भोपाल. मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों भूचाल मचा हुआ है। कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 17 विधायकों के साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले विधायकों में कमलनाथ सरकार के 6 मंत्री भी शामिल हैं। सिंधिया लंबे समय से पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। हम आपको सिंधिया के इन्ही 17 सिपाहियों के बारे में बता रहे हैं, जिनके दम पर उन्होंने कांग्रेस को यह करारा झटका दिया है।
सिंधिया के साथ इस्तीफा देने वाले 17 विधायकों में कमलनाथ सराकर के 6 मंत्री भी शामिल हैं।
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प्रद्युम्न सिंह तोमर: फूड एंड सिविल सप्लाइज मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर खुद नामी में घुसकर सफाई करने के लिए काफी चर्चा में रह चुके हैं। तोमर ग्वालियर से विधायक हैं।
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प्रभुराम चौधरी : प्रभूराम चौधरी पेशे से डॉक्टर थे। 1985 में पहली बार विधायक बने थे। सांची विधानसभा सीट से चौधरी 3 बार विधायक बन चुके हैं। कमलनाथ सरकार में वो शिक्षा मंत्री थे।
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महेंद्र सिंह सिसौदिया: कमलनाथ सरकार में श्रम मंत्री के रूप में काम कर रहे सिसौदिया ने 2013 और 2018 में बामरी विधानसभा सीट से चुनाव जीता है।
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तुलसी सिलावट: सानवेर विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने तुलसी सिलावट ने 1985, 2008,2015 और 2018 में चुनाव जीता था। कमलनाथ सरकार में वो स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे।
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गोविंद सिंह राजपूत: कमलनाथ के मंत्रीमंडल में राजस्व मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत ने सागर के सुरखी विधानसभा सीट से तीन बार विधायक का चुनाव जीता है। वो मध्यप्रदेश की यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं।
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इमरती देवी :कमलनाथ सरकार में महिला और विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाली इमरती देवी डबरा विधनसभा सीट से विधायक हैं। वो इस सीट से 2008 से लगातार जीतती आ रही हैं।
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ब्रजेंद्र सिंह यादव: मुंगावली सीट से विधायक ब्रजेन्द्र सिंह यादव ने भी सिंधिया के साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस सीट से पहले महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा भी विधायक रहे थे।
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गिरिराज डंडोतिया: दंडोतिया दिमानी सीट से कांग्रेस विधायक हैं। वो सिंधिया के कट्टर समर्थकों में से एक हैं।
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हरदीप सिंह डंग: कांग्रेस सरकार का साथ छोड़ने वाले विधायकों में डंग सबसे आगे थे। हालांकि वो खुद को किसी भी खेमे का नहीं बता रहे हैं।
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जजपाल सिंह जज्जी :जज्जी अशोकनगर सीट से विधायक हैं। 2018 में उन्होंने भाजपा के लड्डूराम को हराकर चुनाव जीता था।
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कमलेश जाटव :कमलेश जाटव मुरैना जिले की अम्बाह सीट से विधायक हैं। उन्होंने ट्रांसजेंडर उम्मीदवार को करीबी अंतर से हराया था।
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मुन्ना लाल :गोयल गोयल भी सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। पिछले महीने ही उन्होंने अपनी मांग को लेकर धरना किया था। गोयल ग्वालियर पूर्वी सीट से विधायक हैं।
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ओ पी सिंह भदौरिया: भिंड जिले की मेहगांव सीट से विधायक बने ओपी सिंह भदौरिया भी सिंधिया के समर्थन में हैं। उन्होंने 2018 में भाजपा के राकेश शुक्ला को हराया था।
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रघुराज सिंह कंसाना: मुरैना सीट से विधायक रघुराज सिंह कंसाना सिंधिया के भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं। पिछले साल ही सीबीआई ने उनके घर छापा मारा था।
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राजवर्धन सिंह दत्तीगांव :यह विधायक शुरुआत से ही कमलनाथ सरकार के खिलाफ रहा है। दत्तीगांव सीट से विधायक बनने वाले राजवर्धन राज गराने के नेता हैं।
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सुरेश धाकड़: पोहारी सीट से चुनाव जीतने वाले सुरेश धाकड़ ने 10 साल से भाजपा विधायक रहे प्रहलाद भारती को हराया था।
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रक्षा संतराम सरौनिया: सरौनिया भांदेर सीट से विधायक हैं। उनके पित कई बार विवादों में आ चुके हैं।
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