Maharashtra Baby Girl: महाराष्ट्र के बीड़ में दहिफले परिवार के घर 200 साल बाद बेटी पैदा हुई। परली वैजनाथ की इस घटना में नवजात को रोशनी से सजे रथ में ढोल-ताशों, रंगोली और पटाखों के साथ घर लाया गया। दादा ने कहा- बेटियां बोझ नहीं, आशीर्वाद हैं।
Maharashtra News: जब किसी घर में दो सदियों यानी करीब 200 साल से कोई बेटी पैदा न हुई हो, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां नन्हीं परी के आने की खुशी किस कदर होगी। महाराष्ट्र के बीड़ जिले से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां के एक परिवार ने अपने घर में दो सौ साल बाद बेटी के जन्म पर ऐसा जश्न मनाया कि देखने वाले देखते रह गए। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर नवजात को आम गाड़ियों से नहीं, बल्कि रोशनी से चमचमाते रथ पर बिठाकर घर लाया गया।
परली वैजनाथ के अस्पताल से घर तक जश्न: ढोल-नगाड़े, रंगोली और आतिशबाजी
मामला परली वैजनाथ इलाके का है। यहां रहने वाले ऋषिकेश दहिफले की पत्नी कल्पना ने बीते 27 अगस्त को स्थानीय अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। जैसे ही डॉक्टर ने बेटी होने की खुशखबरी दी, पूरे परिवार और रिश्तेदारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मंगलवार को जब जच्चा-बच्चा को डिस्चार्ज मिला, तो परिवार ने स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी। बच्ची को एक खूबसूरत सजाए गए रथ में बिठाया गया। रास्ते भर ढोल-ताशे बजते रहे, आतिशबाजी होती रही और पड़ोसी-रिश्तेदार सड़क पर झूमते चले। जब रथ इंदिरा नगर स्थित घर पहुंचा, तो मुख्य दरवाजे पर फूलों की सजावट, रंगोली और गुब्बारों के बीच आरती उतारकर नन्हीं परी का गृह प्रवेश कराया गया।
2 सदी से चली आ रही कमी पूरी हुई: हेडमास्टर दादा बोले- 'बेटियां आशीर्वाद हैं'
बच्ची के दादा लिम्बाजी दहिफले, जो कि भगवान प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर हैं, उन्होंने इस मौके पर अपनी भावनाएं जाहिर कीं। उन्होंने बताया कि उनके सीधे वंश (पैतृक lineage) में पिछले 200 सालों से किसी बेटी ने जन्म नहीं लिया था। हर बार बेटे ही होते आए। इस बार जब पोती घर आई, तो दो सौ साल की यह कमी पूरी हो गई। लिम्बाजी दहिफले का कहना है कि समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है-"बेटियां कभी बोझ नहीं होतीं, वे ईश्वर का आशीर्वाद हैं। जब घर में लड़का होने पर जश्न मनाया जा सकता है, तो बेटी के जन्म पर उससे कम खुशियां क्यों मनाई जाएं?" इस खास मौके की खुशी में पूरे इलाके में जलेबियां बांटी गईं और लोगों ने परिवार को ढेरों बधाइयां दीं।


