जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट प्रमुख यासीन मलिक ने 25 पेज के हलफनामे में पाकिस्तानी पत्नी मुशाल को तलाक देने और मौत की सजा की मांग की है। जानिए क्या है सरला भट हत्याकांड और SIA की 737 पन्नों की चार्जशीट का पूरा मामला।

Yasin Malik Divorce: जेल में बंद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक के 25 पेज के हलफनामे ने सरला भट हत्याकांड की कानूनी लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है। मलिक ने एक ओर 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है, तो दूसरी ओर उसने कहा है कि वह अब इस मुकदमे को आगे नहीं लड़ना चाहता और अपने लिए मौत की सजा की मांग कर रहा है। इतना ही नहीं, इसी हलफनामे में उसने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से वैवाहिक संबंध खत्म करने की इच्छा भी जताई है। सवाल यही है कि आखिर इस पूरे रुख के पीछे क्या रणनीति है?

Yasin Malik Affidavit: 25 पेज के हलफनामे में क्या कहा?

यासीन मलिक ने सरला भट हत्याकांड में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उसका दावा है कि जिस समय सरला भट की हत्या हुई, उस दौरान वह खुद गंभीर रूप से घायल था और अपराध में शामिल होने की स्थिति में नहीं था। मलिक के मुताबिक, अप्रैल 1990 में नरवारा इलाके में BSF की कार्रवाई के दौरान वह एक इमारत से गिर गया था। उसने दावा किया कि उसे गंभीर चोटें आईं और वह कोमा में चला गया था। उसके अनुसार, उस समय उसके निधन की खबरें तक प्रसारित हुई थीं। मलिक ने इसी दावे को आधार बनाकर सवाल उठाया है कि ऐसी हालत में वह सरला भट की हत्या की साजिश कैसे रच सकता था या किसी को निर्देश कैसे दे सकता था।

Sarla Bhat Murder Case: मलिक ने आरोपों को बताया साजिश

सरला भट मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी SIA ने 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी की जांच के आधार पर यासीन मलिक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि मलिक ने चार्जशीट के आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया है। उसने दावा किया है कि घटना के तीन दशक से अधिक समय बाद उसके खिलाफ कहानी तैयार की गई और उसे एक साजिश के तहत मामले में फंसाया गया। यानी इस समय अदालत के सामने दो अलग-अलग दावे हैं-अभियोजन पक्ष के पास जांच और चार्जशीट का आधार है, जबकि मलिक अपनी भूमिका से पूरी तरह इनकार कर रहा है। इन दावों की सच्चाई का अंतिम फैसला अदालत को उपलब्ध सबूतों के आधार पर करना है।

Death Penalty Demand: दोष नहीं माना, फिर मौत की सजा क्यों मांगी?

हलफनामे का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यासीन मलिक की मौत की सजा की मांग है। उसने कहा है कि वह अब इस मुकदमे की कार्यवाही को आगे चुनौती नहीं देना चाहता और अपने मामले को ईश्वर के हाथों में सौंप चुका है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी पेच है। मलिक ने स्पष्ट किया है कि मुकदमा आगे न लड़ने का उसका फैसला आरोपों या किसी अपराध को स्वीकार करना नहीं माना जाना चाहिए। यानी एक तरफ वह सरला भट हत्याकांड में अपनी भूमिका से इनकार करता है, दूसरी तरफ खुद के लिए फांसी की मांग करता है। यही विरोधाभास उसके हलफनामे को चर्चा के केंद्र में ले आया है।

Yasin Malik Wife Divorce: पाकिस्तानी पत्नी से क्यों खत्म कर रहे शादी?

इसी हलफनामे में मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से अलग होने की बात कही है। दोनों की शादी 2009 में हुई थी। मलिक का कहना है कि उसकी लंबी कैद और मौजूदा परिस्थितियों का असर उसकी पत्नी और परिवार पर पड़ रहा है। उसने भावनात्मक अंदाज में कहा है कि वह चाहता है कि उसकी पत्नी उसके कारण पैदा हुई परिस्थितियों के बोझ के बिना अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सके। यहां तक कि उसने फांसी की आशंका के बीच पत्नी को निकाह के बंधन से मुक्त करने की इच्छा भी जाहिर की है।

कौन हैं मुशाल हुसैन मलिक और पाकिस्तान का कनेक्शन?

मुशाल हुसैन मलिक पाकिस्तान से जुड़ी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। उपलब्ध पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, उनकी मुलाकात यासीन मलिक से 2005 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुई थी और दोनों ने 2009 में शादी की। मुशाल के बारे में यह भी बताया गया है कि उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पॉलिटिकल इकोनॉमी में पढ़ाई की है। 2023 में पाकिस्तान की तत्कालीन कार्यवाहक सरकार में उन्हें मानवाधिकार और महिला सशक्तिकरण से जुड़े मामलों में विशेष सलाहकार की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

Yasin Malik Victim Card: क्या खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश?

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। हलफनामे में मलिक ने अपनी कथित गंभीर चोट, लंबे समय से चली आ रही जेल, परिवार पर पड़ रहे असर, पत्नी से अलग होने और भारतीय एजेंसियों पर लगाए गए आरोपों को एक साथ सामने रखा है। इसी वजह से कुछ विश्लेषक इसे ‘विक्टिम नैरेटिव’ या ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर विश्लेषक और कॉलमनिस्ट अमाना बेगम अंसारी ने भी इसे नुकसान की भरपाई की कोशिश जैसा बताया है। हालांकि यह एक विश्लेषण है, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य नहीं। यासीन मलिक के इरादे को लेकर अंतिम निष्कर्ष केवल उसके हलफनामे के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।

Yasin Malik Cases: सरला भट केस के अलावा और कौन से मामले?

यासीन मलिक के खिलाफ सरला भट हत्याकांड के अलावा भी कई पुराने मामले रहे हैं। उस पर 1990 में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें चार जवानों की मौत हुई थी। 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का मामला भी उससे जुड़ा रहा है। इसके अलावा आतंकवाद की फंडिंग और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े मामले में 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उसे दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

SIA Chargesheet: 737 पन्नों की चार्जशीट में क्या है?

जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने सरला भट हत्याकांड में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। बीजेपी के जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता दानिश भट्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यासीन मलिक के पास इस मामले में चुनौती देने के लिए कुछ नहीं है और SIA की चार्जशीट मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारें दशकों तक सरला भट को न्याय नहीं दिला सकीं। हालांकि राजनीतिक दलों के दावों से अलग, किसी भी आपराधिक मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला अदालत ही करती है।

अब अदालत में क्या होगा?

यासीन मलिक का मुकदमा आगे न लड़ने का फैसला अपने आप सरला भट हत्याकांड को खत्म नहीं करता। उसकी ओर से आरोपों को स्वीकार न करने की बात साफ है, जबकि अभियोजन पक्ष के पास अपनी चार्जशीट और साक्ष्यों का आधार है। ऐसे में असली सवाल यह नहीं है कि मलिक अपनी पत्नी को तलाक क्यों देना चाहता है या वह खुद के लिए मौत की सजा क्यों मांग रहा है। असली सवाल यह है कि सरला भट हत्याकांड में उसके खिलाफ पेश किए गए सबूत अदालत की कसौटी पर कितने मजबूत साबित होते हैं। फिलहाल ‘विक्टिम कार्ड’, ‘डैमेज कंट्रोल’ या सहानुभूति जुटाने जैसे सवाल राजनीतिक और विश्लेषणात्मक बहस का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर निर्णायक सिर्फ अदालत का फैसला होगा।