नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर टनल में 40 कर्मचारी 6 दिन से फंसे हैं। इंजीनियर की पत्नी ने सरकारी दावों की पोल खोलते हुए रेस्क्यू में देरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

Nepal Flood Rescue: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही को एक हफ़्ता बीत चुका है, लेकिन ज़मीन के सैकड़ों फीट नीचे बनी सुरंगों में फंसे लोगों के लिए मदद की किरण अब तक नहीं पहुंची है। सरकार और राहत एजेंसियों के लंबे-चौड़े दावों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रसुवा जिले के त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग में नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) के कम से कम 40 कर्मचारी छह दिनों से फंसे हुए हैं। उनके परिवार वाले पल-पल घुट रहे हैं और अब उनका सब्र जवाब देने लगा है। प्रोजेक्ट में फंसे एक भारतीय/नेपाली इंजीनियर की पत्नी ने सरकारी लापरवाही पर तीखे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी दफ़्तरों और सेना के चक्कर काट-काटकर परिवार वाले थक चुके हैं, लेकिन अंदर फंसे अपनों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।

'मीडिया में बड़ी-बड़ी बातें, लेकिन मौके पर एक JCB तक नहीं पहुंची'

इंजीनियर की पत्नी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "हमें बताया गया था कि यह देश का सबसे सुरक्षित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है। इसी एक उम्मीद के सहारे हम अब तक टिके हुए हैं कि वे अंदर सुरक्षित होंगे। लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी सरकार का रवैया बेहद ढीला है। मीडिया में खबरें आ रही हैं कि भारत और चीन की टीमें रेस्क्यू के लिए पहुंच गई हैं, मंत्री दौरा कर रहे हैं... लेकिन सच तो यह है कि घटनास्थल पर आज तक एक JCB या टनल कटर तक नहीं पहुंचा है।" उन्होंने रोते हुए सवाल किया कि क्या 40 जिंदगियों की सरकार की नज़र में कोई अहमियत नहीं है? उन्होंने कहा, "हर दिन कहा जाता है कि आज रेस्क्यू होगा, कल होगा। परिवार वाले इसी झूठी उम्मीद में जी रहे हैं। अब तो हर घंटा पहाड़ जैसा भारी लग रहा है। क्या हमें अपने अपनों की जान बचाने के लिए मीडिया के सामने आकर भीख मांगनी पड़ेगी? वे वहां अपने किसी निजी काम से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के काम के लिए गए थे।"

सदमे में परिवार, कई लोग अस्पताल में भर्ती

सुरंग में फंसे कर्मचारियों के परिजनों की मानसिक हालत बिगड़ती जा रही है। कई कर्मचारी के रिश्तेदार इस कदर सदमे में हैं कि वे अपनी बात तक नहीं रख पा रहे हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। परिजनों का आरोप है कि सरकार सुरंग के अंदर रेस्क्यू के नाम पर सिर्फ आंकड़ों का खेल खेल रही है और 40 परिवारों के दर्द को मज़ाक बनाकर रख दिया गया है।

नेपाल आपदा में भारी तबाही: 1000 से ज्यादा मौतें, 1000 वर्कर लापता

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा ने भीषण तबाही मचाई है। पूरे देश में अब तक 1,093 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें से सबसे बड़ा आंकड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले मजदूरों का है, जिनकी संख्या करीब 1,000 के आसपास है।

अलग-अलग प्रोजेक्ट्स का आंकड़ा देखें तो स्थिति बेहद भयावह नजर आती है:

  • अपर त्रिशूली-1 (216 MW): अकेले इस प्रोजेक्ट से 557 से ज्यादा लोग लापता हैं। हालांकि 254 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था।
  • अपर त्रिशूली-3B (37 MW): यहां 122 कर्मचारियों के लापता होने की आशंका है, जहां नेपाली सेना और चीनी विशेषज्ञ रेस्क्यू में लगे हैं।
  • रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: यहां 93 कर्मचारियों का कोई सुराग नहीं मिला है।
  • लांगटांग खोला (20 MW): कम से कम 41 कर्मचारी लापता हैं।
  • चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (22 MW): 8 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
  • मैलुंग खोला (14.1 MW): 7 कर्मचारी गायब हैं, जहां दक्षिण कोरिया की टीमें हवाई सर्वे कर रही हैं।
  • अन्य प्रोजेक्ट्स: रासुवा-भोटेकोशी (4), मिडिल त्रिशूली गंगा (2), त्रिशूली और देवीघाट प्रोजेक्ट से 1-1 व्यक्ति लापता है।

फिलहाल, अपनों की वापसी की आस में सैकड़ों परिवार बदहवास हालत में राहत अभियानों की गति तेज होने का इंतजार कर रहे हैं।