नक्सली हमले की सबसे मार्मिक तस्वीर: बेटे को गोद में लिए खिला रही थी पत्नी, तभी आ गई पति की शहादत की खबर

Published : Apr 05, 2021, 04:32 PM ISTUpdated : Apr 05, 2021, 04:53 PM IST

गरियाबंद (छत्तीसगढ़) . शनिवार को बीजापुर के जंगल में हुए नक्सलियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में 23 जवान शहीद हो गए। इस नक्सली हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। किसी का बेटा तो किसी का पति शहीद हो गया। शहादत की खबर राज्य सरकार और फोर्स ने परिवार के लोगों तक पहुंचा दी है। जिसके बाद से कई मार्मिक कहानियां सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक रूला देने वाली कहानी गरियाबंद से सामने आई है। जहां शहीद की पत्नी अपने एक साल के बेटे को गोद में लेकर खिला रही थी। इसी दौरान उसे पति की शहादत की खबर मिली तो वह दहाड़ मारकर रोने लगी। मां को रोता देख मासूम बेटा भी चीखने लगा। आइए जानते हैं इस वीर सपूत की पूरी काहनी...

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नक्सली हमले की सबसे मार्मिक तस्वीर: बेटे को गोद में लिए खिला रही थी पत्नी, तभी आ गई पति की शहादत की खबर


दरअस, यह कहानी है गरियाबंद जिले के मौहदा गांव के रहने वाले एसटीएफ जवान सुखराम फरस की है। जो देश और अपने साथियों की रक्षा करते-करते शहीद हो गए। जवान के जाने के बाद उनके परिवार में इस वक्त मातम की चीखें सुनाई दे रही हैं। कच्चे घर के एक कोने में बुजुर्ग पिता और मां बैठेकर रो रहे हैं तो वहीं छोटे भाई के आंसू थमने के नाम नहीं ल रहे हैं। लेकिन सबसे दुखद कहानी जवान की पत्नी की है, जो अपने मासूम बेटे को गोद में लिए बिलख रही है। वह कभी उसको चुप कराती तो कभी खुद दहाड़ मारकर रोने लगती।

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सुखराम फरस की डेढ़ साल पहले ही शादी हुई थी और एक साल पहले उनके घर बच्चे ने जन्म लिया था। पति-पत्नी अपने छोटे से परिवार के बाद बेहद खुश थे। एक दिन पहले ही उनके बच्चे की किलकारी गूंजती थी। लेकिन इस वक्त चीख-पुकार के अलावा कुछ सुनाई नहीं दे रहा है। आस पड़ोस और रिश्तेदार सांत्वना दिए जा रहे हैं। परिवार के लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उनकी खुशियां कैसे छिन गईं। लोग शहीद की पत्नी को समझाने में लगे हुए हैं, वह पति को याद कर बार-बार बेसुध हो जा रही है।

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जवान के पिता फागुराम को जब पता चला कि उनका बेटा सुखराम नक्सली हमले में शहीद हो गया है तो वह आंगन में मौन बैठे रहे। वह कुछ बोल नहीं पा रहे थे। आखिर पत्नी और बहू को क्या कहें। लेकिन कुछ देर बाद न्यूज में आई खबर ने सब बता दिया। लोग सांत्वाना देने के लिए वहां पहुंच रहे थे। 

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वहीं शहीद की मां भी एक कमरे में बैठ रोए जा रही थीं। गांव के लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह किसको चुप कराएं। जवान की पत्नी या मां को। वह दोनों बार-बार सुखराम फरस का नाम लेकर चीत्कारें भरे जा रहीं थीं। जो कोई इस सीन को देख रहा था वह भी अपने आंसू नहीं रोक पाया।
 

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सुखराम फरस  2016 में एसटीएफ भर्ती हुए थे और फिलहाल बस्तर इलाके में अपनी सेवा दे रहे थे। पिता की 6 संतानों में वह तीसने नंबर के थे। सोमवार शाम तक उनका पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम में पहुंचने की संभावना है। जिसके बाद पूरे सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
 

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