Yemen में Houthis और सरकारी सेना के बीच भीषण लड़ाई में 81 लड़ाकों की मौत हुई। हूथी Bab al-Mandab के करीब बढ़ रहे हैं। जानिए Red Sea, Saudi Arabia और अहम Shipping Route पर इसका क्या असर होगा।

Yemen Houthis: यमन से एक बार फिर बहुत ही परेशान करने वाली खबर आ रही है। वहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकारी सेना के बीच अचानक भीषण झड़पें शुरू हो गई हैं। शुक्रवार को मिली सैन्य और मेडिकल रिपोर्ट बताती हैं कि इस ताज़ा लड़ाई में करीब 81 लोग मारे जा चुके हैं। असल चिंता की बात यह है कि हूती विद्रोही लगातार उस इलाके की तरफ पैर पसार रहे हैं जो लाल सागर (रेड सी) का सबसे संकरा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री रास्ता माना जाता है।

Yemen Houthi Red Sea Clashes: कैसे शुरू हुई यह ताज़ा लड़ाई?

सबकी शुरुआत गुरुवार से हुई। हूती विद्रोहियों ने तटीय इलाकों को निशाना बनाकर एक साथ ज़मीनी हमला बोला, जिसमें रॉकेट्स और आत्मघाती ड्रोन्स का जमकर इस्तेमाल किया गया। उनका सीधा लक्ष्य लाल सागर के दक्षिणी छोर पर मौजूद बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य पर किसी तरह अपनी पकड़ जमाना है। पिछले कुछ हफ्तों से वैसे भी हूती इस रास्ते से गुजरने वाले सऊदी अरब के तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। असल में, जब से ईरान ने होर्मुज की खाड़ी वाले रास्ते को प्रभावित किया है, तब से खाड़ी देशों से तेल निकालने और भेजने के लिए रेड सी ही एकमात्र सबसे बड़ा और सुरक्षित विकल्प बचा था। लेकिन अब विद्रोही दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक को पूरी तरह ठप करने पर आमादा दिख रहे हैं।

Scroll to load tweet…

Mokha Port and Taiz Battle: ज़मीन पर क्या हैं हालात और कितना हुआ नुकसान?

सैन्य सूत्रों का कहना है कि हूतियों का पूरा प्लान सरकार के नियंत्रण वाले बंदरगाह शहर 'मोखा' को बाकी हिस्से से अलग-थलग करने का है। मोखा पर पिछले कई हफ्तों से लगातार छोटे-बड़े हमले हो ही रहे थे, पर अब वे बाब अल-मंदेब से सटे इलाकों को घेर रहे हैं। ताइज़ (Taiz) के एक स्थानीय अधिकारी और सैन्य सूत्रों ने बताया कि विद्रोहियों ने तटीय शहर खोखा और अंदरूनी ताइज़ शहर के ऊपर स्थित कई ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। यह बेहद खतरनाक स्थिति है, क्योंकि इन पहाड़ियों पर बैठकर हूती बड़ी आसानी से नीचे समुद्र में तैरते जहाजों को अपनी मिसाइलों या तोपों से निशाना बना सकते हैं।

इस झड़प में दोनों पक्षों को भारी नुकसान पहुंचा है:

  • सरकारी सेना: तट पर तैनात अधिकारियों के मुताबिक उनके 24 जवान शहीद हुए हैं, जबकि ताइज़ इलाके में 15 और सैनिकों की जान गई है।
  • हूती विद्रोही: हूती नियंत्रण वाले इलाकों के अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, कम से कम 42 हूती लड़ाके भी इस दौरान मारे गए हैं।

Bab al-Mandeb Strait Strategic Value: सऊदी अरब ने भेजी अतिरिक्त सेना, क्यों खास है यह रास्ता?

अदन में बैठी यमन सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि तटीय इलाकों पर बड़े हमले से पहले हूतियों की नज़र बाब अल-मंदाब और मोखा के आसपास की ऊंची पहाड़ियों पर ही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब के निर्देश पर अदन से ताइज़ के लिए फौरन अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां (Reinforcements) रवाना की गई हैं। जब से ईरान की तरफ से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने जैसी स्थिति बनी है, तब से बाब अल-मंदाब का महत्व कई गुना बढ़ गया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर निकलता है। यह एक ऐसा संकरा समुद्री रास्ता है जो लाल सागर और स्वेज़ नहर को सीधे हिंद महासागर से जोड़ता है।

Yemen Conflict: टूटा संघर्ष-विराम, फिर तेज हुई लड़ाई

हालांकि हूती अभी बाब अल-मंदाब के बिल्कुल मुहाने पर पूरी तरह काबिज़ नहीं हैं, लेकिन उत्तर में मौजूद बड़े बंदरगाह शहर 'होदेइदाह' पर उनका पहले से ही कड़ा नियंत्रण है। जुलाई के महीने में दोनों पक्षों के बीच बना सीजफायर तब पूरी तरह टूट गया था, जब विद्रोहियों ने सना (Sanaa) में ईरान से आए एक विमान का स्वागत किया था। इसके बाद से ही हूतियों ने सऊदी जहाजों की नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया था। पिछले एक दशक से अंदरूनी गृहयुद्ध में झुलस रहा यमन अब सीधे-सीधे पूरे मिडिल ईस्ट के बड़े क्षेत्रीय युद्ध की लपटों में घिरता नज़र आ रहा है।