Swatantra Bhardwaj Case में वायरल पॉडकास्ट के बाद CJP ने कड़ी धाराओं की मांग की है। जानिए Jantar Mantar Protest की FIR, 307-326 का मतलब, SC/ST Act की मांग और Delhi Police का जवाब।
Swatantra Bhardwaj Controvers: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान का एक मामला अचानक से फिर गर्म हो गया है। वजह बना है एक वायरल पॉडकास्ट, जिसमें खुद को इन्फ्लुएंसर बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को बेझिझक यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने CJP आंदोलन के दौरान एक छात्र प्रदर्शनकारी के पिता का 'सिर फोड़ दिया' था। हद तो तब हो गई जब उन्होंने वीडियो में यह तक दावा कर दिया कि अपनी राजनीतिक पहुंच के कारण उन्हें जेल भी नहीं जाना पड़ा। अब इस बयान के सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी नेता भड़क गए हैं। पार्टी का कहना है कि इतने खुले कुबूलनामे के बाद भी आरोपी बाहर कैसे घूम रहा है?
Swatantra Bhardwaj Podcast Controversy: आखिर क्या है जंतर-मंतर की पूरी घटना?
मामला 23 जून का बताया जा रहा है, जब जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का एक बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान पटना के रहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप लगा कि उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्र के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की। उस समय पुलिस ने भारद्वाज को हिरासत में तो लिया, लेकिन बाद में छोड़ दिया। अब जब पॉडकास्ट में भारद्वाज ने यह दावा किया कि बीजेपी के बड़े नेताओं से अपने संपर्कों के चलते वे गिरफ्तारी से बच निकले, तो मामला फिर तूल पकड़ गया। CJP के को-कन्वीनर सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और तुरंत गिरफ्तारी की मांग रखी। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से सफाई आई है कि मेडिकल रिपोर्ट के हिसाब से चोटें ज्यादा गंभीर नहीं थीं। साथ ही पुलिस का कहना है कि वे इस वायरल पॉडकास्ट को भी जांच का हिस्सा बना रहे हैं और FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं, क्योंकि पीड़ित परिवार दलित समुदाय से ताल्लुक रखता है।
CJP की मांग: FIR में 307 और 326 क्यों जोड़ी जाए?
CJP का कहना है कि संजय कुमार को लगी चोट और हमले की परिस्थितियों को देखते हुए मामले में ज्यादा गंभीर धाराएं लगनी चाहिए। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस से हत्या की कोशिश और गंभीर चोट से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने की मांग की है। संगठन ने SC/ST Act लगाने की भी मांग की है और आरोप लगाया है कि मामले में जातिगत पहलू मौजूद है, क्योंकि घायल व्यक्ति और उनका परिवार दलित समुदाय से है। यहां एक कानूनी बात समझना जरूरी है। घटना 2026 की है, इसलिए FIR में मौजूदा कानून यानी Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) के प्रावधान लागू होते हैं। पुराने IPC की धारा 307, यानी attempt to murder, का मौजूदा समकक्ष BNS की धारा 109 है। इसी तरह IPC की धारा 326 से जुड़ा प्रावधान BNS की धारा 118(2) में आता है।
IPC 307 यानी हत्या की कोशिश क्या थी?
IPC की धारा 307 पुराने कानून में हत्या की कोशिश यानी attempt to murder से जुड़ी थी। अब इसी अपराध का प्रावधान BNS की धारा 109 में है। इसमें सिर्फ चोट लगना ही निर्णायक नहीं होता। पुलिस और अदालत यह देखती हैं कि आरोपी का कथित इरादा या जानकारी क्या थी और हमला किन परिस्थितियों में किया गया। हथियार या वस्तु का इस्तेमाल, शरीर के किस हिस्से पर हमला हुआ और हमले का तरीका जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। BNS की धारा 109 के तहत सामान्य स्थिति में सजा 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकती है। अगर ऐसे कृत्य से चोट पहुंचती है, तो आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। यानी किसी मामले में सिर्फ यह कह देना कि चोट लगी है, अपने आप में attempt to murder साबित नहीं करता। कथित हमले के पीछे इरादा और परिस्थितियां भी कानूनी जांच का हिस्सा होती हैं।
IPC 326 क्या था और अब कौन-सी धारा लागू होती है?
IPC की धारा 326 खतरनाक हथियार या साधन से जान-बूझकर गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित थी। अब इसका संबंधित प्रावधान BNS की धारा 118(2) में है। BNS 118 में खतरनाक हथियार या साधनों से चोट पहुंचाने के मामलों को शामिल किया गया है। इसमें ऐसे उपकरण या साधन शामिल हैं जिनका इस्तेमाल गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। अगर गंभीर चोट यानी grievous hurt ऐसे खतरनाक साधन से पहुंचाई जाती है, तो BNS 118(2) के तहत उम्रकैद या कम से कम एक साल से लेकर 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। यही वजह है कि CJP मामले में 326 जैसे पुराने IPC प्रावधान का हवाला देते हुए मौजूदा कानून के तहत कड़े प्रावधान की मांग कर रहा है।
SC/ST Act की मांग क्यों उठी?
CJP ने मामले में SC/ST Act लागू करने की मांग भी की है। संगठन का आरोप है कि घायल संजय कुमार दलित समुदाय से हैं और इसलिए घटना में जातिगत पहलू की भी जांच होनी चाहिए। CJP के नेताओं ने पुलिस पर इस पहलू को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस आरोप की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।
Delhi Police on Swatantra Bhardwaj: पुलिस का रुख और आगे क्या होगा?
एक तरफ CJP का आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में ढील दे रही है और मामले को हल्का बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि वे कानून और मेडिकल साक्ष्यों के हिसाब से ही कदम उठा रहे हैं। फिलहाल, वायरल वीडियो के बाद मामला काफी गरमा चुका है और आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई और तेज होने के आसार हैं।


