Published : Jul 07, 2021, 06:19 PM ISTUpdated : Jul 07, 2021, 06:35 PM IST
मुंबई। बॉलीवुड के ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार (Dilip Kumar) ने 98 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बुधवार को दिलीप साहब ने अंतिम सांस ली। दिलीप कुमार के निधन पर बॉलीवुड से लेकर राजनीतिक जगत की तमाम हस्तियों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। दिलीप कुमार को उनके गंभीर अभिनय के साथ ही साथ जबर्दस्त डायलॉग डिलिवरी के लिए भी जाना जाता था। दिलीप साहब की फिल्मों में एक से बढ़कर एक डायलॉग हैं, जो आज भी लोगों को मुंहजबानी याद हैं। इस पैकेज में हम बता रहे हैं उनके कुछ फेमस Dialogues.
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने 98 साल की उम्र में 7 जुलाई को सुबह साढ़े 7 बजे अंतिम सांस ली।
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दिलीप कुमार की तबीयत लंबे समय से ठीक नहीं थी। उन्हें कई बार हॉस्पिटल में भी भर्ती करना पड़ा। उन्हें पिछले एक महीने में दो बार अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भी दिलीप कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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दिलीप कुमार ने अपने 5 दशक के करियर में करीब 60 फिल्मों में काम किया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर में कई फिल्में सिर्फ इसलिए ठुकरा दी थीं, क्योंकि उन्हें लगता था कि फिल्में भले ही कम हों, लेकिन बेहतर हों।
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दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई नासिक के पास देवलाली से की थी। 22 साल की उम्र में दिलीप कुमार को पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' मिल गई थी।
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दिलीप कुमार मशहूर फिल्म निर्माण संस्था बॉम्बे टॉकीज की देन हैं, जहां देविका रानी ने उन्हें पहली बार काम दिया था। यहीं से उन्होंने यूसुफ सरवर खान से बदलकर अपना नाम दिलीप कुमार रख लिया था।
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अपने पांच दशक लंबे करियर में के करियर में दिलीप साहब ने कई अवॉर्ड्स जीते थे। इसमें 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (बेस्ट एक्टर) शामिल हैं।
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दिलीप कुमार को पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड 1954 में फिल्म दाग के लिए मिला था। इसके बाद 1956 में फिल्म आजाद के लिए, 1957 में फिल्म देवदास के लिए, 1958 में फिल्म नया दौर के लिए, 1961 में फिल्म कोहिनूर के लिए, 1965 में फिल्म लीडर के लिए और 1968 में फिल्म राम और श्याम के लिए मिला था।
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दिलीप कुमार को 1991 में पद्मभूषण, 1994 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, 1998 में निशान-ए-इम्तियाज, 2008 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, 2015 में पद्मविभूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
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दिलीप साहब को 1995 में फिल्म के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया। इतना ही नहीं, पाकिस्तान सरकार ने भी उन्हें 1997 में 'निशान-ए-इम्तियाज' से दिया, जो वहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
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उनकी कुछ हिट फिल्मों में 'ज्वार भाटा' (1944), 'अंदाज' (1949), 'आन' (1952), 'देवदास' (1955), 'आजाद' (1955), 'मुगल-ए-आजम' (1960), 'गंगा जमुना' (1961), 'क्रान्ति' (1981), 'कर्मा' (1986) और 'सौदागर' (1991) शामिल हैं।
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