Published : Sep 02, 2022, 11:29 AM ISTUpdated : Sep 02, 2022, 11:31 AM IST
कोच्चि. भारत की सैन्य ताकत में एक और ईजाफा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 सितंबर को भारतीय नौसेना को INS विक्रांत (first indegenous aircraft carrier as INS Vikrant) सौंपा। यह पहला स्वदेशी(मेड इन इंडिया) विमानवाहक पोत है। इसे भारतीय नौसेना के इन-हाउस वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिज़ाइन किया गया है, जबकि कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है। यह सिर्फ एक कैरियर विमानवाहक पोत( aircraft carrier) भर नहीं है, बल्कि नौसेना के लिए प्रतिष्ठा और शक्ति का प्रतीक(prestige and power for the indian navy) है। ये एक फ्लोटिंग एयरबेस होते हैं, जिन पर हर तरह के लड़ाकू विमान उड़ाए जा सकते हैं। ऐसे लंबे विमान भी उड़ान भर सकते हैं, जिन पर हथियार तैनात होते है, चाहें वो परमाणु बम ही क्यों न हों। दुनियाभर में 13 नौसेनाओं के पास करीब 42(INS विक्रांत मिलाकर) विमानवाहन युद्धपोत हैं। अमेरिका के पास सबसे अधिक 11 युद्धपोत हैं। चीन और यूके की नौसेनाओं के पास 2-2 एयरक्राफ्ट कैरियर है। फ्रांस, रूस और इटली के पास एक-एक ऐसा युद्धपोत है। भारत के पास अब 2 हो गए हैं। सबसे बड़ी बात INS विक्रांत मेड इन इंडिया है। आइए जानते हैं दुनिया के टॉप-10 युद्धपोतों के बारे में...
आईएनएस विक्रांत, भारत(INS Vikrant, India): आईएनएस विक्रांत एक स्वदेशी विमानवाहक पोत है। इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में हुआ। इसे 2 सितंबर को पीएम मोदी ने नौसेना को सौंपा है।इस कुल परियोजना लागत लगभग US$3.1 बिलियन बताई जाती है।
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एडमिरल कुजनेत्सोव, रूस(Admiral Kuznetsov, Russia): रूस का कुज़नेत्सोव श्रेणी का विमानवाहक पोत वर्तमान में सेवा में सबसे अच्छे विमान वाहकों में से एक है। वर्तमान में रूसी नौसेना के प्रमुख के रूप में सेवारत, 305 मीटर लंबा एडमिरल कुज़नेत्सोव विमानवाहक पोत अपने मल्टी रोल कैपिसिटी के साथ काम कर सकता है। हथियारों से लैस होने के कारण यह काफी घातक हो जाता है।
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क्वीन एलिजाबेथ क्लास, यूके(Queen Elizabeth Class, UK): यूके रॉयल नेवी के सबसे बड़े विमानवाहक पोत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े विमानवाहक पोत हैं। ब्रिटिश नौसेना के लिए अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत, क्वीन एलिजाबेथ क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर जापान के यामाटो-क्लास युद्धपोतों के बाद दूसरा सबसे बड़ा गैर-अमेरिकी नौसेना युद्धपोत भी है। रॉयल नेवी के दो क्वीन एलिजाबेथ क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर में-एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ को दिसंबर 2017 में कमीशन किया गया था, जबकि एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स को दिसंबर 2017 में लॉन्च किया गया था और दिसंबर 2019 में कमीशन किया गया था।
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यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड क्लास (USS Gerald R Ford Class (CVN-78): अमेरिकी नौसेना का गेराल्ड आर फोर्ड क्लास दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक युद्धपोतों के अंतर्गत आता है। इस वर्ग में पहला वाहक, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, मई 2017 में कमीशन किया गया था। यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड 75 से अधिक विमान ले जा सकता है और कुल 4,539 कर्मियों को बैठा सकता है।
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शेडोंग, चीन(Shandong, China): चीन का दूसरा विमानवाहक पोत शेडोंग 26 अप्रैल, 2017 को लॉन्च किया गया था।अपने पूर्ववर्ती (लिओनिंग) के विपरीत शेडोंग चीन का पहला घरेलू निर्मित वाहक है।दोनों वाहक आकार में समान हैं। हालांकि शेडोंग में अधिक एडवांस तकनीक है, जो इसे चीन के लिए प्रमुख विमान वाहक बनाता है।
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निमित्ज़ क्लास, यूएसए(Nimitz Class, USA): अमेरिकी नौसेना के दस निमित्ज़ श्रेणी के परमाणु-संचालित विमान वाहक दुनिया के दूसरे सबसे बड़े विमान वाहक हैं। वे निश्चित रूप से सबसे अच्छी नस्लों में से एक हैं और इस तरह के युद्धपोतों की सभी विशेषताओं को दिखाते हैं। इस वर्ग के प्रमुख जहाज, यूएसएस निमित्ज़ को मई 1975 में लॉन्च किया गया था और दसवें अंतिम यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू बुश को जनवरी 2009 में कमीशन किया गया था।
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लिओनिंग, चीन(Liaoning, China):चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) का टाइप 001 एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है। प्रारंभ में सोवियत नौसेना के लिए दूसरे कुज़नेत्सोव-श्रेणी के विमान के रूप में योजना बनाई गई थी। इस पोत को बाद में 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद चीन द्वारा खरीदा गया था। इसकी कुल लंबाई 304.5 मीटर और कुल बीम 75 मीटर है।
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आईएनएस विक्रमादित्य, भारत(INS Vikramaditya, India): भारतीय नौसेना का एक बड़ा युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य दुनिया के सबसे बड़े विमान वाहकों में भी अपना स्थान रखता है। इसे 2013 में उतारा गया था।
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कैवोर, इटली(Cavour, Italy): इतालवी नौसेना का प्रमुख कैवोर विमानवाहक पोत में कई डिफेंस सिस्टम्स हैं। जैसे कि छोटी दूरी के डिफेंस सिस्टम्स, बंदूकें और दुश्मनों को भ्रमित करने वाले लांचर। इसकी अधिकतम गति 16 समुद्री मील है, जिसे छह डीजल जनरेटर की मदद से हासिल किया गया है।
चार्ल्स डी गॉल, फ्रांस(Charles De Gaulle, France): पहला फ्रांसीसी परमाणु-संचालित सतह जहाज( nuclear-powered surface ship) चार्ल्स डी गॉल फ्रांस के सबसे महत्वपूर्ण उड़ान वाहकों में से एक है और 2001 से सेवा में है।