उत्तराखंड की 10 बड़ी सीटों का रिजल्ट : सीएम पुष्कर धामी खटीमा से हारे, हरीश रावत भी नहीं बचा पाए अपनी सीट

Published : Mar 10, 2022, 08:10 AM ISTUpdated : Mar 10, 2022, 11:17 PM IST

भाजपा का उत्तराखंड में सरकार बनाना तय हो गया है, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर धामी खटीमा से चुनाव हार गए हैं। इसके अलावा हरीश रावत खुद लालकुआं से चुनाव हार गए हैं। रावत को भाजपा के मोहन बिष्ट ने 14 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया है। हालांकि रावत की बेटी अनुपमा रावत ने हरिद्वार ग्रामीण सीट पर करीब 6000 वोट से भाजपा के यतीश्वरानंद को शिकस्त दी है। यतीश्वरानंद ने 2017 में इस सीट पर हरीश रावत को हराया था। बता दें कि उत्तराखंड में भाजपा ने 70 सीट में 48 सीटों पर बढ़त बना रखी है, वहीं कांग्रेस 18 सीटों पर आगे चल रही है। आइए जानते हैं उत्तराखंड की 10 VIP सीटों का क्या है हाल।

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उत्तराखंड की 10 बड़ी सीटों का रिजल्ट :  सीएम पुष्कर धामी खटीमा से हारे, हरीश रावत भी नहीं बचा पाए अपनी सीट

खटीमा विधानसभा सीट

यूपी के सीएम रहे पुष्कर सिंह धामी खटीमा से चुनाव हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस के भुवन कापड़ी ने करीब 7 हजार वोटों से शिकस्त दी। उधमसिंह नगर जिले की खटीमा विधानसभा सबसे VIP सीटों में से एक है। 2017 में धामी ने कापड़ी को हराया था। धामी यहां से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले 2012 और 2017 में जीत दर्ज की थी। सीएम की सीट होने के कारण सभी की निगाहें इसके परिणाम पर टिकी थीं। खटीमा की पहचान देश के एकमात्र मगरमच्छ पार्क को लेकर भी है।

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लालकुआं विधानसभा सीट

हरीश रावत नैनीताल जिले की लालकुआं सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के मोहन बिष्ट से 14 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी है। ये सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। पहला चुनाव 2012 में हुआ और निर्दलीय प्रत्याशी हरीश चंद्र दुर्गापाल जीते थे। 2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा के नवीन दुम्का जीते थे। यहां हर चुनाव में मतदाता विधायक बदलते हैं। पिछले दोनों चुनाव में यहां कांग्रेस को बड़ी बगावत का सामना करना पड़ा है। लालकुंआ विधानसभा क्षेत्र हलद्वानी शहर से लगा है और इसी सीट के अंतर्गत उत्तराखंड का सबसे बड़ा गांव बिंदुखत्ता भी आता है।

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हरिद्वार विधानसभा सीट
हरिद्वार विधानसभा सीट से बीजेपी के मदन कौशिक चुनाव जीत गए हैं। कौशिक ने कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी को करीब 15 हजार वोटों से शिकस्त दी। इस सीट पर पिछले 20 सालों से लगातार बीजेपी का कब्‍जा बना हुआ है। इसके पीछे मुख्य वजह बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष मदन कौश‍िक हैं। वे इस सीट से लगातार चार चुनाव जीत चुके हैं। कौशिक ने सतपाल ब्रह्मचारी को 2012 के चुनाव में भी हराया था। 2017 में कांग्रेस से ब्रह्मस्‍वरूप ब्रह्मचारी लड़े थे। यहां सबसे ज्यादा 35 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं। जबकि दूसरे नंबर पर पंजाबी समाज के 20 फ़ीसदी, ठाकुर 15 और वैश्य समुदाय के 10 फीसदी वोटर्स हैं।

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श्रीनगर विधानसभा सीट

पौड़ी गढ़वाल जिले की श्रीनगर सीट का परिणाम सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चार चुनावों में यहां बारी-बारी से भाजपा-कांग्रेस ने जीत दर्ज की। यह सीट 2002 और 2007 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट रही। जबकि 2012 से सामान्य सीट है। यहां 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा से डॉ. धन सिंह रावत ने कांग्रेस के गणेश गोदियाल को हराया था। रावत उत्तराखंड सरकार में (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री हैं। जबकि गणेश गोदियाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। रावत 2017 में श्रीनगर से पहली बार विधायक बने थे। 2012 में कांग्रेस से गणेश गोदियाल ने भाजपा के डॉ. धन सिंह रावत को हराया था। इससे पहले यहां 2007 में भाजपा से बृजमोहन कोतवाल ने कांग्रेस के सुंदर लाल मंद्रवाल को हराया था। वहीं, 2002 में कांग्रेस से सुंदर लाल मंद्रवाल ने जीत दर्ज की थी।

