अमेरिका के Tim Andrews को जेनेटिकली एडिटेड सुअर की किडनी लगी। वह 271 दिन बिना डायलिसिस रहे और बाद में उन्हें इंसानी किडनी मिली। जानिए Xenotransplantation कैसे बना नया मेडिकल ब्रिज।

Pig Kidney Transplant: अंगों की कमी से जूझ रही दुनिया के लिए अमेरिका से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पहली बार किसी इंसान में जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीन-एडिटेड) सुअर की किडनी लगाई गई, जिसने करीब 9 महीने यानी 271 दिनों तक बिना किसी डायलिसिस के बिल्कुल सही काम किया। इसके बाद जब वो किडनी खराब हुई, तो मरीज़ को एक मृत डोनर से इंसानी किडनी भी सफलतापूर्वक लगा दी गई। 'द लैंसेट' में छपी इस रिपोर्ट ने मेडिकल साइंस में एक नया रास्ता खोल दिया है। डॉक्टरों को उम्मीद जगी है कि सुअर के अंगों को इंसानी अंग मिलने तक एक अस्थायी "पुल" (Bridge) की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

कौन हैं टिम एंड्रयूज और उनके साथ क्या हुआ?

अमेरिका के रहने वाले टिम एंड्रयूज (66 वर्ष) किडनी की आखिरी स्टेज की बीमारी से जूझ रहे थे। इंसानी किडनी का इंतज़ार बहुत लंबा था, इसलिए उन्होंने इस एक्सपेरिमेंटल प्रोसीजर (ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन) को चुना। जनवरी 2025 में उन्हें यूकाटन मिनिएचर प्रजाति के सुअर की जीन-एडिटेड किडनी लगाई गई। ट्रांसप्लांट होते ही किडनी ने काम करना शुरू कर दिया और टिम को पूरे 271 दिनों तक थकाने वाले डायलिसिस से छुट्टी मिल गई। बाद में जब इंफेक्शन के चलते सुअर की किडनी का काम बिगड़ने लगा, तो उसे निकाल दिया गया। एंड्रयूज कुछ समय डायलिसिस पर रहे और फिर जनवरी 2026 में उन्हें एक इंसानी किडनी मिल गई। सबसे अच्छी बात यह रही कि सुअर की किडनी लगाने की वजह से उनके शरीर ने इंसानी किडनी को खारिज नहीं किया।

सुअर की किडनी में आखिर क्या बदलाव किए गए थे?

इंसानी इम्यून सिस्टम किसी भी जानवर के अंग को तुरंत रिजेक्ट कर देता है। इसलिए वैज्ञानिकों ने सुअर के जीनोम में 69 बदलाव (Gene Edits) किए थे:

  • 3 पिग ग्लाइकन एंटीजन हटाए गए: ताकि इंसान का इम्यून सिस्टम उस पर हमला न करे।
  • 7 इंसानी जीन डाले गए: ताकि अंग इंसानी शरीर के साथ आसानी से तालमेल बिठा सके।
  • वायरस को निष्क्रिय किया गया: सुअर से इंसान में किसी भी पोर्सिन एंडोजेनस रेट्रोवायरस (PERVs) के फैलने के खतरे को खत्म किया गया।

271 दिनों की सफलता के मायने क्या हैं?

यह पहली बार नहीं है जब सुअर की किडनी इंसान में लगाई गई हो। मार्च 2024 में मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में पहला ऐसा ट्रांसप्लांट हुआ था, लेकिन तब मरीज़ की मौत 52 दिनों में दिल की बीमारी से हो गई थी। लेकिन टिम एंड्रयूज का मामला दिखाता है कि यह तरीका सिर्फ चंद दिनों की ज़िंदगी नहीं बढ़ाता, बल्कि इंसानी अंग मिलने तक मरीज़ को सुरक्षित रख सकता है। यह उन लाखों लोगों के लिए बड़ी उम्मीद है जो ऑर्गन डोनर के इंतज़ार में डायलिसिस पर दिन काट रहे हैं।

भारत और दुनिया में अंगों की भारी कमी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल लगभग 1,50,000 ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते हैं, जो असल ज़रूरत का 10% से भी कम है। भारत की बात करें तो नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन (NOTTO) के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में कुल 18,911 ट्रांसप्लांट हुए थे। अकेले जनवरी से सितंबर 2024 के बीच ही 10,140 से ज़्यादा किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिनमें ज़्यादातर ज़िंदा रिश्तेदारों द्वारा दिए गए थे। ऐसे में अगर सुअर की किडनी का विकल्प तैयार होता है, तो भारत जैसे देश में भी लाखों जानें बचाई जा सकेंगी।

Organ Transplant की कमी के बीच क्यों बढ़ी उम्मीद?

दुनिया में इंसानी अंगों की कमी ट्रांसप्लांट मेडिसिन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसी वजह से वैज्ञानिक वर्षों से xenotransplantation यानी जानवर के अंग को इंसान में लगाने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग ने इस रिसर्च को नई दिशा दी है। अब लक्ष्य सिर्फ जानवर के अंग को इंसान में लगाने का नहीं, बल्कि उसके जीन को इस तरह बदलने का है कि इंसानी शरीर उसे कम से कम रिजेक्ट करे। Massachusetts General Hospital की रिसर्च में गैर-मानवीय प्राइमेट्स में भी जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी को लंबे समय तक काम करते हुए देखा गया है। इससे मानव परीक्षणों की दिशा में आगे बढ़ने का आधार मिला है।

अभी क्या-क्या चुनौतियां बाकी हैं?

भले ही यह प्रयोग सफल रहा, लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि अभी सुअर की किडनी पूरी तरह इंसानी किडनी की जगह नहीं ले सकती। लंबे समय तक अंग को बनाए रखना, इंफेक्शन का डर और इम्यून सिस्टम का रिजेक्शन अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरीके को आम इलाज का हिस्सा बनाने से पहले अभी कई बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स करने होंगे। फिलहाल, इंसान का अंग दान करना ही सबसे बड़ा और सुरक्षित जरिया है, लेकिन भविष्य में सुअर की किडनी इस कमी को पूरा करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और वैज्ञानिक घटनाक्रम को समझाने के उद्देश्य से है। यह किसी भी तरह की चिकित्सकीय सलाह या डॉक्टर की राय का विकल्प नहीं है। किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह लें।