क्या अभिषेक बनर्जी TMC के भीतर बढ़ते असंतोष की सबसे बड़ी वजह बन गए हैं?आखिर TMC के बागी नेता अभिषेक बनर्जी का विरोध क्यों कर रहे हैं? क्या अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से पार्टी के वरिष्ठ नेता नाराज हैं? TMC में बढ़ती बगावत के लिए अभिषेक बनर्जी कितने जिम्मेदार हैं?
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी इस समय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर सबसे विवादित चेहरों में से एक बन गए हैं। पार्टी छोड़ने वाले कई नेताओं का कहना है कि TMC में बढ़ती समस्याओं और असंतोष की बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी हैं। राज्य में लगातार तीन बार सत्ता में रहने वाली TMC आज अपने अस्तित्व और पहचान के सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और विधायक या तो इस्तीफा दे चुके हैं या खुलकर नेतृत्व के खिलाफ खड़े हो गए हैं। टीएमसी में सबसे ज्यादा अगर कोई निशाने पर है, तो वो ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी हैं। आखिर क्या है इसकी वजह?

अभिषेक बनर्जी बागी नेताओं के निशाने पर क्यों?
1- कल्याण बनर्जी ने खुलकर जताई नाराजगी
पार्टी के भीतर विरोध की सबसे बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी को बताया जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया अब पूरी तरह उनके हाथों में केंद्रित हो गई है। गुरुवार को TMC के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि उन्हें अपने और अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनना होगा।
2- रिताब्रता बनर्जी पहले ही जता चुके आपत्ति
कल्याण बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले सप्ताह रिताब्रता बनर्जी भी विधायकों की बगावत का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने भी ममता बनर्जी से पार्टी का मुख्य सलाहकार बनने की अपील की थी और कहा था कि अभिषेक बनर्जी का विधानसभा से कोई सीधा संबंध नहीं है।
3- I-PAC पर बढ़ती निर्भरता से भी नाराज हैं नेता
बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं की जगह अब राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उनका कहना है कि उम्मीदवारों के चयन से लेकर कई अहम राजनीतिक फैसलों तक में पार्टी के पुराने नेताओं की राय को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। बागी नेता दावा कर रहे हैं कि यही वजह है कि वे खुद को "असली TMC" मानते हैं और मौजूदा नेतृत्व से अलग रास्ता अपनाने की बात कर रहे हैं।
4- 'अहंकारी नेतृत्व' के आरोपों में घिरे अभिषेक बनर्जी
पार्टी छोड़ने वाले कई नेताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व बेहद केंद्रीकृत और अहंकारी है। उनका कहना है कि फैसले कुछ लोगों तक सीमित हो गए हैं और वरिष्ठ नेताओं को लगातार किनारे किया जा रहा है। कल्याण बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया कि वह भविष्य में अभिषेक बनर्जी का कोई कानूनी मामला नहीं लड़ेंगे क्योंकि उन्हें उनका व्यवहार पसंद नहीं है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह राजनीति और पेशे दोनों में अभिषेक से वरिष्ठ हैं, इसलिए उनके साथ अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी की चुनावी हार और मौजूदा संकट के लिए अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार हैं।
5- वरिष्ठ नेताओं को किनारे किए जाने की शिकायत
पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मानते हैं कि उन्हें महत्वपूर्ण निर्णयों से दूर रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि अभिषेक बनर्जी की सीधी नियुक्तियों और विधायी मामलों पर बढ़ते प्रभाव के कारण अनुभवी नेताओं की भूमिका लगातार कम होती जा रही है। इससे संगठन के भीतर असंतोष और अविश्वास का माहौल पैदा हो रहा है।
6- TMC का नेतृत्व जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुका
राज्यसभा से इस्तीफा देने और TMC की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने सोमवार को RG कर अस्पताल रेप और मर्डर केस को लेकर राज्य सरकार और पार्टी की आलोचना की। रॉय का कहना था कि राज्य का नेतृत्व जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुका है और लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने में असफल रहा है। TMC में जारी यह राजनीतिक संकट फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। लगातार हो रहे इस्तीफे, विधायकों की बगावत और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।


