UPSC की तैयारी के दौरान लगी चोट तो 8 महीने बेड पर रहा, फिर भी अफसर बन गया यह शख्स

Published : Feb 14, 2020, 05:41 PM ISTUpdated : Feb 14, 2020, 06:37 PM IST

करियर डेस्क. फरवरी में CBSE बोर्ड के साथ अन्य बोर्ड के एग्जाम भी स्टार्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही बैंक, रेलवे, इंजीनियरिंग, IAS-IPS के साथ राज्य स्तरीय नौकरियों के लिए अप्लाई करने वाले  स्टूडेंट्स प्रोसेस, एग्जाम, पेपर का पैटर्न, तैयारी के सही टिप्स को लेकर कन्फ्यूज रहते है। यह भी देखा जाता है कि रिजल्ट को लेकर बहुत सारे छात्र-छात्राएं निराशा और हताशा की तरफ बढ़ जाते हैं। इन सबको ध्यान में रखते हुए एशिया नेट न्यूज हिंदी ''कर EXAM फतह...'' सीरीज चला रहा है। इसमें हम अलग-अलग सब्जेक्ट के एक्सपर्ट, IAS-IPS के साथ अन्य बड़े स्तर पर बैठे ऑफीसर्स की सक्सेज स्टोरीज, डॉक्टर्स के बेहतरीन टिप्स बताएंगे। इस कड़ी में आज हम आपको 2018 बैच के इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज( IES) अफसर वैभव छाबरा की कहानी बताने जा रहे हैं। 

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UPSC की तैयारी के दौरान लगी चोट तो 8 महीने बेड पर रहा, फिर भी अफसर बन गया यह शख्स
वैभव मूलतः राजधानी दिल्ली के रहने वाले हैं। वह समान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वैभव की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से ही हुई। उनकी पढ़ाई में कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी। शुरुआत में वह पढ़ने में ठीक थे लेकिन धीरे-धीरे मन पढ़ाई से दूर होता गया।
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वैभव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंस्टीट्यूट से बीटेक किया। लेकिन उनके मार्क्स कुछ खास अच्छे नहीं रहे। उन्हें बीटेक में केवल 56 प्रतिशत मार्क्स ही मिले। इससे उनके मन में और अधिक नकारात्मक चीजें आ गयी। वह नर्वस हो गए।
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उन्होंने अंत में दिल्ली के ही एक कोचिंग में पढ़ाना शुरू कर दिया। हांलाकि वहां उनकी सैलरी अच्छी थी। वैभव बताते हैं एक दिन अचानक मेरे में में ख्याल आया कि जो काम मै कर रहा हूँ ये मेरे लिए नहीं है। मुझे IAS बनना है। लेकिन बीटेक में मेरे मार्क्स इतने कम थे कि मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।
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"मैंने ये बात अपने परिवार वालों व अच्छे दोस्तों को बताई। सभी ने मेरा उत्साह बढ़ाया। लेकिन कुछ और लोग भी थे जिन्होंने ये कहा कि ऐसी चीज के लिए अच्छी नौकरी छोड़ना जिसकी कोई गारंटी नहीं है वो ठीक नहीं है। मेरे मन में कुछ तो उथल-पुथल हुई लेकिन मैंने साहस नहीं छोड़ा। मैने नौकरी से रिजाइन कर दिया। "
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"अब मै IES की तैयारी में लग गया। लेकिन मेरा मन पढ़ने में बिलकुल भी नहीं लगता था। मै चाह कर भी लगातार 1 घंटे भी नहीं पढ़ पाता था। लेकिन फिर मैंने इसका हल भी निकाल लिया। मै आधा घंटे पढ़ाई करने के बाद 15 मिनट रेस्ट करता था। धीरे-धीरे पढ़ाई का समय बढ़ता गया और मै 1 घंटे फिर 2 घंटे से 8 घंटे तक पढ़ने लगा। मैं पढ़ाई के दौरान बोर न हो जाऊं इसके लिए मै पढ़ाई पूरी करने के बाद थोड़ा इंटरटेनमेंट करता था। जैसे टीवी देखना,गेम खेलना आदि। हांलाकि इस तरह सिविल सर्विस की वेकेंसी आ गई।"
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''मैंने भी फॉर्म भरा। मैंने खूब तैयारी की। लेकिन पहली बार होने के कारण मुझे एग्जाम का अंदाजा नहीं था। कोई ज्यादा समझाने वाला भी नहीं था। ऐसे में मै मेंस तक पहुंचने के बाद रिजेक्ट हो गया। मै टूट सा गया। उस समय मैंने सोचा कि कोचिंग की जॉब फिर से शुरू कर लूँ। लेकिन मेरे अपनों में मेरा हौसला बढ़ाया और फिर से तैयारी में लग गया। ''
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"इस दौरान BSNL में वेकेंसी आई और मेरा सिलेक्शन हो गया। लेकिन वह नौकरी क्लास 2 अफसर की थी। मैंने टीचिंग की जॉब IES बनने के लिए छोड़ी थी। हांलाकि मै नौकरी करने लगा। लेकिन इस दौरान मैंने पढ़ाई भी जारी रखी। साल 2018 में फिर से UPSC की वेकेंसी आई और मैने फॉर्म भरा। लेकिन मेरे साथ एक दुर्घटना हो गई। जिसकी वजह से मेरी पीठ में काफी ज्यादा चोट लग गई। नतीजन मै लगभग 10 महीने तक बिस्तर पर रहा। लेकिन उस दौरान भी मेरी पढ़ाई लेट कर जारी रही। लेकिन इस मेहनत का फल मुझे मिला और मै सिलेक्ट हो गया। मुझे 32 वीं रैंक मिली। अब मै दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय में तैनात हूं।"

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