रीय कैबिनेट के एक अहम सदस्य प्रधान ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए एक बेहद गंभीर बयान दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों को लेकर जो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, उसका फायदा कुछ "राष्ट्र-विरोधी ताकतें" उठाना चाहती हैं। उन ताकतों के मंसूबों को नाकाम करने और सरकार पर आंच न आने देने के लिए उन्होंने खुद को इस पद से अलग करने का फैसला किया है। अब देखना यह है कि इस महा-फेरबदल और सख्त कार्रवाइयों के बाद क्या देश की शिक्षा व्यवस्था में दोबारा छात्रों का भरोसा बहाल हो पाएगा?
अब आगे क्या होगा?
टीके अनिल कुमार की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने और शिक्षा प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में कई बड़े कदम उठा रही है। NTA में कार्रवाई, शिक्षा मंत्रालय में नए सचिवों की नियुक्ति और परीक्षा सुधारों से जुड़े प्रस्तावित बदलाव यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक प्रशासनिक और संस्थागत परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नए सचिव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग इन चुनौतियों से कैसे निपटता है।


