कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के भीतर ही उनके फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक और प्रशासनिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस अब उनके खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में है।
नई दिल्ली : कांग्रेस ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अब अपने पद पर बने रहने का प्रशासनिक और नैतिक अधिकार खो चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग के उनके दो साथियों ने ही उनकी पोल खोल दी है। अब विपक्षी दल CEC के खिलाफ महाभियोग (impeachment) लाने की तैयारी कर रहे हैं।
कौन हैं चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?
- ज्ञानेश कुमार, 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं।
- मार्च 2023 में चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए थे।
- ज्ञानेश कुमार ने आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक (B.Tech) किया है।
- वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) से भी पढ़ाई किए हैं।
क्या क्या जिम्मेदारियां निभा चुके हैं ज्ञानेश कुमार
- देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, गृहमंत्रालय (Home Ministry) में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
- उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने (Article 370 ) और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के ड्राफ्टिंग में अहम भूमिका निभाई थी।
- वह राम मंदिर केस (Ram Mandir Case) से जुड़े कानूनी दस्तावेजों को भी संभालने के लिए जाने जाते हैं।
- वह अमित शाह के सहकारिता मंत्रालय (Cooperation Ministry) में सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं।
वो कौन सी रिपोर्ट जिसके बाद हुआ बड़ा खुलासा?
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार सरकार के इशारे पर काम करने वाले एक मोहरे की तरह बर्ताव कर रहे हैं।
- दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रेगुलेशन (SIR) प्रक्रिया पर लिए गए फैसलों का तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने विरोध किया था।
- रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जो उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे।


