Published : May 28, 2020, 11:40 AM ISTUpdated : May 28, 2020, 11:47 AM IST
फरीदाबाद, हरियाणा. लॉकडाउन ने लोगों की जिंदगी पर जैसे पहाड़-सा तोड़ दिया है। रोजी-रोटी खत्म होने और सरकार या अन्य कहीं से राशन-पानी और रहने का प्रबंध न होने पर हजारों लोग पैदल या साइकिलों जरिये अपने घरों को निकल पड़े। यह कहानी भी ऐसे ही मामा-भांजे की है। लेकिन मामा की विडंबना थी कि वो दिव्यांग होने से साइकिल भी नहीं चला सकता था। लिहाजा, भांजे ने हिम्मत जुटाई और बिहार के गया तक करीब 1350 किमी अकेले साइकिल खींचकर ले गया। पीछे मामा बैठा हुआ था। इस दूरी को तय करने में उसे 8 दिन लगे। रास्ते में कई जगहों पर उसे पुलिस ने डंडे भी मारे। कुछ दिन भूखा भी रहना पड़ा। मामा सतेंद्र ने बताया कि वो अपने भांजे बबलू कुमार का यह साहस जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा। दोनों गया जिले के गांव टोला थारी झारी में रहते हैं। बबलू हरियाणा के बल्लभगढ़ में रहकर एक वर्कशॉप में काम करता था। वहीं, मामा मलेरना रोड पर रहता था। वो यहां किसी प्राइवेट कंपनी में काम करता था। (पहली तस्वीर उन लोगों की है, जो पैदल अपने घरों को निकले हैं, दूसरी तस्वीर मामा-भांजे की है)
बबलू ने बताया कि वे 24 अप्रैल को अपने गांव पहुंच गए थे। वो रोज 170 किमी साइकिल चलाता था। उसके पास मामूली पैसे बचे थे, इसलिए रास्ते में ज्यादा कुछ नहीं खाया। एक-दो जगहों पर पुलिस ने उसे डंडे मारे। फिर जाने दिया। बबलू पलवल, आगरा, कानपुर, इलाहाबाद, बनारस, सासाराम होते हुए गया पहुंचा था। बबलू इस परेशानी के लिए सरकार का दोषी मानता है। आगे देखिए लॉकडाउन के दौरान की कुछ तस्वीरें
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यह तस्वीर यूपी के प्रयागराज की है। जो चलने में अक्षम हैं, उन्हें भी ऐसे घर जाना पड़ रहा है।
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यह तस्वीर मुंबई की है। घर जाने के लिए स्टेशन के लिए निकले एक परिवार का बच्चा अपने छोटे भाई को गोद में उठाए हुए।
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यह तस्वीर मुंबई की है। अपनी मां के पीछे लगेज लेकर दौड़ता मासूम। लॉकडाउन में बच्चों को भी परेशान होना पड़ रहा है।
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यह तस्वीर भी मुंबई की है। मासूम बच्चों को धूप से बचाकर घर के निकलीं महिलाएं।
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