यहां सुबह 6 बजे से लग जाती है कचौड़ी-सब्जी खाने वालों की लाइन, शमशान घाट से लाश जलाकर लोग आते हैं खाने

Published : Feb 23, 2021, 02:53 PM IST

फ़ूड डेस्क: कचौड़ी-सब्जी एक ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसे लोग नाश्ते में खाना काफी पसंद करते हैं। खासकर बनारस की कचौड़ी-जलेबी की बात ही कुछ और है। यहां इसे खाने वालों की लंबी लाइन लगती है। बनारस में इस डिश के लिए अलग से एक पूरी गली ही है। कचौड़ी वाली गली में एक के बाद एक आपको कचौड़ी की दुकानें मिलेंगी। इस गली में सुबह पांच बजे से कचौड़ी की दुकानें खुल जाती हैं। इसके बाद 6 बजे से ग्राहक जुटने शुरू हो जाते हैं जो देर रात तक जमे रहते हैं। इस गली के किनारे ही मणिकर्णिका शमशान घाट है। वहां से लाश जलाने के बाद लोग सीधे कचौड़ी-जलेबी खाने आ जाते हैं। इस गली में 24 घंटे दुकानें खुली रहती है। बनारस की शान हैं ये खस्ता कचौड़ी-सब्जी... 

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यहां सुबह 6 बजे से लग जाती है कचौड़ी-सब्जी खाने वालों की लाइन, शमशान घाट से लाश जलाकर लोग आते हैं खाने

भले ही आप कितने भी फिटनेस कॉन्शियस हैं, लेकिन खाने के मामले में भारत की गलियों का कोई जवाब नहीं। बनारस की कचौड़ी-सब्जी काफी मशहूर है। यहां आने वाले इस डिश का नाश्ता करना नहीं भूलते। ये इतनी ज्यादा पसंद की जाती है कि इसके नाम से पूरी एक गली ाको बनारस में मिल जाएगी। 
 

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कचौड़ी वाली गली में एक के बाद एक कई दुकानें हैं, जहां खस्ता कचोरियाँ मिलती हैं। कुछ दुकानें तो सुबह चार बजे से खुल जाती है। चार बजे साफ़-सफाई के बाद यहां सब्जी बनने की तैयारी की जाती है। साथ ही कचोरियों का आटा तैयार किया जाता है। 
 

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सुबह 6 बजे तक कड़ाही गैस पर चढ़ जाती है और एक के बाद एक गर्मागर्म कचोरियां फूलकर निकलने लगती हैं। आपको इन दुकानों पर खड़े लोग उंगलियां चाटते हुए और सब्जी की डिमांड करते नजर आ जाएंगे। इसमें आलू-चने की सब्जी के अलावा ग्रेवी वाली मिक्स सब्जी भी शामिल है।  
 

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कचौरी-सब्जी के अलावा जलेबियाँ भी खूब डिमांड में रहती है। लोग भरपेट इनका नाश्ता करते हैं। कचौरी वाली गली के एक दुकानदार के मुताबिक, बीते पचास साल से वो इस जगह पर कचौरिया तल रहा है। लेकिन अभी भी वैसी ही भीड़ नजर आती है। लोगों के जीभ पर इसका स्वाद बसा हुआ है।  

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कुछ दुकानों में चना, पालक, बैंगन डालकर भी सब्जी बनाई जाती है। कचौरी वाली गली की खस्ता कचौरियां हर किसी को आकर्षित करती हैं। बगल में बसे शमशान घाट से लाश जलाने के बाद लोग सीधे इस गली में आते हैं और कचौरी सब्जी का लुत्फ़ उठाते हैं। 

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