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चकराता विधानसभा सीट

देहरादून जिले की चकराता सीट से कांग्रेस के प्रीतम सिंह जीत गए हैं। उन्होंने बीजेपी के रामशरण नौटियाल को करीब 9 हजार वोटों से शिकस्त दी। बता दें कि रामशरण नौटियाल बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता हैं। पिछले चार चुनाव (2002, 2007, 2012 और 2017) से प्रीतम सिंह यहां से लगातार जीतते आ रहे हैं। इससे पहले 1996 के चुनाव में भी प्रीतम स‍िंह ने मुन्‍ना सिंह चौहान को शि‍कस्‍त दी थी। प्रीतम 5 बार के विधायक हैं।

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गंगोत्री विधानसभा सीट

गंगोत्री सीट से आप के अजय कोठियाल चुनाव हार गए हैं। यहां से बीजेपी के सुरेश सिंह चौहान ने उन्हें भारी मतों से हरा दिया है। इस बार चुनाव में उत्तर काशी जिले की गंगोत्री सीट वीआईपी हो गई थी। क्योंकि यहां से आम आदमी पार्टी के सीएम फेस कर्नल अजय कोठियाल (सेवानिवृत्त) चुनावी मैदान में थे। यहां भाजपा और कांग्रेस के साथ आप की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी। इस सीट पर जनता ने भाजपा और कांग्रेस को बारी-बारी से मौका दिया है। साल 2002 के पहले चुनाव में यहां भाजपा, कांग्रेस के साथ भाकपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था।
 

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बाजपुर व‍िधानसभा सीट

बाजपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के यशपाल आर्य (Yashpal Arya) को जीत मिली है। यशपाल आर्य ने भारतीय जनता पार्टी के राजेश कुमार (Rajesh Kumar) को 1611 मतों से करीबी मुकाबले में मात दी है। चुनाव आयोग के अनुसार यशपाल आर्य को 40252 और राजेश कुमार को 38641 वोट मिले हैं। यशपाल आर्य पार्टी बदलते रहे हैं और 2017 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता था। इस विधानसभा क्षेत्र में 75.8 परसेंट वोट पड़े थे। इस बार कुल छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे जिनमें 2 महिलाएं थीं।

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चौबट्टाखाल विधानसभा सीट

पौड़ी गढ़वाल जिले की चौबट्टाखाल विधानसभा सीट से बीजेपी के सतपाल महराज चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के केसर सिंह को करीब 11 हजार वोटों से हराया। सतपाल महराज राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। ये सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है। यहां अब तक चार बार चुनाव हुए और तीन बार बीजेपी जीती। जबकि एक बार निर्दलीय ने चुनाव जीता। कांग्रेस को एक बार भी जीत नसीब नहीं हुई। 

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लैंसडाउन विधानसभा सीट

पौड़ी गढ़वाल जिले की लैंसडाउन सीट से बीजेपी के दलीप सिंह रावत चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने कांग्रेस की अनुकृति गोसाईं को करीब 10 हजार वोटों से हराया। तीसरे नंबर पर उत्तराखंड क्रांति दल के आनंद प्रकाश रहे। बीजेपी के दिलीप सिंह रावत यहां से लगातार दो बार से विधायक रहे हैं और इस बार हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में उतरे थे। उनका मुकाबला हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति से था। अनुकृति के लिए ये लड़ाई आसान नहीं रही और वो चुनाव हार गईं। 

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अनुपमा रावत
हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट

अनुपमा रावत ने हरिद्वार ग्रामीण सीट पर करीब 6000 वोट से भाजपा के यतीश्वरानंद को हरा दिया है। यतीश्वरानंद ने 2017 में इस सीट पर हरीश रावत को हराया था। हरिद्वार ग्रामीण सीट 2008 में अस्तित्व में आई और 2012 में पहली बार चुनाव हुए।  2017 के चुनाव में स्वामी यतीश्वरानंद ने हरीश रावत को बुरी तरह हराया था। इस बार हरीश रावत लालकुंआ सीट से लड़े। जबकि उनकी बेटी ने यहां से चुनाव लड़ा है। इस विधानसभा सीट पर दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं।

 

 

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