लाइफस्टाइल डेस्क : सिखों के 10 गुरु में से एक गुरु नानक देव जी (Guru Nanak jayanti 2022) का आज प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। वह सिख समुदाय के सर्वप्रथम गुरु थे। जिन्होंने इस धर्म की स्थापना की थी। उनकी जयंती के मौके पर तरह-तरह के आयोजन किए जाते हैं। गुरु नानक देव जी के वचन हमारी जिंदगी को आत्मसात करने के लिए बेहद मददगार होते हैं। ऐसे में आज उनकी जयंती के मौके पर हम आपको बताते हैं उनके दस ऐसे अनमोल वचन जो आपको हर मुश्किल समय में काम आएंगे और आपका मार्गदर्शन करेंगे...
तपस्या केवल शब्दों में नहीं है, वह एक तपस्वी हैं जो सभी के साथ समान व्यवहार करते हैं। तपस्या दूर स्थानों पर जाने में निहित नहीं है, यह न तो घूमने में और न ही तीर्थों में स्नान करने में है। तपस्या का अर्थ है अशुद्धियों के बीच पवित्र रहना।
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धन-समृद्धि से युक्त बड़े-बड़े राज्यों के राजा-महाराजों की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती है, जिसमें में ईश्वर का प्रेम भरा हो- श्री गुरु नानक देव
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एक ही ईश्वर है। उसका नाम सत्य है, उसका व्यक्तित्व रचनात्मक है, और उसका रूप अमर है। वह भय रहित, शत्रुता रहित, अजन्मा और आत्म-प्रकाशित है। गुरु की कृपा से वह प्राप्त होता है। - गुरु नानक
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सांसारिक प्यार को जला दो, राख को रगड़ कर उसकी स्याही बना लो, दिल को कलम , बुद्धि को लेखक बना लो, वो लिखो जिसका कोई अंत ना हो, कोई सीमा ना हो।
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दुनिया में किसी भी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिए। बिना गुरु के कोई भी दूसरे किनारे तक नहीं जा सकता है- श्री गुरु नानक देव जी।
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परमात्मा की भाषा प्रेम है। उस मालिक से यदि हमें बात करनी है तो पहले हृदय में प्रेम पैदा करें, क्योंकि वो आपके दिल की सुनता है आपके अलफाज जब दिल से मिलकर फरियाद करते हैं तो सुनी जाती हैं।
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जिसके दिल में अकाल पुरुख वास करता है वह बादशाहों का बादशाह है। दुनिया में जिसे कोई न जानता हो परंतु उसके दिल में प्रभु का नाम बसा हो तो वह परमात्मा की नजर में लाखों शहंशाहों के बराबर है।
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अहंकार कभी भी इंसान को इंसान बनकर रहने नहीं देता, इसलिए कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। विनम्र होकर सेवाभाव से जीवन गुजारना चाहिए।
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चुप रहने से मन शांत नहीं होता। लोग मन को शांत करने के लिए मौन धारण करते है, लेकिन यह कोई तरीका नहीं है, मुंह को चुप करने का क्योंकि मुंह को चुप करने से मन शांत नहीं होता- गुरु नानक देव जी
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ना मैं एक बच्चा हूं , ना एक नवयुवक, ना ही मैं पौराणिक हूं, ना ही किसी जाति का हूं- श्री गुरु नानक देव